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UP VOTER LIST2026: 10 अप्रैल को आएगी फाइनल लिस्ट; नाम कटने पर न हों परेशान, जानें DM और मुख्य निर्वाचन अधिकारी के पास अपील की पूरी प्रक्रिया

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UP VOTER LIST2026: 10 अप्रैल को आएगी फाइनल लिस्ट; नाम कटने पर न हों परेशान, जानें DM और मुख्य निर्वाचन अधिकारी के पास अपील की पूरी प्रक्रिया

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आगामी लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को पारदर्शी और त्रुटिहीन बनाने के लिए भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने कमर कस ली है। प्रदेश में चल रहे ‘विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण’ (SIR) अभियान के तहत मतदाता सूचियों के शुद्धिकरण का कार्य अब अपने अंतिम चरण में है। आयोग की योजना के मुताबिक, 10 अप्रैल 2026 को उत्तर प्रदेश की ‘अंतिम मतदाता सूची’ (Final Voter List) का प्रकाशन कर दिया जाएगा।

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​इस बार के शुद्धिकरण अभियान में उत्तर प्रदेश से लगभग 6 से 7 लाख नाम काटे जाने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में यदि किसी पात्र मतदाता का नाम सूची से गायब मिलता है, तो उसे घबराने की जरूरत नहीं है; आयोग ने इसके लिए एक मजबूत अपील तंत्र विकसित किया है।

नाम कटने पर ऐसे करें ‘अपील’: स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया

​निर्वाचन आयोग ने मतदाताओं की सुविधा और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए त्रिस्तरीय अपील प्रणाली की व्यवस्था की है:

  1. जिला निर्वाचन अधिकारी (DM) के पास अपील: 10 अप्रैल को अंतिम सूची जारी होने के बाद, यदि किसी व्यक्ति का नाम सूची से कटा हुआ मिलता है, तो वह 15 दिन के भीतर संबंधित जिले के जिला निर्वाचन अधिकारी (डीएम) के समक्ष अपनी अपील दर्ज करा सकता है। डीएम को इस शिकायत का निस्तारण निर्धारित समय सीमा के भीतर करना होगा।
  2. मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के पास द्वितीय अपील: यदि मतदाता जिला निर्वाचन अधिकारी (डीएम) के फैसले से संतुष्ट नहीं होता है, तो वह डीएम का फैसला आने के 30 दिन के भीतर उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के पास अपनी गुहार लगा सकता है।
  3. ऑनलाइन शिकायत पोर्टल: मतदाता सीधे ‘नेशनल वोटर सर्विस पोर्टल’ (NVSP) या ‘वोटर हेल्पलाइन ऐप’ के जरिए भी अपनी आपत्ति दर्ज करा सकते हैं, जिसका संज्ञान सीधे चुनाव आयोग द्वारा लिया जाता है।

आखिर क्यों काटे जा रहे हैं 6-7 लाख नाम?

​उत्तर प्रदेश में चल रही इस पुनरीक्षण प्रक्रिया का मुख्य उद्देश्य ‘डुप्लीकेसी’ और ‘फर्जीवाड़े’ को रोकना है। सूत्रों के मुताबिक, काटे जाने वाले नामों में मुख्य रूप से तीन श्रेणियां शामिल हैं:​मृतक मतदाता: ऐसे लोग जिनकी मृत्यु हो चुकी है लेकिन उनका नाम अब भी सूची में दर्ज था। ​शिफ्टेड (Shifted) वोटर्स: जो लोग स्थाई रूप से अपना पुराना पता छोड़कर दूसरे विधानसभा क्षेत्र या शहर में बस चुके हैं।​दोहरी प्रविष्टि: तकनीकी जांच (SIR) के दौरान ऐसे कई मामले सामने आए हैं जहाँ एक ही मतदाता के नाम दो अलग-अलग बूथों या विधानसभाओं में दर्ज थे।

10 अप्रैल की डेडलाइन: ‘त्रुटिहीन’ सूची का लक्ष्य

​निर्वाचन आयोग का लक्ष्य है कि 10 अप्रैल तक प्रत्येक जिले में एक ऐसी सूची तैयार हो जाए, जिसमें केवल सक्रिय और पात्र मतदाता ही शामिल हों। इस डिजिटल सूची को आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर भी अपलोड किया जाएगा, जहाँ से कोई भी नागरिक अपना नाम, बूथ संख्या और क्रमांक देख सकेगा।

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