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अहमदाबाद में आयोजित प्रथम विश्व योगासन चैंपियनशिप-2026 में उत्तराखंड के इकलौते खिलाड़ी ने लहराया परचम

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अहमदाबाद में आयोजित प्रथम विश्व योगासन चैंपियनशिप-2026 में उत्तराखंड के इकलौते खिलाड़ी ने लहराया परचम

देहरादून।

योग की जननी और देवभूमि के रूप में विख्यात भारत ने एक बार फिर वैश्विक मंच पर अपनी श्रेष्ठता का लोहा मनवाया है। गुजरात के अहमदाबाद में आयोजित ‘प्रथम विश्व योगासन चैंपियनशिप-2026’ में भारतीय टीम ने ऐतिहासिक सफलता दर्ज की है। इस शानदार कामयाबी में उत्तराखंड की राजधानी देहरादून स्थित श्री गुरु राम राय (एसजीआरआर) विश्वविद्यालय के प्रतिभावान छात्र और युवा योगासन खिलाड़ी सुमीर ज्ञवाली ने अभूतपूर्व योगदान दिया है। भारतीय योगासन टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए सुमीर ने एक स्वर्ण (गोल्ड) और एक कांस्य (ब्रॉन्ज) पदक जीतकर न केवल देश का मान बढ़ाया, बल्कि उत्तराखंड और अपने विश्वविद्यालय का नाम भी विश्व पटल पर सुनहरे अक्षरों में दर्ज करा दिया।

​श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय के माननीय प्रेसिडेंट श्रीमहंत देवेन्द्र दास जी महाराज ने सुमीर ज्ञवाली की इस ऐतिहासिक और गौरवमयी उपलब्धि पर उन्हें सहर्ष बधाई दी है। महाराज जी ने सुमीर के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि उनकी इस सफलता ने पूरे प्रदेश को गौरवान्वित किया है।

विश्व मंच पर तिरंगे का गौरव: पारंपरिक समूह में गोल्ड और सीनियर वर्ग में ब्रॉन्ज

​अहमदाबाद में देश-विदेश के शीर्ष योग साधकों के बीच मुकाबला बेहद कड़ा था। इस कड़े विधिक और तकनीकी मुकाबले में सुमीर ज्ञवाली ने अपनी कलात्मकता और एकाग्रता का बेजोड़ प्रदर्शन किया।​पारंपरिक समूह प्रतियोगिता (Traditional Group Event): सुमीर ने भारतीय टीम का हिस्सा रहते हुए शानदार तालमेल का प्रदर्शन किया और टीम को स्वर्ण पदक दिलाने में मुख्य भूमिका निभाई। उनकी इस जीत के साथ ही विश्व मंच पर भारत का तिरंगा शान से लहराया और राष्ट्रगान की गूंज उठी।​सीनियर-बी पुरुष वर्ग (Senior-B Men’s Category): व्यक्तिगत ट्रेडिशनल योगासन इवेंट में सुमीर ने कठिन आसनों में अद्भुत शारीरिक संतुलन, लचीलापन, मानसिक दृढ़ता और तकनीकी दक्षता का परिचय देते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया।एकमात्र उत्तराखंडी चेहरा:

इस विश्व चैंपियनशिप के लिए चयनित संपूर्ण भारतीय दल में सुमीर ज्ञवाली उत्तराखंड राज्य से प्रतिनिधित्व करने वाले एकमात्र खिलाड़ी थे। उनकी यह विशिष्टता इस उपलब्धि को और अधिक खास और ऐतिहासिक बना देती है।

 

साधना, समर्पण और प्रशिक्षण की अद्भुत मिसाल

​सुमीर ज्ञवाली वर्तमान में श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय के ‘स्कूल ऑफ योगिक साइंस एंड नेचुरोपैथी’ से एम.एससी. (योगिक साइंस एंड अल्टरनेटिव थेरेपीज) की पढ़ाई कर रहे हैं। विश्वविद्यालय के शिक्षकों के अनुसार, सुमीर की यह विश्वस्तरीय उपलब्धि केवल कुछ दिनों की मेहनत का परिणाम नहीं है, बल्कि यह उनके कड़े अनुशासन, अटूट समर्पण और निरंतर की जाने वाली योग साधना की एक प्रेरक कहानी है।

​इस यात्रा में श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय द्वारा प्रदान किए गए विश्वस्तरीय प्रशिक्षण, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और निरंतर मिलने वाले प्रोत्साहन ने उत्प्रेरक का काम किया। विश्वविद्यालय प्रशासन खेल और योग की विधाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाने के लिए सदैव प्रतिबद्ध रहा है, जिसका सीधा परिणाम आज सुमीर की इस बड़ी जीत के रूप में सामने आया है।

योग: स्वस्थ और सफल जीवन का मूलमंत्र

​इस ऐतिहासिक जीत के बाद विश्वविद्यालय परिसर में हर्ष का माहौल है। योग विशेषज्ञों का मानना है कि योग केवल शरीर को स्वस्थ रखने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह मन, विचारों, चेतना और संपूर्ण व्यक्तित्व को निखारकर इंसान को एक सच्चा विजेता बनाता है। सुमीर ज्ञवाली की यह सफलता देश के युवाओं को संदेश देती है कि नियमित योगाभ्यास ही आज के दौर में स्वस्थ, संतुलित, तनावमुक्त और सफल जीवन का सबसे मजबूत आधार है।

विश्वविद्यालय परिवार में जश्न का माहौल

​सुमीर की इस दोहरी सफलता पर श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) के. प्रतापन, कुलसचिव, सभी संकायों के डीन, विभागाध्यक्षों (HODs) और प्राध्यापकों सहित समस्त विश्वविद्यालय परिवार ने उन्हें हार्दिक बधाई दी है। कुलपति प्रो. प्रतापन ने कहा कि सुमीर ने यह साबित कर दिया है कि यदि सही दिशा और दृढ़ संकल्प हो, तो देवभूमि की प्रतिभाएं दुनिया के किसी भी कोने में अपनी चमक बिखेर सकती हैं। विश्वविद्यालय के छात्रों ने अपने सहपाठी की इस वैश्विक जीत पर मिठाई बांटकर और ढोल-नगाड़ों के साथ अपनी खुशी का इजहार किया। सुमीर की यह सफलता अब आने वाली पीढ़ियों और अन्य छात्रों के लिए योग के क्षेत्र में करियर बनाने का एक बड़ा मार्ग प्रशस्त करेगी।

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