देहरादून में चिकित्सा का चमत्कार: मैक्स अस्पताल के डॉक्टरों ने 8 घंटे की जटिल सर्जरी कर युवक का कटा हुआ पैर दोबारा जोड़ा
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देहरादून में चिकित्सा का चमत्कार: मैक्स अस्पताल के डॉक्टरों ने 8 घंटे की जटिल सर्जरी कर युवक का कटा हुआ पैर दोबारा जोड़ा
विशेष संवाददाता, देहरादून
देहरादून, 22 जून 2026: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून स्थित मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के डॉक्टरों ने चिकित्सा क्षेत्र में एक और अभूतपूर्व कीर्तिमान स्थापित किया है। अस्पताल के अनुभवी और विशेषज्ञ सर्जनों की एक टीम ने एक बेहद पेचीदा और संवेदनशील ऑपरेशन को अंजाम देते हुए, एक भयानक औद्योगिक हादसे का शिकार हुए 23 वर्षीय युवक के शरीर से पूरी तरह अलग हो चुके दाहिने पैर को सफलतापूर्वक वापस जोड़ (Limb Replantation) दिया है। आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों, उन्नत माइक्रोसर्जिकल कौशल और डॉक्टरों की त्वरित सूझबूझ के चलते युवक को एक नया जीवन और अपंगता से मुक्ति मिली है।
खुदाई के दौरान हुआ था दिल दहला देने वाला हादसा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, उत्तराखंड का रहने वाला यह 23 वर्षीय युवक एक निर्माण स्थल पर काम कर रहा था। इसी दौरान एक उत्खननकर्ता (excavator) की कन्वेयर बेल्ट पर अचानक संतुलन बिगड़ने से वह उसकी चपेट में आ गया। हादसा इतना भीषण था कि कन्वेयर बेल्ट की भारी-भरकम मशीनरी के दबाव के कारण युवक का दाहिना पैर और पंजा घुटने के नीचे से कटकर शरीर से पूरी तरह अलग (Completely Amputated) हो गया।
घटना के तुरंत बाद कार्यस्थल पर हड़कंप मच गया। गंभीर रूप से घायल और लहूलुहान युवक को तुरंत नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने अत्यधिक रक्तस्राव को रोकने के लिए उसे प्राथमिक उपचार (First Aid) दिया। मामले की गंभीरता और चोट की भयावहता को देखते हुए, डॉक्टरों ने उसे तुरंत देहरादून के मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल के लिए रेफर कर दिया।
बर्फ के डिब्बे में लाया गया कटा हुआ अंग
जब मरीज को मैक्स अस्पताल लाया गया, तो उसकी स्थिति बेहद नाजुक थी। अत्यधिक खून बह जाने के कारण वह गहरे सदमे (Severe Trauma) में था और उसकी जान पर बन आई थी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि मरीज के परिजनों और प्राथमिक उपचार करने वाले स्वास्थ्य कर्मियों ने सूझबूझ दिखाते हुए उसके कटे हुए पैर को एक एयरटाइट बॉक्स में बर्फ के पैकेटों (Ice Packs) के बीच सुरक्षित रखा था, जो इस तरह के रिप्लांटेशन ऑपरेशनों में अंग को जीवित रखने के लिए सबसे पहली और अनिवार्य शर्त होती है।
8 घंटे चला जटिल और बारीक ऑपरेशन
अस्पताल पहुंचते ही बिना एक पल गंवाए मैक्स अस्पताल की इमरजेंसी टीम सक्रिय हो गई। मरीज को तुरंत स्थिर (Stabilize) किया गया और क्रिटिकल केयर विभाग ने उसकी स्थिति को संभाला। इसके तुरंत बाद एक बहु-विषयक (Multidisciplinary) मेडिकल टीम का गठन किया गया।
इस बेहद जटिल सर्जरी का नेतृत्व मैक्स अस्पताल के एस्थेटिक एंड रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी विभाग के कंसलटेंट डॉ. चिसेल भाटिया ने किया। उनके साथ अस्पताल की ऑर्थोपेडिक्स एंड ज्वाइंट रिप्लेसमेंट टीम के विशेषज्ञ भी शामिल हुए। डॉक्टरों के सामने चुनौती न केवल पैर को शारीरिक रूप से जोड़ने की थी, बल्कि उसमें रक्त संचार को दोबारा बहाल करने और तंत्रिकाओं (Nerves) को जीवित करने की भी थी।
यह मैराथन ऑपरेशन लगभग आठ घंटे तक लगातार चला। इस दौरान डॉक्टरों ने सूक्ष्मदर्शी (Microscope) उपकरणों की मदद से बारीक माइक्रोसर्जिकल प्रक्रियाओं को अंजाम दिया। सर्जरी के दौरान क्षतिग्रस्त हड्डियों को आपस में फिक्स किया गया, कटी हुई मुख्य रक्त वाहिकाओं (Blood Vessels) को अत्यंत बारीकी से जोड़ा गया ताकि पैर में खून का दौरा फिर से शुरू हो सके। इसके साथ ही, पैर की गतिशीलता के लिए जिम्मेदार टेंडन, नसों और सॉफ्ट टिश्यूज (कोमल ऊतकों) की भी बेहद सूक्ष्मता से मरम्मत की गई।
14 दिनों तक ICU में सघन निगरानी और रिकवरी
सफल ऑपरेशन के बाद मरीज को तुरंत इंटेंसिव केयर यूनिट (ICU) में शिफ्ट किया गया, जहाँ चौबीसों घंटे उसके पैर में रक्त के प्रवाह की निगरानी की गई। डॉक्टरों के अनुसार, रिप्लांटेशन सर्जरी के बाद के शुरुआती दिन बेहद संवेदनशील होते हैं, क्योंकि इसमें संक्रमण का खतरा और ग्राफ्टेड अंग के रिजेक्ट होने की संभावना बनी रहती है।
मरीज की उपचार यात्रा के दौरान घाव प्रबंधन (Wound Management) और पैर की त्वचा को पूरी तरह सुरक्षित करने के लिए ‘स्किन ग्राफ्टिंग’ (Skin Grafting) की प्रक्रियाएं भी अपनाई गईं, ताकि पैर और पंजे की जीवंतता (Viability) को हर हाल में बरकरार रखा जा सके। अस्पताल में कुल 14 दिनों के सफल प्रवास और बेहतरीन रिकवरी के बाद, मरीज को पूरी तरह स्थिर और स्वस्थ स्थिति में अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है। डॉक्टरों के अनुसार, उसका पैर और पंजा अब पूरी तरह सुरक्षित है और उसमें जीवन के लक्षण सामान्य हैं।
चिकित्सा विशेषज्ञों का क्या कहना है?
इस ऐतिहासिक कामयाबी पर बात करते हुए एस्थेटिक एंड रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी विभाग के कंसलटेंट डॉ. चिसेल भाटिया ने कहा:”यह हमारे सामने एक अत्यंत चुनौतीपूर्ण और असाधारण मामला था, जिसके लिए न केवल उच्च स्तरीय माइक्रोसर्जिकल कौशल की आवश्यकता थी, बल्कि एक प्लास्टिक सर्जन द्वारा समय पर किए गए हस्तक्षेप की भी बड़ी भूमिका थी। किसी भी अंग के दोबारा जोड़े जाने (Replantation) की सफलता सिर्फ ऑपरेशन थिएटर तक सीमित नहीं होती। इसके लिए ऑपरेशन के बाद की बारीक और सघन देखभाल, ऊतकों की जीवंतता की निरंतर निगरानी और हीलिंग को सपोर्ट करने के लिए चरणबद्ध तरीके से की जाने वाली रिकंस्ट्रक्टिव प्रक्रियाएं बेहद जरूरी होती हैं।”
डॉ. भाटिया ने आगे जोड़ते हुए कहा कि हालांकि मरीज के पूर्ण पुनर्वास (Functional Rehabilitation) और पैर को पहले की तरह पूरी तरह गतिशील होने में अभी थोड़ा समय लगेगा और यह प्रक्रिया क्रमिक होगी, लेकिन एक युवा मरीज के अपने खुद के प्राकृतिक अंग को बचा लेना उसे मानसिक और शारीरिक रूप से बहुत संबल देता है। ऐसे गंभीर मामलों की सफलता यह दर्शाती है कि आधुनिक प्लास्टिक और रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी चिकित्सा जगत में कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
मैक्स अस्पताल की विशेषज्ञता की सराहना
इस जटिल मामले के सफल प्रबंधन ने एक बार फिर मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल, देहरादून की गंभीर आघात (Severe Trauma) और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं में विशेषज्ञता को साबित किया है। अस्पताल की मल्टीडिसीप्लिनरी अप्रोच—जिसमें अत्याधुनिक ऑर्थोपेडिक, रिकंस्ट्रक्टिव प्लास्टिक सर्जरी और क्रिटिकल केयर सेवाओं का बेहतरीन तालमेल देखने को मिला—ने उत्तराखंड और आसपास के क्षेत्रों के मरीजों के लिए एक नया भरोसा पैदा किया है। अस्पताल प्रशासन ने पूरी मेडिकल टीम को इस शानदार सफलता पर बधाई दी है। मरीज को अभी कुछ समय तक डॉक्टरों की देखरेख में नियमित फॉलो-अप और फिजियोथेरेपी से गुजरना होगा।
