उत्तराखंड में बिजली का संकट: तकनीकी खराबी और नदियों में सिल्ट आने से 560 मेगावाट उत्पादन ठप, यूपीसीएल ने मांगी उपभोक्ताओं से सहयोग की अपील
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उत्तराखंड में बिजली का संकट: तकनीकी खराबी और नदियों में सिल्ट आने से 560 मेगावाट उत्पादन ठप, यूपीसीएल ने मांगी उपभोक्ताओं से सहयोग की अपील
देहरादून:
उत्तराखंड के विभिन्न हिस्सों में हाल ही में उपभोक्ताओं को हुई अवांछित बिजली कटौती (रोस्टरिंग) को लेकर उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) ने स्थिति स्पष्ट की है। निगम के अनुसार, राज्य में बिजली उत्पादन इकाइयों में अचानक आए आकस्मिक तकनीकी व्यवधान और नदियों में गाद (सिल्ट) का प्रवाह बढ़ने की वजह से विद्युत आपूर्ति प्रभावित हुई थी, जिसके चलते ग्रिड की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सीमित अवधि के लिए रोस्टरिंग लागू करनी पड़ी।
रातभर प्रभावित रही आपूर्ति
यूपीसीएल द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, बिजली संकट की यह स्थिति 31 जुलाई, 2026 की शाम 19:30 बजे से शुरू होकर 01 अगस्त, 2026 की प्रातः 01:10 बजे तक बनी रही। इस अवधि के दौरान प्रदेश के अलग-अलग श्रेणियों के उपभोक्ताओं को सीमित समय के लिए बिजली कटौती का सामना करना पड़ा।
निगम ने बताया कि बिजली की उपलब्धता और मांग के बीच अचानक आए इस बड़े अंतर के कारण ग्रिड के सुरक्षित और संतुलित संचालन के लिए रोस्टरिंग लागू करना अनिवार्य हो गया था।
उत्पादन ठप होने के प्रमुख कारण
अचानक पैदा हुए इस बिजली संकट के पीछे तकनीकी और प्राकृतिक, दोनों तरह के कारण जिम्मेदार रहे। कुल मिलाकर लगभग 560 मेगावाट विद्युत उत्पादन क्षमता अचानक ठप हो गई:एपीएल रायगढ़ (350 मेगावाट): इस इकाई में अचानक स्टीम लीकेज की समस्या उत्पन्न हो गई, जिससे उत्पादन पूरी तरह प्रभावित हुआ।व्यासी जलविद्युत परियोजना (120 मेगावाट): नदियों में अचानक अत्यधिक सिल्ट (गाद) आने के कारण पानी में उच्च PPM (पार्ट्स प्रति मिलियन) दर्ज किया गया, जिससे सुरक्षा के लिहाज से संयंत्र से उत्पादन रोकना पड़ा।चिल्ला जलविद्युत परियोजना (88 मेगावाट): यहां भी पानी में उच्च PPM की समस्या के कारण उत्पादन बाधित रहा।
नदियों में अचानक सिल्ट का प्रवाह बढ़ने से जलविद्युत गृहों की टर्बाइनों को नुकसान से बचाने के लिए उत्पादन रोकना एक अनिवार्य तकनीकी प्रक्रिया होती है, जिससे बिजली उपलब्धता में भारी गिरावट आई।
ऊर्जा एक्सचेंज से भी नहीं मिली पर्याप्त राहत
बिजली आपूर्ति में आई इस अचानक कमी की भरपाई के लिए यूपीसीएल प्रशासन तुरंत सक्रिय हुआ। निगम द्वारा विद्युत आपूर्ति की निरंतरता बनाए रखने के लिए नेशनल और रीजनल ऊर्जा एक्सचेंजों (Energy Exchanges) से अतिरिक्त बिजली खरीदने के व्यापक प्रयास किए गए।
हालांकि, उस समय ऊर्जा एक्सचेंजों में भी बिजली की सीमित उपलब्धता होने के कारण राज्य की आवश्यकता के अनुसार बिजली खरीद पाना संभव नहीं हो सका। ऐसी स्थिति में ग्रिड को किसी भी बड़े हादसे या ब्रेकडाउन से बचाने के लिए निगम के पास रोस्टरिंग लागू करने के अलावा अन्य कोई विकल्प नहीं बचा था।
निगम की उपभोक्ताओं से धैर्य बनाए रखने की अपील
उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) ने अपने आधिकारिक बयान में दोहराया है कि वह प्रदेश के सभी सम्मानित उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण और यथासंभव 24×7 निर्बाध बिजली आपूर्ति उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।”विद्युत उत्पादन एवं आपूर्ति प्रणाली में उत्पन्न होने वाले अप्रत्याशित तकनीकी अथवा प्राकृतिक कारणों से कभी-कभी ऐसी विषम परिस्थितियाँ उत्पन्न हो जाती हैं, जिनसे बिजली की उपलब्धता प्रभावित होती है। ऐसे समय में विद्युत व्यवस्था के सुरक्षित एवं संतुलित संचालन हेतु सीमित अवधि के लिए रोस्टरिंग लागू करना अपरिहार्य हो जाता है।”
— यूपीसीएल प्रवक्ता
निगम ने आश्वस्त किया है कि ऐसी किसी भी स्थिति में बिजली आपूर्ति को जल्द से जल्द सामान्य करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाते हैं। यूपीसीएल ने इस दौरान उपभोक्ताओं को हुई असुविधा के लिए खेद प्रकट करते हुए सभी सम्मानित बिजली उपभोक्ताओं से सहयोग और धैर्य बनाए रखने की नम्र अपील की है।
