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हिमालयी औषधीय पौधों की खेती से बदलेगी किसानों की तकदीर: नेचर ऑर्गेनिक सोसाइटी ने आयोजित किया पौध वितरण व प्रशिक्षण शिविर

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हिमालयी औषधीय पौधों की खेती से बदलेगी किसानों की तकदीर: नेचर ऑर्गेनिक सोसाइटी ने आयोजित किया पौध वितरण व प्रशिक्षण शिविर

चमोली/देहरादून |

​उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में किसानों की आजीविका को सुदृढ़ करने और औषधीय पौधों की जैविक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। बीते 03 अगस्त 2026 को ‘नेचर ऑर्गेनिक सोसाइटी’ द्वारा एक दिवसीय औषधीय पौध प्रशिक्षण एवं पौध वितरण कार्यक्रम का सफ़ल और भव्य आयोजन किया गया।

​इस बहुउद्देशीय कार्यक्रम का मुख्य ध्येय किसानों, कृषि वैज्ञानिकों, प्रशासनिक अधिकारियों और विकास सहयोगी संस्थाओं को एक साझ मंच पर लाकर हिमालयी औषधीय प्रजातियों की वैज्ञानिक, जैविक एवं सतत खेती को धरातल पर उतारना था।

​ संकटग्रस्त औषधीय प्रजातियों के संरक्षण और संवर्धन पर जोर

​कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने इस बात पर विशेष प्रकाश डाला कि अत्यधिक दोहन और जलवायु परिवर्तन के कारण कई दुर्लभ हिमालयी औषधीय प्रजातियाँ विलुप्ति की कगार पर हैं। ऐसे में इनका संरक्षण करने के साथ-साथ किसानों की आय बढ़ाना ही समय की मुख्य माँग है।

​प्रशिक्षण के अंत में किसानों को कुटकी (Kutki), जटामांसी (Jatamansi) और अतीस (Atis) जैसी अति-महत्वपूर्ण एवं उच्च-मूल्य वाली औषधीय फसलों के पौधे मुफ़्त वितरित किए गए, ताकि किसान अपने खेतों में इनकी वैज्ञानिक खेती शुरू कर सकें।

​वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने दिए सफलता के मंत्र

​शिविर में मौजूद विभिन्न शोध संस्थानों के वैज्ञानिकों और विभागीय अधिकारियों ने किसानों को आधुनिक एवं जैविक खेती के गुर सिखाए:

तकनीकी एवं वैज्ञानिक मार्गदर्शन: किसानों को मिट्टी की तैयारी, पौध रोपण का सही समय, जैविक खाद का प्रयोग और फसल सुरक्षा की बारीकियों से अवगत कराया गया।​बाजार और विपणन (Marketing): किसानों को बिचौलियों के शोषण से बचाने और उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए ‘वैल्यू एडिशन’ (मूल्य संवर्धन) तथा डायरेक्ट मार्केट लिंकेज पर विस्तार से चर्चा हुई।

​ कार्यक्रम में प्रमुख हस्तियों की उपस्थिति

​इस महत्वपूर्ण आयोजन में कृषि, उद्यान, वन विभाग और शोध संस्थानों के कई विशेषज्ञों एवं पदाधिकारियों ने भाग लिया:

  • डॉ. सी. पी. कुनियाल (वरिष्ठ वैज्ञानिक, हर्बल रिसर्च एंड डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट – HRDI, गोपेश्वर)
  • डॉ. जयदेव चौहान (हाई एल्टीट्यूड प्लांट फिजियोलॉजी रिसर्च सेंटर – HAPPRC, गढ़वाल वि.वि., श्रीनगर)
  • विवेक मिश्रा (सचिव, जिला औषधीय पादप सहकारी संघ, चमोली)
  • वर्मा जी (जिला भेषज विकास इकाई, उद्यान विभाग- चमोली)
  • शिवम पंत (प्रोजेक्ट मैनेजर, उद्योगिनी एवं उनकी टीम)
  • जितेंद्र रावत (एडीओ, उद्यान विभाग)
  • आंगन लाल (आईसीएस मैनेजर, अपर हिमालयन ऑर्गेनिक सोसाइटी, चमोली)
  • नंदप्रयाग रेंज, बद्रीनाथ वन प्रभाग (गोपेश्वर) के सम्मानित अधिकारी एवं कर्मचारी
  • दीक्षा मैंदोली (ग्राम प्रधान, गुलाड़ी-सितेल)
  • ​नेचर ऑर्गेनिक सोसाइटी के समस्त पदाधिकारी, सदस्य एवं क्षेत्र के प्रगतिशील किसान साथी।

 संस्था ने जताया आभार

​नेचर ऑर्गेनिक सोसाइटी पिछले कई वर्षों से उत्तराखंड के दुर्गम क्षेत्रों में औषधीय पौधों की खेती, संरक्षण, प्रसंस्करण और विपणन के क्षेत्र में निरंतर निष्ठा से कार्य कर रही है।

​संस्था की ओर से कार्यक्रम में उपस्थित सभी किसान भाई-बहनों, वैज्ञानिकों, विभागीय अधिकारियों, सहयोगी संस्थाओं और कर्मचारियों का हृदय से आभार प्रकट किया गया। संस्था के प्रतिनिधियों ने प्रतिबद्धता दोहराई कि वे आगे भी पर्वतीय किसानों को आत्मनिर्भर बनाने, तकनीकी सहयोग देने और उनके उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए इसी तरह प्रयासरत रहेंगे।

​नेचर ऑर्गेनिक सोसाइटी की यह पहल न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी, बल्कि पलायन रोककर किसानों की आजीविका का एक स्थायी और लाभकारी माध्यम भी बनेगी।

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