ट्रंप की ईरान को ‘अंतिम चेतावनी’: ’48 घंटे में खोलें होर्मुज की राह, वरना राख हो जाएंगे पावर प्लांट्स’
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ट्रंप की ईरान को ‘अंतिम चेतावनी’: ’48 घंटे में खोलें होर्मुज की राह, वरना राख हो जाएंगे पावर प्लांट्स’
वॉशिंगटन/तेहरान: पश्चिम एशिया (Middle East) में जारी भीषण युद्ध अब उस मुहाने पर खड़ा है, जहाँ से वापसी का रास्ता नजर नहीं आ रहा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को अब तक की सबसे कड़ी चेतावनी देते हुए क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई का बिगुल फूंक दिया है। अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट के जरिए ट्रंप ने दो टूक शब्दों में कहा है कि यदि ईरान ने 48 घंटे के भीतर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बिना किसी शर्त के नहीं खोला, तो अमेरिका ईरान के खिलाफ निर्णायक सैन्य प्रहार करेगा।
Power Plants पर ‘टारगेटेड अटैक’ की धमकी
राष्ट्रपति ट्रंप की यह चेतावनी मात्र शब्दों तक सीमित नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि ईरान समय सीमा का पालन नहीं करता है, तो अमेरिकी वायुसेना और मिसाइल डिफेंस सिस्टम ईरान के पावर प्लांट्स (ऊर्जा संयंत्रों) को निशाना बनाएंगे। ट्रंप ने संदेश में जोर देकर कहा, “हम ईरान के पावर ग्रिड को ध्वस्त कर देंगे और इस कार्रवाई की शुरुआत ईरान के सबसे बड़े ऊर्जा संयंत्र से होगी।”
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के कच्चे तेल की आपूर्ति का सबसे महत्वपूर्ण लाइफलाइन है।

23वें दिन में संघर्ष: आसमान से बरस रही हैं मिसाइलें
इजरायल और ईरान के बीच छिड़ा यह संघर्ष आज अपने 23वें दिन में प्रवेश कर चुका है। स्थिति अब ‘प्रॉक्सि वॉर’ से निकलकर सीधे आमने-सामने की जंग में तब्दील हो गई है।
- इजरायल के हमले: इजरायली वायुसेना ने ईरान समर्थित ठिकानों और सीरिया-लेबनान सीमा पर भीषण बमबारी जारी रखी है।
- ईरान का पलटवार: ईरान ने भी पीछे हटने के संकेत नहीं दिए हैं। उसने इजरायल के मुख्य शहरों और खाड़ी देशों (Gulf Countries) में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलों और ‘सुसाइड ड्रोन’ से हमला किया है।
- दहशत का माहौल: पूरे क्षेत्र में मिसाइलों की गूँज है और खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकाने हाई अलर्ट पर हैं।
क्यों अहम है होर्मुज जलडमरूमध्य?
ईरान ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को ब्लॉक करने की कोशिश की है। आपको बता दें कि:
- दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20% से 30% हिस्सा इसी संकरे समुद्री मार्ग से गुजरता है।
- इसे बंद करने का अर्थ है—वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि और दुनिया भर में आर्थिक मंदी का खतरा।
- अमेरिका इसे ‘नेविगेशन की स्वतंत्रता’ का उल्लंघन मान रहा है।
क्षेत्रीय तनाव और अंतरराष्ट्रीय चिंता
पश्चिम एशिया का यह तनाव अब केवल दो देशों के बीच नहीं रहा। रूस और चीन की नजरें भी इस घटनाक्रम पर टिकी हैं। जहाँ एक ओर अमेरिका अपने सहयोगी इजरायल के साथ मजबूती से खड़ा है, वहीं ईरान की जवाबी कार्रवाई ने खाड़ी देशों की सुरक्षा पर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
विशेषज्ञों की राय: > “अगर ट्रंप की 48 घंटे की डेडलाइन खत्म होती है और ईरान पीछे नहीं हटता, तो हम दशक के सबसे बड़े हवाई हमले देख सकते हैं। यह न केवल ईरान की अर्थव्यवस्था को दशकों पीछे धकेल देगा, बल्कि पूरी दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध की कगार पर खड़ा कर सकता है।”
