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ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा का ‘बिजली प्रहार’: गाजीपुर में लापरवाही पर गिजी गाज, अवर अभियंता निलंबित

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ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा का ‘बिजली प्रहार’: गाजीपुर में लापरवाही पर गिजी गाज, अवर अभियंता निलंबित

विशेष रिपोर्ट: अकील अहमद प्रभारी southasia 24×7

गाजीपुर/देहरादून: उत्तर प्रदेश के ऊर्जा एवं नगर विकास मंत्री श्री ए.के. शर्मा अपने सख्त तेवरों और कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं। हाल ही में गाजीपुर जनपद के विद्युत वितरण खंड जंगीपुर के अंतर्गत उनकी इस कार्यशैली का एक जीवंत उदाहरण देखने को मिला। बलिया जाते समय रास्ते में विद्युत लाइनों की बदहाली देख मंत्री जी का पारा चढ़ गया, जिसके परिणामस्वरूप महरौर उपकेंद्र के अवर अभियंता (JE) को निलंबित कर दिया गया और अधिशासी अभियंता (EE) को आरोप पत्र (Charge Sheet) थमा दिया गया।

1. ऑन-द-स्पॉट निरीक्षण: जब मंत्री ने खुद पकड़ी खामी

​यह घटना उस समय की है जब मंत्री श्री ए.के. शर्मा सड़क मार्ग से गाजीपुर से बलिया की ओर जा रहे थे। जंगीपुर क्षेत्र के महरौर-रसड़ा मार्ग पर उनकी नजर अचानक ऊपर से गुजर रही 11 केवी (11 KV) की हाई-टेंशन लाइन पर पड़ी। मानक के अनुसार, इन लाइनों की ऊंचाई जमीन से एक निश्चित दूरी पर होनी चाहिए, लेकिन यहाँ यह लाइन खतरनाक रूप से नीचे लटकी हुई थी।

​विद्युत सुरक्षा के दृष्टिकोण से यह एक गंभीर चूक थी। नीचे लटकती हुई हाई-टेंशन लाइन किसी बड़े हादसे को दावत दे रही थी। मंत्री ने तुरंत अपना काफिला रुकवाया और मौके पर ही संबंधित अधिकारियों को तलब किया।

2. कार्रवाई की जद में अधिकारी: निलंबन और आरोप पत्र

​मंत्री जी के कड़े रुख को देखते हुए विभाग में हड़कंप मच गया। प्राथमिक जांच में पाया गया कि स्थानीय स्तर पर लाइनों के रखरखाव और नियमित निरीक्षण में घोर लापरवाही बरती गई है।​अवर अभियंता (JE) निलंबित: महरौर उपकेंद्र के अवर अभियंता धर्मेंद्र पाल को अपनी ड्यूटी के प्रति गंभीर न होने और सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने का दोषी पाते हुए तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।​अधिशासी अभियंता (EE) को आरोप पत्र: विद्युत वितरण खंड जंगीपुर के अधिशासी अभियंता प्रवीण कुमार तिवारी के विरुद्ध भी कड़ी कार्रवाई की गई है। उन्हें विभागीय कार्यों की निगरानी में विफल रहने के लिए आरोप पत्र जारी किया गया है।

3. ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति: मंत्री की दो टूक चेतावनी

​कार्रवाई के बाद श्री ए.के. शर्मा ने स्पष्ट संदेश दिया कि उत्तर प्रदेश सरकार की प्राथमिकता जनता की सुरक्षा और निर्बाध बिजली आपूर्ति है। उन्होंने कहा:विद्युत व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही, विशेषकर सुरक्षा मानकों से जुड़ी अनदेखी, किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। जो अधिकारी अपनी कुर्सी पर बैठकर फाइलों में काम दिखा रहे हैं और धरातल पर लाइनें नीचे लटकी हैं, उन्हें परिणाम भुगतने होंगे।”

 

4. जनता की सुरक्षा सर्वोपरि: क्यों महत्वपूर्ण है यह मानक?

​11 केवी की लाइन अगर मानक से नीचे हो, तो बारिश के मौसम में या ऊंचे वाहनों के गुजरते समय ‘आर्किंग’ (Arcing) का खतरा बढ़ जाता है। गाजीपुर जैसे कृषि प्रधान जिले में खेतों के पास से गुजरने वाली ये लाइनें अक्सर किसानों और मवेशियों के लिए जानलेवा साबित होती हैं। मंत्री की इस ‘सख्ती’ का उद्देश्य केवल सजा देना नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश के विद्युत तंत्र को यह समझाना है कि फील्ड में जाकर निरीक्षण करना अनिवार्य है।

5. विभाग को सख्त निर्देश: अब रडार पर पूरा प्रदेश

​इस घटना के बाद ऊर्जा मंत्री ने पूरे उत्तर प्रदेश के विद्युत अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं:​सभी 11 केवी और एलटी (LT) लाइनों का तत्काल सर्वे किया जाए।​जहाँ कहीं भी तार ढीले हैं या पोल झुक गए हैं, उन्हें युद्धस्तर पर ठीक किया जाए।​शिकायत निवारण में देरी करने वाले अधिकारियों पर भी पैनी नजर रखी जाएगी।

 सुधर रही है व्यवस्था

​गाजीपुर की यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश में प्रशासनिक जवाबदेही का एक नया अध्याय है। जब स्वयं मंत्री धरातल पर उतरकर निरीक्षण करते हैं, तो व्यवस्था में सुधार की गुंजाइश बढ़ जाती है। जंगीपुर के इस घटनाक्रम ने स्पष्ट कर दिया है कि ‘बिजली विभाग’ अब पुराने ढर्रे पर नहीं चलेगा। लापरवाही करने वालों के लिए अब विभाग में कोई जगह नहीं है।

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