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Uttrkhand: CM  DHAMI से मिले उप सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई, सामरिक सुरक्षा और आपदा प्रबंधन पर हुई ‘रणनीतिक’ चर्चा

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Uttrkhand: CM  DHAMI से मिले उप सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई, सामरिक सुरक्षा और आपदा प्रबंधन पर हुई ‘रणनीतिक’ चर्चा

देहरादून। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास में उप सेना प्रमुख (रणनीति) लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने शिष्टाचार भेंट की। इस उच्च स्तरीय मुलाकात के दौरान राज्य की सुरक्षा, सामरिक महत्व के विषयों और आपदा प्रबंधन में भारतीय सेना की भूमिका को लेकर विस्तृत चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर सेना और राज्य सरकार के बीच बेहतर समन्वय के महत्व पर जोर दिया।

सीमावर्ती राज्य की सुरक्षा और सेना का सहयोग

​मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड एक अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटा राज्य है, जिसकी सीमाएं चीन और नेपाल जैसे देशों से मिलती हैं। ऐसे में विकास, सुरक्षा और आपदा प्रबंधन के दृष्टिकोण से भारतीय सेना का सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य सरकार और सेना के बीच ‘डबल इंजन’ समन्वय से न केवल सीमाओं की सुरक्षा पुख्ता होगी, बल्कि दुर्गम क्षेत्रों में विकास कार्यों को भी नई गति मिलेगी।

आपदा में ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ की भूमिका में सेना

​उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियाँ बेहद चुनौतीपूर्ण हैं। उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़ और चमोली जैसे जिलों में आपदा की स्थिति में भारतीय सेना हमेशा ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ के रूप में सामने आती है। मुख्यमंत्री ने चर्चा के दौरान सेना के योगदान को याद करते हुए निम्नलिखित बिंदुओं पर प्रकाश डाला:​सिल्क्यारा टनल ऑपरेशन: उत्तरकाशी की टनल में फंसे मजदूरों को बचाने के दौरान सेना के इंजीनियरिंग विंग और विशेषज्ञ जवानों की भूमिका सराहनीय रही।​तपोवन आपदा: चमोली के तपोवन में आई भीषण आपदा के दौरान भी सेना ने रेस्क्यू ऑपरेशन का नेतृत्व किया।​सीमांत गांव: माणा और नीति जैसे सुदूरवर्ती क्षेत्रों में सेना न केवल सीमाओं की रक्षा कर रही है, बल्कि आपदा के समय स्थानीय नागरिकों के लिए जीवन रक्षक की भूमिका भी निभाती है।

सैनिक बाहुल्य प्रदेश और युवाओं का जुड़ाव

​मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड एक ‘सैनिक बाहुल्य प्रदेश’ है, जहाँ के हर घर से कोई न कोई देश की सेवा में समर्पित है। यहाँ भारतीय सैन्य अकादमी (IMA) जैसे प्रतिष्ठित संस्थान हैं। उन्होंने बताया कि सेना केवल सीमाओं पर ही मुस्तैद नहीं रहती, बल्कि उत्तराखंड के युवाओं के साथ समय-समय पर संवाद कर उन्हें राष्ट्र निर्माण और सेना में करियर बनाने के लिए प्रेरित भी करती रहती है।

इंफ्रास्ट्रक्चर और कनेक्टिविटी पर चर्चा

​बैठक में राज्य में चल रहे बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को लेकर भी चर्चा हुई, जो सामरिक दृष्टि से सेना के लिए भी लाभकारी हैं:​ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन: यह परियोजना सीमा तक पहुंच को आसान बनाएगी।​ऑल वेदर रोड: चारधाम कनेक्टिविटी से सेना की रसद और मूवमेंट में तेजी आएगी।​देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेसवे: राजधानी से कनेक्टिविटी बढ़ने से सामरिक समन्वय बेहतर होगा।“उत्तराखंड की सुरक्षा और समृद्धि के लिए सेना और सरकार का साथ चलना अनिवार्य है। हम सीमाओं पर इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत कर रहे हैं ताकि हमारे जवानों और स्थानीय जनता को हर संभव सुविधा मिले।”मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी

​उप सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई और मुख्यमंत्री के बीच यह मुलाकात राज्य की सुरक्षा और विकास के बीच एक सेतु का काम करेगी। सेना के साथ मिलकर राज्य सरकार ‘वाइब्रेंट विलेज’ योजना के तहत सीमांत गांवों को भी नई पहचान दिलाने पर काम कर रही है, ताकि पलायन रुके और सुरक्षा और अधिक पुख्ता हो।

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