UP ATS का बड़ा खुलासा: पाकिस्तान से संचालित ‘टेरर मॉड्यूल’ का पर्दाफाश; साकिब और डेविड समेत 4 आतंकी गिरफ्तार
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UP ATS का बड़ा खुलासा: पाकिस्तान से संचालित ‘टेरर मॉड्यूल’ का पर्दाफाश; साकिब और डेविड समेत 4 आतंकी गिरफ्तार
लखनऊ/मेरठ: उत्तर प्रदेश एटीएस (ATS) ने देश की सुरक्षा में सेंध लगाने वाली एक बड़ी राष्ट्रविरोधी साजिश को नाकाम कर दिया है। यूपी एटीएस ने चार ऐसे आतंकियों को गिरफ्तार किया है जो पाकिस्तानी हैंडलर्स के इशारे पर भारत में दहशत फैलाने का जाल बुन रहे थे। एनआईए-एटीएस की स्पेशल कोर्ट ने पकड़े गए चारों आरोपियों को 5 अप्रैल से 5 दिनों की पुलिस कस्टडी रिमांड पर भेज दिया है।
साजिश का ‘डिजिटल’ जाल: ओसामा और गजवा-ए-हिंद से कनेक्शन
गिरफ्तार आतंकियों की पहचान साकिब उर्फ डेविड, अरबाब, विकास गहलावत और लोकेश उर्फ पपला के रूप में हुई है। जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि यह गिरोह टेलीग्राम और इंस्टाग्राम के माध्यम से ओसामा बिन लादेन, फतुल्लाह गोरी, कश्मीर मुजाहिदीन और ‘गजवा-ए-हिंद’ जैसे कट्टरपंथी ग्रुपों से जुड़ा था। इनके मोबाइल में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के कई संदिग्ध नंबर मिले हैं, जिनसे इन्हें सीधे निर्देश मिलते थे।
मॉडस ऑपेरंडी: छोटी आगजनी, बड़ा वीडियो और QR कोड से फंडिंग
इन आतंकियों का काम करने का तरीका (Modus Operandi) बेहद शातिर था। ये किसी बड़ी आतंकी घटना से पहले ‘ट्रायल’ कर रहे थे:टारगेट: रेलवे सिग्नल बॉक्स, प्रतिष्ठित संस्थान और वाहन।एक्शन: इन जगहों पर आगजनी कर दहशत फैलाना।प्रूफ: आगजनी की घटनाओं का वीडियो बनाकर पाकिस्तानी हैंडलर्स को भेजना।पेमेंट: वीडियो भेजने के बाद QR कोड के माध्यम से सीमा पार से पैसा मंगाया जाता था।
एडीजी (कानून-व्यवस्था) अमिताभ यश के अनुसार, इनका मुख्य उद्देश्य भारत में डर का माहौल पैदा करना और युवाओं को कट्टरपंथ की ओर धकेलना था।
यूपी के ये जिले थे ‘हिट लिस्ट’ पर
गिरोह ने मुख्य रूप से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ, नोएडा और गाजियाबाद को अपना केंद्र बनाया था। हाल ही में मुरादाबाद से पकड़े गए ISIS से जुड़े मेडिकल छात्र और लाल किले की साजिश के तार भी कहीं न कहीं इसी मानसिकता से जुड़े पाए गए हैं। गिरोह का फोकस उन संवेदनशील जगहों पर था जहाँ रेलवे ट्रैफिक को बाधित किया जा सके या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाकर सांप्रदायिक तनाव पैदा किया जा सके।
पकड़े गए आरोपियों में साकिब उर्फ डेविड गिरोह का मास्टरमाइंड है। जांच में सामने आया है कि ये युवा तकनीकी रूप से सक्षम हैं और सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने में माहिर हैं। इनका पारिवारिक बैकग्राउंड मध्यमवर्गीय है, लेकिन कट्टरपंथी विचारधारा के प्रभाव में आकर ये देश के खिलाफ खड़े हो गए। विकास और लोकेश जैसे नाम यह दर्शाते हैं कि आतंक का यह नेटवर्क अब मजहब की दीवारों को लांघकर ‘भाड़े के आतंकियों’ (Mercenaries) की तरह भी काम कर रहा है।
रिमांड के दौरान ATS के ‘चुभते’ सवाल
5 अप्रैल से शुरू हो रही 5 दिनों की रिमांड में एटीएस ने सवालों की लंबी लिस्ट तैयार की है:पाकिस्तान में बैठे उन हैंडलर्स के नाम क्या हैं जो टेलीग्राम पर निर्देश दे रहे थे?यूपी में इनके और कितने ‘स्लीपर सेल’ एक्टिव हैं?फंडिंग के लिए इस्तेमाल किए गए QR कोड किस बैंक खाते या वॉलेट से लिंक थे?क्या आने वाले त्योहारों या राजनीतिक कार्यक्रमों पर कोई बड़ा हमला करने की योजना थी?
क्या योगी सरकार का ‘जीरो टॉलरेंस’ मॉडल और यूपी का बढ़ता विकास आतंकियों की आंखों की किरकिरी बन गया है? एक तरफ अयोध्या और काशी का कायाकल्प हो रहा है, दूसरी तरफ सीमा पार बैठे आका यूपी को दहलाने की फिराक में हैं।
