नकली सिगरेट के ‘काले साम्राज्य’ का भंडाफोड़: पारा पुलिस और क्राइम ब्रांच ने दबोचे अंतर्राज्यीय तस्कर, 10 लाख का माल बरामद
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नकली सिगरेट के ‘काले साम्राज्य’ का भंडाफोड़: पारा पुलिस और क्राइम ब्रांच ने दबोचे अंतर्राज्यीय तस्कर, 10 लाख का माल बरामद
लखनऊ | राष्ट्रीय डेस्क उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के पारा थाना क्षेत्र में पुलिस और क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम ने संगठित अपराध के खिलाफ एक बड़ी सफलता हासिल की है। टीम ने अंतर्राज्यीय स्तर पर प्रतिबंधित और नकली सिगरेट की तस्करी करने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश करते हुए दो शातिर तस्करों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से अंतरराष्ट्रीय ब्रांडों के नाम पर बेची जा रही करीब 10 लाख रुपये मूल्य की नकली सिगरेट और तस्करी में इस्तेमाल की जाने वाली एक लग्जरी चारपहिया गाड़ी बरामद हुई है।
घेराबंदी और गिरफ्तारी: फिल्मी अंदाज में पकड़े गए तस्कर
पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि एक सफेद रंग की चारपहिया गाड़ी में भारी मात्रा में प्रतिबंधित माल पारा क्षेत्र से गुजरने वाला है। सक्रिय हुई पारा पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीम ने इलाके में सघन चेकिंग अभियान चलाया। संदिग्ध वाहन को रुकने का इशारा किया गया, तो चालकों ने भागने की कोशिश की, लेकिन टीम ने घेराबंदी कर उन्हें दबोच लिया। तलाशी के दौरान वाहन के भीतर से 3940 डिब्बियां बरामद हुईं, जिनमें नामी गिरामी ब्रांडों के रैपर में नकली और खतरनाक तंबाकू उत्पाद भरे हुए थे।
नेटवर्क का विस्तार: नेपाल से लेकर दक्षिण भारत तक तार
पूछताछ में जो खुलासे हुए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। इनका नेटवर्क केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं था, बल्कि यह एक अंतर्राज्यीय सिंडिकेट है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह गिरोह दिल्ली, हरियाणा और बिहार के रास्ते नकली माल की सप्लाई करता था। जांच में यह भी सामने आया है कि इस सिंडिकेट के तार पड़ोसी देश नेपाल से भी जुड़े हो सकते हैं, जहाँ से कच्चे माल और पैकिंग सामग्री की तस्करी की आशंका है। यह गिरोह मुख्य रूप से उन थोक बाजारों को निशाना बनाता था जहाँ बिना पक्के बिल के व्यापार होता है।
धोखाधड़ी का तरीका: ब्रांडेड पैकेट में ‘धीमा जहर’
गिरफ्तार तस्करों ने कबूल किया कि वे नामी कंपनियों के हूबहू दिखने वाले नकली पैकेट छपवाते थे। इन पैकेटों में घटिया स्तर का तंबाकू और प्रतिबंधित निकोटीन की मात्रा भरी जाती थी। आम ग्राहक के लिए असली और नकली सिगरेट के बीच फर्क करना नामुमकिन था। वे इस माल को उन पान दुकानों और छोटे वेंडर्स को सप्लाई करते थे, जो अधिक कमीशन के लालच में बिना जांचे माल बेचते थे। यह धंधा पिछले 2-3 वर्षों से सक्रिय रूप से चल रहा था।
सफेदपोशों और पुलिस की मिलीभगत की जांच
इतने बड़े स्तर पर तस्करी बिना किसी स्थानीय संरक्षण के संभव नहीं है। पुलिस अब इस पहलू पर गंभीरता से जांच कर रही है कि क्या इस गिरोह को किसी ‘सफेदपोश’ राजनेता या रसूखदार व्यक्ति का संरक्षण प्राप्त था। साथ ही, विभाग के भीतर भी इस बात की आंतरिक जांच शुरू कर दी गई है कि क्या स्थानीय पुलिस की किसी स्तर पर मिलीभगत थी, जिसके कारण इतने समय तक यह अवैध धंधा फलता-फूला।
अपराधिक इतिहास और कानूनी कार्रवाई
पकड़े गए आरोपियों के बैकग्राउंड की जांच करने पर पता चला कि वे पहले भी छोटे-मोटे आर्थिक अपराधों और धोखाधड़ी के मामलों में संलिप्त रहे हैं। पुलिस ने इनके खिलाफ निम्नलिखित गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है:धारा 420 (धोखाधड़ी): नकली ब्रांड नेम का इस्तेमाल करने के लिए।धारा 467, 468 (जालसाजी): फर्जी दस्तावेज और रैपर तैयार करने के लिए।कॉपीराइट अधिनियम: बड़ी कंपनियों के बौद्धिक संपदा अधिकारों के उल्लंघन के तहत।कोटपा (COTPA) अधिनियम: स्वास्थ्य मानकों के उल्लंघन और प्रतिबंधित उत्पादों की बिक्री के लिए।
पुलिस का बयान
पारा थाना प्रभारी के अनुसार, “यह केवल एक गिरफ्तारी नहीं है, बल्कि एक बड़े आर्थिक और स्वास्थ्य अपराध की शुरुआत है। हम इस गिरोह के मास्टरमाइंड तक पहुँचने के लिए सर्विलांस और फॉरेंसिक साक्ष्यों का सहारा ले रहे हैं। जल्द ही इनके अन्य साथियों को भी सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।”
