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पौड़ी: पोखड़ा में गुलदार का आतंक, मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक ने दिए मरने के आदेश; ड्रोन और शिकारियों की तैनाती

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पौड़ी: पोखड़ा में गुलदार का आतंक, मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक ने दिए मरने के आदेश; ड्रोन और शिकारियों की तैनाती

​सोहन सिंह पौड़ी गढ़वाल: जनपद के विकासखंड पोखड़ा में बीते कुछ दिनों से मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं ने ग्रामीणों के बीच दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। स्थिति की गंभीरता और जनसुरक्षा, विशेषकर स्कूली बच्चों की जान को खतरे में देखते हुए वन विभाग ने अब तक का सबसे कड़ा रुख अपनाया है। मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक (Chief Wildlife Warden) ने क्षेत्र में सक्रिय आदमखोर गुलदार को पकड़ने और आवश्यकता पड़ने पर उसे ‘नष्ट’ करने (मार गिराने) की अनुमति जारी कर दी है।

वन विभाग की सख्त कार्रवाई और विधिक अनुमति

​डीएफओ (DFO) गढ़वाल, महातिम यादव ने जानकारी दी कि क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए वन विभाग ने मुख्यालय से विशेष अनुमति का अनुरोध किया था। वन संरक्षक, गढ़वाल वृत्त की संस्तुति पर मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक ने वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 (संशोधित 2022) की धारा 11(1)(क) के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए यह आदेश जारी किया है।

​इस आदेश के तहत विभाग को गुलदार को पिंजरे में कैद करने या ट्रैंक्युलाईज (बेहोश) कर पकड़ने की अनुमति मिली है। हालांकि, आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि सभी प्रयासों के बाद भी गुलदार पकड़ में नहीं आता है और मानव जीवन के लिए खतरा बना रहता है, तो अंतिम विकल्प के रूप में उसे नष्ट किया जा सकता है। यह अनुमति केवल चिन्हित गुलदार के लिए है और आगामी एक माह तक प्रभावी रहेगी।

ड्रोन और आधुनिक तकनीक से निगरानी

​गुलदार की सटीक लोकेशन का पता लगाने और उसकी गतिविधियों पर नज़र रखने के लिए वन विभाग ने हाई-टेक संसाधनों का सहारा लिया है:​पिंजरे और कैमरे: प्रभावित क्षेत्र में अब तक तीन पिंजरे लगाए जा चुके हैं और 20 ट्रैप कैमरों के जरिए 24 घंटे निगरानी की जा रही है।​शिकारियों की तैनाती: क्षेत्र में दो लाइसेंसधारी शिकारियों को तैनात किया गया है, जो विभाग की टीम के साथ गश्त कर रहे हैं।​ड्रोन तकनीक: घने जंगलों और दुर्गम क्षेत्रों में गुलदार को खोजने के लिए ड्रोन का उपयोग किया जा रहा है, ताकि मानवीय जोखिम को कम किया जा सके।

स्कूली बच्चों की सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम

​प्रशासन ने बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। वर्तमान में पोखड़ा क्षेत्र के विद्यालयों में 6 अप्रैल तक अवकाश घोषित किया गया है। विभाग ने भविष्य के लिए एक ‘सुरक्षा कवच’ तैयार किया है:​एस्कॉर्ट सुविधा: स्कूल खुलने के बाद बच्चों को घर से विद्यालय लाने और वापस छोड़ने की जिम्मेदारी वन विभाग और राजस्व विभाग के संयुक्त दल की होगी।​चारा-पत्ती की व्यवस्था: ग्रामीणों को जंगल न जाना पड़े, इसके लिए वन विभाग स्वयं पालतू मवेशियों के लिए चारा-पत्ती की व्यवस्था कर रहा है।

जन-जागरुकता और अपील

​वन विभाग द्वारा प्रभावित गांवों में व्यापक जन-जागरुकता अभियान चलाया जा रहा है। डीएफओ महातिम यादव ने ग्रामीणों से अपील की है कि वे अकेले जंगल की ओर न जाएं और शाम ढलने के बाद घरों से बाहर निकलने में सावधानी बरतें। उन्होंने विश्वास दिलाया कि जब तक गुलदार पकड़ा या मार गिराया नहीं जाता, तब तक विभाग की टीमें क्षेत्र में डटी रहेंगी और सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे।

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