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Earthquake Arunachal Pradesh todayअरुणाचल में सुबह-सुबह डोली धरती: पश्चिम कामेंग में भूकंप के झटके, नींद में डूबे लोगों में मची अफरा-तफरी

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Earthquake Arunachal Pradesh todayअरुणाचल में सुबह-सुबह डोली धरती: पश्चिम कामेंग में भूकंप के झटके, नींद में डूबे लोगों में मची अफरा-तफरी

ईटानगर/नई दिल्ली: उत्तर-पूर्वी भारत के खूबसूरत राज्य अरुणाचल प्रदेश में आज तड़के उस वक्त हड़कंप मच गया, जब धरती के भीतर हुई हलचल ने लोगों को झकझोर कर रख दिया। मंगलवार की सुबह, जब ज्यादातर लोग गहरी नींद में थे, तभी 2.6 तीव्रता के भूकंप ने दस्तक दी। हालांकि रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता कम थी, लेकिन सुबह के सन्नाटे और पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण इसके झटकों ने लोगों को दहशत से भर दिया।

सुबह 03:52 बजे: जब अचानक हिलने लगीं दीवारें

​राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र (NCS) के अनुसार, भूकंप आज सुबह 03:52:30 IST पर आया। इसका केंद्र अरुणाचल प्रदेश के पश्चिम कामेंग (West Kameng) जिले में जमीन से महज 10 किलोमीटर की गहराई पर था।

​जिस वक्त झटके महसूस किए गए, लोग अपने घरों में सो रहे थे। अचानक खिड़कियों के खड़खड़ाने और बेड के हिलने से लोगों की आंखें खुलीं। देखते ही देखते सन्नाटा चीख-पुकार में बदल गया। डर के मारे लोग अपने बच्चों और बुजुर्गों को लेकर घरों से बाहर खुले आसमान की ओर भागे।

दहशत का मंजर: “एक-दूसरे को जगाकर बचाई जान”

​स्थानीय निवासियों के अनुसार, झटके महसूस होते ही लोग चिल्लाने लगे और पड़ोसियों को जगाने के लिए उनके दरवाजे पीटने लगे। पश्चिम कामेंग के एक निवासी ने बताया, “सब कुछ इतनी जल्दी हुआ कि समझ नहीं आया क्या करें। बस दिमाग में एक ही बात थी कि सबको घर से बाहर निकालना है।” कई जगहों पर लोग कड़ाके की ठंड के बावजूद घंटों घर के बाहर खड़े रहे, इस डर से कि कहीं कोई ‘आफ्टरशॉक’ न आ जाए।

सरकार और कंट्रोल रूम की रिपोर्ट

​अरुणाचल प्रदेश सरकार और आपदा प्रबंधन विभाग के कंट्रोल रूम से मिली शुरुआती जानकारी के अनुसार, अभी तक किसी जान-माल के नुकसान की खबर नहीं है। मुख्यमंत्री कार्यालय स्थिति पर नजर बनाए हुए है। प्रशासन ने स्थानीय लोगों से अपील की है कि वे घबराएं नहीं, लेकिन सतर्क रहें। भूकंप का केंद्र 27.141 N अक्षांश और 92.715 E देशांतर पर स्थित था, जो सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण क्षेत्र है।

भूटान से ताजिकिस्तान तक कांप रही है धरती

​पिछले 72 से 96 घंटों के भीतर भारतीय उपमहाद्वीप और आसपास के देशों में भूकंप का एक सिलसिला (Seismic Swarm) देखने को मिल रहा है।भारत और भूटान: हिमालयी बेल्ट में लगातार छोटी तीव्रता के झटके दर्ज किए जा रहे हैं।​अफगानिस्तान और ताजिकिस्तान: हिंदूकुश क्षेत्र में भी मध्यम तीव्रता के भूकंप ने चिंता बढ़ा दी है। भू-वैज्ञानिकों का मानना है कि टेक्टोनिक प्लेटों के बीच बढ़ रहा दबाव इस हलचल की मुख्य वजह है।

भूकंप की तकनीक: क्या है सबसे लेटेस्ट टूल?

​आज के दौर में भूकंप की भविष्यवाणी तो संभव नहीं है, लेकिन ‘अर्ली वार्निंग सिस्टम’ (Early Warning System) अब काफी उन्नत हो चुके हैं।​AI-आधारित प्रेडिक्शन: अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग करके ऐतिहासिक डेटा के आधार पर संभावित संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान की जा रही है।​गूगल अर्थक्वेक अलर्ट: एंड्रॉयड फोन अब ‘मिमी-सिस्मोमीटर’ की तरह काम करते हैं। जब हजारों फोन एक साथ हिलते हैं, तो गूगल का सर्वर इसे भांप लेता है और झटके पहुंचने से कुछ सेकंड पहले यूजर्स को अलर्ट भेज देता है।​BhooKamp App: भारत सरकार का अपना ऐप ‘भूकंप’ रियल-टाइम डेटा प्रदान करता है, जिससे लोगों को सटीक जानकारी तुरंत मिल जाती है।

​ अरुणाचल का यह भूकंप भले ही छोटा था, लेकिन यह एक चेतावनी है कि हम एक सक्रिय सिस्मिक जोन में रह रहे हैं। सुरक्षित निर्माण और जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव है।

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