देहरादून कांग्रेस विधायक वीरेंद्र जाति ने विधानसभा के गेट पर गिराया एक ट्राली गन्ना सुरक्षा में भारी चूक?
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देहरादून कांग्रेस विधायक वीरेंद्र जाति ने विधानसभा के गेट पर गिराया एक ट्राली गन्ना सुरक्षा में भारी चूक?
प्रस्तावना: लोकतंत्र के मंदिर पर किसानों का ‘मीठा’ लेकिन कड़वा प्रहार
आज का दिन भारतीय राजनीति और विशेषकर राज्य की विधानसभा के इतिहास में एक अप्रत्याशित घटना के रूप में दर्ज हो गया। जब पूरा प्रशासनिक अमला विधानसभा के विशेष सत्र की तैयारियों में जुटा था, तभी कांग्रेस विधायक वीरेंद्र जाती ने एक ऐसा कदम उठाया जिसने सत्ता के गलियारों में हड़कंप मचा दिया। एक ट्रैक्टर-ट्रॉली भरकर गन्ना लेकर सीधे विधानसभा के मुख्य द्वार पर पहुंचना और उसे वहां पलट देना, केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं है; यह सुरक्षा एजेंसियों की विफलता और किसान राजनीति के उफान का एक ज्वलंत उदाहरण है।
1. सुरक्षा का किला ढहा: इंटेलिजेंस और पुलिस पर उठते सवाल
विधानसभा जैसा अति-संवेदनशील क्षेत्र, जहाँ परिंदा भी पर नहीं मार सकता, वहाँ एक भारी-भरकम ट्रैक्टर-ट्रॉली का बिना किसी रोक-टोक के मुख्य गेट तक पहुँच जाना किसी ‘जासूसी फिल्म’ के दृश्य से कम नहीं लगता।खुफिया तंत्र की विफलता: सबसे बड़ा सवाल यह है कि एलआईयू (Local Intelligence Unit) और अन्य खुफिया एजेंसियां क्या कर रही थीं? एक विधायक अपने आवास या क्षेत्र से ट्रैक्टर चलाकर निकलता है, सड़कों पर बढ़ता है, और सुरक्षाकर्मियों को इसकी भनक तक नहीं लगती।नाकों पर चूक: शहर के भीतर और विधानसभा के आसपास दर्जनों चेकपोस्ट और भारी पुलिस बल तैनात होने के बावजूद, किसी ने यह पूछने की जहमत नहीं उठाई कि आखिर यह गन्ने से लदी ट्रॉली प्रतिबंधित क्षेत्र में क्यों जा रही है?अफरा-तफरी का माहौल: जब विधायक ने गेट के ठीक सामने गन्ना गिराया, तब वहां मौजूद पुलिस अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए। आनन-फानन में बैरिकेडिंग की गई, लेकिन तब तक संदेश जा चुका था—सुरक्षा में सेंध लग चुकी थी।
2. गन्ने की सियासत: कांग्रेस का मास्टरस्ट्रोक?
गन्ना भारत की राजनीति में हमेशा से एक ‘शक्तिशाली फसल’ रहा है। चाहे वह पश्चिमी उत्तर प्रदेश हो या उत्तराखंड और हरियाणा के मैदानी इलाके, गन्ने का दाम और भुगतान हमेशा चुनाव तय करते आए हैं।किसानों के साथ एकजुटता: कांग्रेस विधायक वीरेंद्र जाती का यह कदम सीधे तौर पर गन्ना किसानों की भावनाओं से जुड़ा है। गन्ने का मूल्य बढ़ाने और बकाया भुगतान की मांग को लेकर कांग्रेस ने इस प्रतीकात्मक विरोध के जरिए खुद को किसानों का सबसे बड़ा हितैषी साबित करने की कोशिश की है।मुद्दों का ध्रुवीकरण: विधानसभा सत्र के पहले ही दिन इस तरह का प्रदर्शन करके विपक्ष ने सरकार को बैकफुट पर धकेल दिया है। अब सत्ता पक्ष के लिए गन्ना किसानों की अनदेखी करना मुश्किल होगा।
3. महिला आरक्षण और कांग्रेस का पैदल मार्च
गन्ने के विवाद के बीच, कांग्रेस ने एक और मोर्चा खोल रखा था। विश्वनाथ पुल से विधानसभा तक कांग्रेस विधायकों का पैदल मार्च एकजुटता का प्रदर्शन था।33% आरक्षण की मांग: कांग्रेस विधायकों ने मांग की कि वर्तमान विधानसभा की 70 सीटों में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का प्रस्ताव इसी सत्र में आना चाहिए।रणनीति: एक तरफ ‘किसान कार्ड’ और दूसरी तरफ ‘महिला कार्ड’ खेलकर कांग्रेस ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह सदन के भीतर और बाहर सरकार को किसी भी मुद्दे पर घेरने के लिए तैयार है।

4. सत्ता पक्ष की प्रतिक्रिया और संभावित कार्रवाई
इस घटना ने सरकार को असहज कर दिया है। जहाँ एक तरफ किसान नीति पर जवाब देना है, वहीं दूसरी तरफ सुरक्षा में हुई इस भारी लापरवाही के लिए जवाबदेही तय करनी है।
