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राम वन गमन और भरत मिलाप की कथा ने श्रद्धालुओं को किया भावविभोर: बहादुरगंज में उमड़ा जनसैलाब

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राम वन गमन और भरत मिलाप की कथा ने श्रद्धालुओं को किया भावविभोर: बहादुरगंज में उमड़ा जनसैलाब

बहादुरगंज, गाजीपुर। स्थानीय बहादुरगंज स्थित सुप्रसिद्ध मां चंडी धाम परिसर में आयोजित धार्मिक अनुष्ठान के दौरान प्रसिद्ध भोजपुरी कथावाचक वीरेंद्र तिवारी ने अपनी मधुर वाणी और प्रभावशाली प्रस्तुति से श्रोताओं का मन मोह लिया। कार्यक्रम में ‘राम वन गमन’ और ‘भरत मिलाप’ के प्रसंगों का ऐसा सजीव वर्णन किया गया कि पांडाल में मौजूद हर व्यक्ति की आँखें नम हो गईं और पूरा वातावरण Spiritual (आध्यात्मिक) ऊर्जा से भर गया।

त्याग और मर्यादा का ‘Live’ उदाहरण: राम वन गमन

​कथा के मुख्य सत्र में श्री तिवारी ने भगवान राम के वनवास जाने के प्रसंग को अत्यंत Marmic (मार्मिक) रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने विस्तार से बताया कि कैसे महाराजा दशरथ के वचनों को निभाने के लिए श्री राम ने बिना किसी संकोच के राजसी सुख-सुविधाओं का त्याग कर दिया।

​कथावाचक ने जोर देते हुए कहा, “राम का वन गमन केवल एक यात्रा नहीं थी, बल्कि यह Self-discipline (आत्म-अनुशासन) और Commitment (कर्तव्यनिष्ठा) का सर्वोच्च शिखर था।” उन्होंने वर्तमान पीढ़ी को यह संदेश दिया कि आज के Materialistic (भौतिकवादी) युग में भी पिता की आज्ञा और पारिवारिक मर्यादा का पालन करना कितना अनिवार्य है। राम के वन जाते समय अयोध्या वासियों के विलाप के वर्णन ने श्रोताओं को Deeply Emotional कर दिया।

भाईचारे की अनूठी मिसाल: भरत मिलाप

​कार्यक्रम का दूसरा मुख्य आकर्षण ‘भरत मिलाप’ प्रसंग रहा। वीरेंद्र तिवारी ने भरत के चरित्र को Selflessness (निस्वार्थ भाव) का प्रतीक बताया। जब भरत श्री राम को वापस लाने के लिए चित्रकूट पहुँचते हैं, तो वह दृश्य भाईचारे और प्रेम की पराकाष्ठा को दर्शाता है।​Devotion: भरत द्वारा राम की खड़ाऊ को सिर पर धारण करना उनकी Unwavering Faith (अटूट श्रद्धा) का प्रमाण है।​Sacrifice: सिंहासन पर बैठने के बजाय उसे राम की खड़ाऊ को सौंपना यह सिखाता है कि रिश्ते सत्ता से कहीं अधिक महत्वपूर्ण होते हैं।

​कथावाचक ने कहा कि समाज में बढ़ते बिखराव को रोकने के लिए ‘भरत मिलाप’ जैसे प्रसंगों से Inspiration (प्रेरणा) लेना आवश्यक है।

भजन-कीर्तन और आध्यात्मिक माहौल

​कथा के बीच-बीच में प्रस्तुत किए गए भक्तिमय भजनों ने माहौल को और भी Mesmerizing (मंत्रमुग्ध) बना दिया। श्रद्धालुओं ने तालियों की गड़गड़ाहट और जयकारों के साथ अपनी भक्ति प्रकट की। कार्यक्रम में गाजीपुर और आसपास के क्षेत्रों से भारी संख्या में पुरुष और महिला श्रद्धालु सम्मिलित हुए।

नैतिक मूल्यों का प्रसार: आयोजकों का संदेश

​आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि इस प्रकार के Religious Events का मुख्य उद्देश्य समाज में Moral Values (नैतिक मूल्यों) का संचार करना है। यह कार्यक्रम लोगों को जीवन में सही मार्ग (Right Path) अपनाने के लिए प्रेरित करता है।

​कथा के अंत में भव्य Aarti का आयोजन किया गया, जिसके बाद सभी उपस्थित भक्तों के बीच Prasad Distribution किया गया। उपस्थित श्रद्धालुओं ने कथावाचक वीरेंद्र तिवारी की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनकी सरल भाषा और Storytelling Style (कथा कहने की शैली) ने सीधे उनके दिलों को छू लिया।

By: अकील अहमद स्थान: बहादुरगंज, गाजीपुर

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