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महिला दारोगा की नहीं FIR  ससुर पर रेप का आरोप, न्याय के लिए काट रही थाने के चक्कर; चौकी इंचार्ज ने दी नौकरी खाने की धमकी

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महिला दारोगा की नहीं FIR  ससुर पर रेप का आरोप, न्याय के लिए काट रही थाने के चक्कर; चौकी इंचार्ज ने दी नौकरी खाने की धमकी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से पुलिस महकमे और कानून व्यवस्था को शर्मसार कर देने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहाँ प्रयागराज में तैनात एक महिला उपनिरीक्षक (दारोगा) ने अपने ही ससुराल वालों पर गंभीर प्रताड़ना और ससुर पर दुष्कर्म (रेप) जैसा संगीन आरोप लगाया है। सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि पीड़ित महिला खुद पुलिस विभाग में दारोगा के पद पर कार्यरत है, लेकिन इसके बावजूद उसे न्याय के लिए दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही हैं। पीड़िता का आरोप है कि पिछले चार-पांच दिनों से वह लखनऊ के पारा थाने और हंस खेड़ा चौकी के चक्कर काट रही है, लेकिन उसकी सुनवाई करने वाला कोई नहीं है।

​ससुर पर दुष्कर्म का संगीन आरोप, ससुराल पक्ष पर प्रताड़ना का दावा

​मूल रूप से उत्तर प्रदेश पुलिस में प्रयागराज जिले में तैनात महिला दारोगा का विवाह लखनऊ के पारा थाना क्षेत्र के अंतर्गत हुआ था। पीड़िता का आरोप है कि शादी के बाद से ही ससुराल वाले उसे मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे। हद तो तब हो गई जब पीड़िता के मुताबिक, उसके ससुर ने उसके साथ जबरन दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया। इस घिनौने कृत्य में ससुराल के अन्य सदस्यों ने भी पीड़िता की मदद करने के बजाय उसे दबाने और प्रताड़ित करने का काम किया। ससुराल पक्ष के इस अमानवीय व्यवहार और जुल्म से तंग आकर आखिरकार महिला दारोगा ने कानूनी लड़ाई लड़ने का फैसला किया और अपनी शिकायत लेकर पुलिस के पास पहुँची।

​”सबूत लाकर दो तब दर्ज होगी एफआईआर” — पुलिस का संवेदनहीन रवैया

​एक महिला दारोगा, जो खुद कानून की रक्षक है और दूसरों को न्याय दिलाती है, जब खुद पीड़ित बनकर पारा थाने और हंस खेड़ा चौकी पहुँची, तो उसे खाकी के सबसे संवेदनहीन चेहरे का सामना करना पड़ा। पीड़िता का आरोप है कि पिछले ४-५ दिनों से वह लगातार पुलिस अधिकारियों और थाने के चक्कर काट रही है, लेकिन पुलिस ने अभी तक न तो उसका मेडिकल परीक्षण कराया है और न ही इस संगीन मामले में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है।

​पीड़िता ने बताया कि जब उसने पुलिस से गुहार लगाई, तो उसे थाने से टका सा जवाब मिला कि “पहले सबूत लाकर दो, तब कार्रवाई होगी।” एक रेप पीड़िता से पुलिस द्वारा इस तरह के सबूतों की मांग करना और तत्काल कार्रवाई न करना, पुलिस की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े करता है।

​चौकी इंचार्ज मुन्नालाल यादव पर गंभीर आरोप: “तुम्हारी नौकरी खा जाएंगे”

​मामले में तब और नया मोड़ आ गया जब पीड़िता ने हंस खेड़ा चौकी इंचार्ज मुन्नालाल यादव पर सीधे तौर पर मानसिक उत्पीड़न और धमकी देने का गंभीर आरोप लगाया। महिला दारोगा का कहना है कि जब वह अपनी शिकायत दर्ज कराने चौकी गई, तो न्याय देना तो दूर, चौकी इंचार्ज मुन्नालाल यादव ने उसे ही डराना-धमकाना शुरू कर दिया।

​आरोप है कि चौकी इंचार्ज ने रौब झाड़ते हुए पीड़िता से कहा, “ज्यादा नेतागिरी मत करो, तुम्हारी नौकरी खा जाएंगे।” एक सहकर्मी और महिला अधिकारी के साथ इस तरह का अमर्यादित और दमनकारी व्यवहार स्थानीय पुलिस की नीयत पर गंभीर संदेह पैदा करता है।

​”पूरा थाना बिक चुका है, मैं खुद दारोगा होकर बेबस हूँ” — पीड़िता का छलका दर्द

​थाने और चौकी के चक्कर काटकर थक चुकी पीड़ित महिला दारोगा का दर्द और गुस्सा मीडिया के सामने फूट पड़ा। उसने अत्यंत हताशा में कहा, “पूरा थाना बिक चुका है। मैं खुद दारोगा हूँ, जब विभाग अपनी ही एक महिला अधिकारी को सुरक्षा और न्याय नहीं दे पा रहा है, तो यहाँ आम जनता की बेटियों का क्या हाल होता होगा?” पीड़िता के इस बयान ने लखनऊ पुलिस की कार्यशैली को पूरी तरह कटघरे में खड़ा कर दिया है।

​यह मामला अब सोशल मीडिया और प्रशासनिक गलियारों में तेजी से तूल पकड़ रहा है। एक महिला पुलिस अधिकारी का न्याय के लिए इस तरह बेबस होना उत्तर प्रदेश पुलिस के “मिशन शक्ति” और महिला सुरक्षा के दावों की जमीनी हकीकत को बयां करता है। अब देखना यह होगा कि इस मामले के उजागर होने के बाद लखनऊ के उच्च पुलिस अधिकारी (सीपी और डीसीपी) आरोपी ससुराल पक्ष और संवेदनहीन चौकी इंचार्ज पर क्या एक्शन लेते हैं।

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