Exclusive MLA fund: यूपी के विधायकों के लिए विधायक निधि जारी सरकार ने जारी किए ₹1247.50 करोड़
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Exclusive MLA fund: यूपी के विधायकों के लिए विधायक निधि जारी सरकार ने जारी किए ₹1247.50 करोड़
लखनऊ | विशेष संवाददाता
उत्तर प्रदेश: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने प्रदेश के चहुंमुखी विकास को गति देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए विधान मंडल क्षेत्र विकास निधि (विधायक निधि) की पहली किस्त के रूप में 1247.50 करोड़ रुपये की भारी-भरकम धनराशि जारी कर दी गई है। इस फंड के रिलीज होने के बाद अब प्रदेश की गलियों, मोहल्लों और ग्रामीण इलाकों में रुके हुए छोटे-बड़े विकास कार्यों में तेजी आने की उम्मीद है।
बजट का गणित: किसे कितना मिला?
उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2026-27 के बजट में विधान सभा और विधान परिषद के सदस्यों के लिए प्रति सदस्य 5 करोड़ रुपये का वार्षिक प्रावधान किया है। नियमों के मुताबिक, प्रथम किस्त (First Installment) के रूप में कुल धनराशि का 50 प्रतिशत हिस्सा स्वीकृत कर दिया गया है।विधान सभा: कुल 403 सीटों में से वर्तमान में कार्यरत 400 विधायकों (3 स्थान रिक्त) के लिए 10 अरब रुपये जारी किए गए हैं। प्रत्येक विधायक के खाते में विकास कार्यों के लिए 2.50 करोड़ रुपये की पहली किस्त भेजी गई है।विधान परिषद: उच्च सदन के 100 सदस्यों में से वर्तमान में कार्यरत 99 सदस्यों (1 स्थान रिक्त) के लिए 247.50 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है। यहाँ भी प्रति सदस्य 2.50 करोड़ रुपये का आवंटन हुआ है।
Performance पर उठे सवाल: कौन है नंबर वन?
सरकार ने फंड तो जारी कर दिया है, लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल विधायकों के Working Style और उनकी तत्परता पर खड़ा होता है। विधायक निधि का मुख्य उद्देश्य स्थानीय स्तर की उन बुनियादी समस्याओं का समाधान करना है, जो अक्सर बड़े बजट की योजनाओं में छूट जाती हैं।
आंकड़े गवाह हैं कि उत्तर प्रदेश के कुछ विधायक अपनी निधि खर्च करने में ‘नंबर वन’ रहते हैं और जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान (Quick Solution) करते हैं। वहीं, एक बड़ा वर्ग ऐसा भी है जो समय पर फंड का उपयोग नहीं कर पाता, जिससे बजट लैप्स होने का खतरा बना रहता है। इस सुस्त रवैये के कारण स्थानीय जनता को जल निकासी, सीसी रोड, और स्ट्रीट लाइट जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है।
ग्राउंड जीरो पर असर: क्या बदलेगी तस्वीर?
विधायक निधि का सीधा कनेक्शन ‘जमीनी विकास’ से होता है। यह धनराशि स्कूलों की मरम्मत, सामुदायिक भवनों के निर्माण, हैंडपंप लगवाने और गांवों के संपर्क मार्गों को दुरुस्त करने के काम आती है। सरकार द्वारा किस्त जारी होने के बाद अब गेंद विधायकों के पाले में है। यह देखना दिलचस्प होगा कि कौन सा माऩनीय कितनी शिद्दत के साथ अपने क्षेत्र की जनता की उम्मीदों पर खरा उतरता है।
विपक्ष और जनता की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या इस बार विधायक फंड का 100% Utilization सुनिश्चित करेंगे या फिर कागजी खानापूर्ति में ही वक्त बीत जाएगा। सरकार ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि विकास कार्यों में गुणवत्ता (Quality) और पारदर्शिता (Transparency) के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
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ब्यूरो चीफ:
साभार: SouthAsia24x7 (24/7 National Digital Portal)
स्थान: लखनऊ
