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यूपी में मंत्रिमंडल विस्तार चर्चाएं तेज: 10 मई तक हो सकता है शपथ ग्रहण, ‘mission 2027’ के लिए भाजपा लगाएगी युवाओं पर दांव

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यूपी में मंत्रिमंडल विस्तार चर्चाएं तेज: 10 मई तक हो सकता है शपथ ग्रहण, ‘mission 2027’ के लिए भाजपा लगाएगी युवाओं पर दांव

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर हलचलें तेज हो गई हैं। शासन और सत्ता के गलियारों में चर्चा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने मंत्रिमंडल का विस्तार कर सकते हैं, जिसकी संभावित तारीख 10 मई बताई जा रही है। इस विस्तार के पीछे भाजपा का मुख्य लक्ष्य ‘मिशन 2027’ है, जिसके जरिए पार्टी जीत की हैट्रिक लगाने की तैयारी में जुटी है।

युवाओं को तरजीह, 65 पार वालों की हो सकती है छुट्टी

​सूत्रों के हवाले से जो सबसे बड़ी खबर निकलकर सामने आ रही है, वह है मंत्रियों की उम्र का पैमाना। बताया जा रहा है कि पार्टी आलाकमान ने इस बार 65 साल या उससे अधिक उम्र वाले विधायकों को मंत्री पद की दावेदारी न करने के संकेत दिए हैं। भाजपा का इरादा मंत्रिमंडल में युवा चेहरों को शामिल कर प्रशासन में नई ऊर्जा फूंकना है। इस बदलाव से कई पुराने दिग्गजों की छुट्टी हो सकती है, जबकि ऊर्जावान और युवा विधायकों को बड़ी जिम्मेदारी मिलने की उम्मीद है।

6 नए चेहरों की एंट्री और तीसरे डिप्टी सीएम की चर्चा

​चर्चाओं के अनुसार, इस विस्तार में अधिकतम 6 नए मंत्रियों को शामिल किया जा सकता है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण बात एक तीसरे डिप्टी सीएम की नियुक्ति को लेकर चल रही है। यदि ऐसा होता है, तो यह जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने की दिशा में भाजपा का एक बड़ा मास्टरस्ट्रोक होगा।

​मंत्रिमंडल में केवल भाजपा ही नहीं, बल्कि सहयोगी दलों के विधायकों को भी जगह मिल सकती है। इससे गठबंधन की मजबूती और 2027 के चुनाव से पहले सहयोगियों को संतुष्ट करने की रणनीति साफ दिखाई दे रही है।

क्षेत्रीय संतुलन पर विशेष फोकस

​मिशन 2027 को कामयाब बनाने के लिए भाजपा उत्तर प्रदेश के हर कोने को प्रतिनिधित्व देना चाहती है। माना जा रहा है कि इस विस्तार में:​पश्चिमी उत्तर प्रदेश: किसान आंदोलनों और क्षेत्रीय समीकरणों को देखते हुए यहाँ से नए चेहरों को तवज्जो मिल सकती है।​पूर्वी उत्तर प्रदेश (पूर्वांचल): मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र और राजनीतिक रूप से सक्रिय इस हिस्से से भी मंत्रियों की संख्या बढ़ सकती है।​बुंदेलखंड और मध्य यूपी: ऐसे जिले जहाँ से वर्तमान में कोई मंत्री नहीं है, वहां के विधायकों की किस्मत चमक सकती है।

दिल्ली से लखनऊ तक बैठकों का दौर

​कैबिनेट विस्तार की यह पटकथा अचानक नहीं लिखी गई है। अप्रैल माह में ही दिल्ली और लखनऊ के बीच कई दौर की उच्च स्तरीय बैठकें हो चुकी हैं। इन बैठकों में मंत्रियों के परफॉर्मेंस रिपोर्ट कार्ड पर विस्तार से चर्चा हुई है। खराब प्रदर्शन वाले मंत्रियों के पोर्टफोलियो (विभाग) बदले जा सकते हैं या उन्हें मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है।

 सुशासन और संगठन की मजबूती

​योगी सरकार के इस संभावित विस्तार का मुख्य उद्देश्य सरकार की छवि को और अधिक जनहितैषी बनाना और संगठन को मजबूती देना है। भाजपा 2027 के रण में उतरने से पहले अपनी टीम को पूरी तरह दुरुस्त कर लेना चाहती है। अब सबकी नजरें 10 मई पर टिकी हैं, जब राजभवन में नए मंत्रियों का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित होने की संभावना है।

ब्यूरो रिपोर्ट, लखनऊ।

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