चमोली: विकास कार्यों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं, जिलाधिकारी ने दी ‘डेडलाइन’ – नाबार्ड परियोजनाओं की बड़ी समीक्षा
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चमोली: विकास कार्यों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं, जिलाधिकारी ने दी ‘डेडलाइन’ – नाबार्ड परियोजनाओं की बड़ी समीक्षा
चमोली | 06 मई, 2026 (सूचना विभाग)
जनपद के सीमांत क्षेत्रों में विकास की गति को धार देने और ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य से आज जिलाधिकारी गौरव कुमार ने कड़ा रुख अपनाया है। बुधवार को जिला सभागार में आयोजित नाबार्ड वित्त पोषित ग्रामीण अवसंरचना विकास निधि (RIDF) की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी ने सुस्त रफ्तार से चल रही परियोजनाओं पर असंतोष व्यक्त किया और स्पष्ट चेतावनी दी कि विकास कार्यों में देरी और गुणवत्ता से खिलवाड़ करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
गुणवत्ता और पारदर्शिता पर ‘जीरो टॉलरेंस’
बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिलाधिकारी गौरव कुमार ने लोक निर्माण विभाग (PWD), सिंचाई, लघु सिंचाई, कौशल शिक्षा एवं सेवायोजन, तकनीकी शिक्षा, पशुपालन, मत्स्य तथा उद्यान विभाग की एक-एक कर समीक्षा की। उन्होंने दो-टूक शब्दों में कहा कि सरकारी धन का सदुपयोग और जनहित सर्वोपरि है।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए:समयबद्धता: जो परियोजनाएं अपने निर्धारित समय से पीछे चल रही हैं, उनमें श्रमशक्ति बढ़ाकर तत्काल तेजी लाई जाए।मानक अनुपालन: निर्माण कार्यों में प्रयुक्त सामग्री और तकनीक की गुणवत्ता में कोई समझौता न किया जाए।सतत निगरानी: अधिकारी केवल कागजों पर नहीं, बल्कि धरातल पर जाकर कार्यों का निरीक्षण करें और आ रही तकनीकी समस्याओं का मौके पर ही समाधान निकालें।
भविष्य की योजनाओं के लिए ‘रोडमैप’ तैयार
समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी ने सभी विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए कि वे जिले की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए जनहित से जुड़ी नई अवसंरचनाओं की पहचान करें। उन्होंने कहा कि चमोली के समग्र विकास के लिए हमें ऐसी परियोजनाओं पर ध्यान केंद्रित करना होगा जो सीधे तौर पर ग्रामीणों के जीवन स्तर में सुधार लाएं। उन्होंने विभागों को निर्देशित किया कि वे अविलंब नए एवं ठोस प्रस्ताव तैयार कर नाबार्ड (RIDF) को भेजें, ताकि जिले को अधिक से अधिक फंड मिल सके।
नाबार्ड की स्थिति पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण
बैठक में नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक (DDM) श्रेयांश जोशी ने जिले में वर्तमान में संचालित आरआईडीएफ परियोजनाओं की वस्तुस्थिति का विस्तृत खाका पेश किया। उन्होंने डिजिटल प्रस्तुतीकरण के माध्यम से विभागीय अधिकारियों को नाबार्ड के कड़े दिशा-निर्देशों, समयबद्ध रिपोर्टिंग और वित्तीय पारदर्शिता के महत्व के बारे में जानकारी दी। उन्होंने जोर देकर कहा कि रिपोर्टिंग में देरी परियोजनाओं की फंडिंग को प्रभावित कर सकती है, इसलिए विभाग तत्परता दिखाएं।
अधिकारियों की गरिमामयी उपस्थिति
बैठक में प्रशासनिक और विभागीय तालमेल देखने को मिला। इस महत्वपूर्ण चर्चा में मुख्य रूप से निम्नलिखित अधिकारी उपस्थित रहे:परियोजना निदेशक: आनंद सिंह भाकुनीमुख्य उद्यान अधिकारी (CHO): नितेंद्र सिंहमुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी (CVO): अशीम देब
इसके साथ ही लोनिवि, सिंचाई और तकनीकी शिक्षा विभागों के अधिशासी अभियंता एवं अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
निष्कर्ष: विकास की ओर बढ़ते कदम
आज की बैठक का मुख्य संदेश स्पष्ट था—विकास योजनाओं का लाभ अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक पहुँचाना प्रशासन की प्राथमिकता है। जिलाधिकारी के इन कड़े निर्देशों के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि जनपद चमोली में लंबित पड़े पुलों, सड़कों और सिंचाई नहरों के कार्यों में भारी तेजी आएगी, जिससे मानसून सीजन से पूर्व महत्वपूर्ण कार्य पूर्ण किए जा सकेंगे।
रिपोर्ट: सोहन सिंह
