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पश्चिम बंगाल में भाजपा नेता शुभेंद्र के पीए चंद्रनाथ की सरेआम हत्या, 6 गोलियों से थर्राया मध्यमग्राम

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पश्चिम बंगाल में भाजपा नेता शुभेंद्र के पीए चंद्र नाथ की सरेआम हत्या, 6 गोलियों से थर्राया मध्यमग्राम

कोलकाता/मध्यमग्राम: पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद जारी हिंसा का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा घटना उत्तर 24 परगना जिले के मध्यमग्राम की है, जहाँ अज्ञात बदमाशों ने भाजपा नेता सोमेंद्र अधिकारी के करीबी सहयोगी चंदनाथ की ताबड़तोड़ गोलियां मारकर हत्या कर दी। इस जघन्य हत्याकांड के बाद पूरे राज्य में हड़कंप मच गया है और ममता सरकार की कानून-व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है।

​घात लगाकर किया गया हमला

​मिली जानकारी के अनुसार, रामनाथ जब अपने घर की ओर जा रहे थे, तभी पहले से घात लगाए बैठे बदमाशों ने उन्हें चारों तरफ से घेर लिया। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि हमलावरों ने बिना संकोच किए उन पर टावरतोड़ फायरिंग शुरू कर दी। चंद्रनाथ को निशाना बनाकर कम से कम 6 गोलियां दागी गईं, जिससे वह लहूलुहान होकर वहीं गिर पड़े। वारदात को अंजाम देने के बाद हमलावर मौके से फरार होने में कामयाब रहे।

​स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से उन्हें आनन-फानन में एंबुलेंस के जरिए नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। इस खबर के फैलते ही अस्पताल और घटनास्थल पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

​प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल

​9 मई को नई सरकार का गठन होने जा रहा है, लेकिन शपथ ग्रहण से पहले ही इस तरह की वारदात ने प्रशासन की नींद उड़ा दी है। राज्य के डीजीपी और कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे हैं। पुलिस प्रशासन पूरी तरह चौकस होने का दावा कर रहा है, लेकिन स्थानीय जनता और राजनीतिक गलियारों में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर गहरा आक्रोश है।

​विशेषज्ञों का कहना है कि चुनाव के बाद (Post-poll violence) बंगाल में जिस तरह से आपराधिक घटनाएं बढ़ी हैं, उसने कानून-व्यवस्था की पोल खोल दी है। आखिर पुलिस की मुस्तैदी के बावजूद बदमाश इतनी बड़ी वारदात कर कैसे निकल जा रहे हैं? क्या यह कोई बड़ी साजिश है या किसी पेशेवर गैंग का काम?

​पुलिस की कार्रवाई और सीसीटीवी फुटेज

​वारदात की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी है। पुलिस के हाथ कुछ अहम सुराग लगे हैं:​सीसीटीवी फुटेज: पुलिस ने घटनास्थल और आसपास के रास्तों के सीसीटीवी फुटेज अपने कब्जे में ले लिए हैं ताकि हमलावरों की पहचान की जा सके।​फोरेंसिक टीम: फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम ने मौके से साक्ष्य जुटाए हैं, जिसमें गोलियों के खोखे और अन्य महत्वपूर्ण सबूत शामिल हैं।​स्पेशल टीम का गठन: अपराधियों की धरपकड़ के लिए पुलिस की कई एक्सपर्ट टीमों को लगाया गया है। पुलिस का मानना है कि इस हत्या के पीछे रेकी की गई थी।

​राजनीतिक रंजिश की आशंका

​राष्ट्रीय स्तर पर भी इस घटना की चर्चा तेज हो गई है। भाजपा ने इसे ‘चुनावी रंजिश’ का हिस्सा बताते हुए राज्य सरकार पर निशाना साधा है। सोमेंद्र अधिकारी के करीबी की हत्या ने यह स्पष्ट कर दिया है कि बंगाल में राजनीतिक जमीन को लहूलुहान करने का दौर अभी खत्म नहीं हुआ है।

​अब देखना यह होगा कि नई सरकार के गठन से पहले हुई इस बड़ी वारदात पर पुलिस क्या ठोस एक्शन लेती है। क्या अपराधियों को समय रहते गिरफ्तार किया जा सकेगा, या फिर बंगाल इसी तरह हिंसा की आग में जलता रहेगा? फिलहाल, पूरे मध्यमग्राम में तनाव का माहौल है और भारी सुरक्षा बल की तैनाती की गई है ताकि स्थिति को और बिगड़ने से रोका जा सके।

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