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उत्तराखंड संस्कृत संस्थान में हर्षोल्लास के साथ मना हरेला पर्व, सचिव दीपक कुमार ने किया वृक्षारोपण

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उत्तराखंड संस्कृत संस्थान में हर्षोल्लास के साथ मना हरेला पर्व, सचिव दीपक कुमार ने किया वृक्षारोपण

विशेष संवाददाता

हरिद्वार/देहरादून।

​उत्तराखंड के पावन लोक पर्व ‘हरेला’ के शुभ अवसर पर उत्तराखंड संस्कृत संस्थानम (उत्तराखंड सरकार), हरिद्वार में व्यापक स्तर पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। संस्थान परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में प्रकृति संरक्षण, पर्यावरण चेतना और देववाणी संस्कृत के प्रचार-प्रसार का एक अनूठा संगम देखने को मिला। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे उत्तराखंड शासन के संस्कृत शिक्षा सचिव  दीपक कुमार ने न केवल संस्थान परिसर में फलदार पौधों का रोपण किया, बल्कि संस्थान की भविष्य की रूपरेखा को लेकर एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक भी की।

​प्रकृति का श्रृंगार हैं वृक्ष: सचिव दीपक कुमार

​हरेला पर्व के महत्व पर प्रकाश डालते हुए संस्कृत शिक्षा सचिव श्री दीपक कुमार ने संस्थान के सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को लोक पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण पर जोर देते हुए कहा, “वृक्ष प्रकृति का वास्तविक श्रृंगार हैं और यह समृद्ध प्रकृति हमारी अमूल्य धरोहर है। इस धरोहर का संरक्षण करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।”

​उन्होंने सभी उपस्थित जनों और प्रदेशवासियों से आह्वान किया कि प्रत्येक नागरिक को वर्ष में कम से कम एक वृक्ष अवश्य लगाना चाहिए और केवल लगाना ही नहीं, बल्कि उसके बड़े होने तक उसकी देखभाल का संकल्प भी लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की संस्कृति हमेशा से प्रकृति से जुड़ी रही है और हरेला पर्व इसी सह-अस्तित्व का प्रतीक है।

​कार्यों की समीक्षा और भावी रणनीतियों पर मंथन

​वृक्षारोपण कार्यक्रम के उपरांत, सचिव  दीपक कुमार ने संस्थान परिसर का विस्तृत निरीक्षण किया। उन्होंने संस्थान की व्यवस्थाओं को देखा और आवश्यक सुधारों के लिए मौके पर ही दिशा-निर्देश जारी किए। इसके बाद उन्होंने संस्थान के समस्त अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की।

​बैठक में सचिव महोदय ने निर्देश दिए कि आगामी वर्ष की समस्त प्रतियोगिताओं, शोध सम्मेलनों, विभिन्न अकादमिक प्रकाशन कार्यों और आगामी ‘संस्कृत मास’ की विस्तृत कार्ययोजना (ब्लूप्रिंट) शीघ्र तैयार कर शासन के समक्ष प्रस्तुत की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्तराखंड की द्वितीय राजभाषा संस्कृत के संवर्धन, संरक्षण और जमीनी स्तर पर इसके प्रचार-प्रसार के लिए सभी को पूरी तन्मयता, समर्पण और निष्ठा के साथ काम करने की आवश्यकता है।

​’संस्कृत संवर्धन के महायज्ञ के ब्रह्मा हैं सचिव महोदय’

​इससे पूर्व, बैठक की शुरुआत में उत्तराखंड संस्कृत संस्थान के नवनियुक्त सचिव प्रो. विनय कुमार विद्यालंकार ने मुख्य अतिथि श्री दीपक कुमार का संस्थान की ओर से भावभीना स्वागत और अभिनंदन किया। प्रो. विद्यालंकार ने सचिव महोदय के प्रशासनिक नेतृत्व की सराहना करते हुए कहा कि उत्तराखंड सरकार और शासन के माध्यम से सचिव महोदय अहोरात्र (दिन-रात) संस्कृत के उत्थान के लिए प्रयासरत रहते हैं।

​प्रो. विद्यालंकार ने एक सुंदर रूपक का प्रयोग करते हुए कहा, “आदरणीय सचिव जी केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के साथ निरंतर समन्वय बनाकर उत्तराखंड की द्वितीय राजभाषा संस्कृत को उचित सम्मान, गौरव व वैश्विक प्रतिष्ठा दिलाने के महायज्ञ में ‘ब्रह्मा’ की भूमिका निभा रहे हैं, और हम सभी कर्मचारियों को इस यज्ञ का ‘होता’ (यज्ञकर्ता) बनाकर मार्गदर्शन दे रहे हैं।” इस दौरान संस्थान के सभी अधिकारियों व कर्मचारियों ने सचिव महोदय को आश्वस्त किया कि वे उनके विश्वास और शासन की उम्मीदों पर शत-प्रतिशत खरा उतरने का हरसंभव प्रयास करेंगे।

​गरिमामयी उपस्थिति

​इस ऐतिहासिक व सांस्कृतिक आयोजन के अवसर पर संस्थान के नवनियुक्त सचिव प्रो. विनय कुमार विद्यालंकार, शोध अधिकारी डॉ. हरीश चन्द्र गुरुरानी, प्रकाशन अधिकारी किशोरी लाल रतूड़ी तथा सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष रमा कठैत मुख्य रूप से उपस्थित रहे।

​इसके साथ ही संस्थान के अकादमिक और प्रशासनिक स्टाफ से मनीषा, आकांक्षा, बेबी, विवेक, गणेश प्रसाद फोन्दणी, मोहित, संतोष, ओमप्रकाश, पंकज, सुन्दर, प्रीतम, अंकित, सुनील, मुकेश और विनय सहित कई गणमान्य कार्मिक उपस्थित रहे। सभी ने संयुक्त रूप से परिसर में पौधारोपण कर पर्यावरण को स्वच्छ और हरा-भरा बनाने का संकल्प लिया।

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