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सीएम योगी आदित्यनाथ ने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से की मुलाकात कल 10 मई को यूपी सरकार की कैबिनेट का होगा  विस्तार

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सीएम योगी आदित्यनाथ ने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से की मुलाकात कल 10 मई को यूपी सरकार की कैबिनेट का होगा  विस्तार

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल से राजभवन में हुई मुलाकात के बाद यह लगभग साफ हो गया है कि प्रदेश में मंत्रिमंडल का विस्तार होने जा रहा है। सूत्रों की मानें तो कल, यानी 10 मई को नए मंत्रियों का शपथ ग्रहण समारोह हो सकता है। यह विस्तार मात्र प्रशासनिक फेरबदल नहीं, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा का एक बड़ा रणनीतिक कदम माना जा रहा है।

जातीय और क्षेत्रीय संतुलन पर विशेष जोर

​इस कैबिनेट विस्तार की सबसे बड़ी खासियत इसका ‘सोशल इंजीनियरिंग’ मॉडल है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिस तरह से राज्यपाल के साथ मंथन किया है, उससे स्पष्ट है कि भाजपा 2027 के मिशन को फतेह करने के लिए ओबीसी (OBC) और एससी (SC) समीकरणों पर सबसे ज्यादा दांव लगा रही है। इस बार के विस्तार में पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर पूर्वी उत्तर प्रदेश तक के क्षेत्रीय संतुलन को साधने की कोशिश की गई है।

​सरकार का मुख्य फोकस उन वर्गों को साथ लाने पर है, जिनकी आबादी चुनावी नतीजों को पलटने की ताकत रखती है। यही कारण है कि नए संभावित चेहरों में पिछड़ों और दलितों की नुमाइंदगी सबसे ज्यादा दिखाई दे रही है।

संभावित चेहरों की सूची: किसे मिल सकती है जगह?

​चर्चाओं के बाजार में 8 प्रमुख नाम सबसे आगे चल रहे हैं, जो जातीय समीकरणों में फिट बैठते हैं:​भूपेंद्र चौधरी (जाट – ओबीसी): पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और मुरादाबाद के कद्दावर नेता। पश्चिमी यूपी में जाट वोट बैंक को मजबूती देने के लिए इनका कद महत्वपूर्ण है।​मनोज पांडेय (ब्राह्मण): रायबरेली की ऊंचाहार सीट से विधायक और सपा के बागी। ब्राह्मण समाज के बीच पकड़ और विपक्षी खेमे में सेंधमारी का इनाम इन्हें मिल सकता है।​पूजापाल (पाल – ओबीसी): कौशांबी के चायल से विधायक। पाल समाज में प्रभाव और सपा से बगावत के बाद इनका नाम रेस में सबसे आगे है।​अशोक कटारिया (गुर्जर – ओबीसी): बिजनौर से आने वाले एमएलसी, जो गुर्जर मतदाताओं को साधने का जरिया बनेंगे।कृष्णा पासवान व सुरेश पासी (एससी): पासी समाज को प्रतिनिधित्व देने के लिए फतेहपुर और अमेठी से इन दोनों चेहरों पर दांव लगाया जा सकता है।​सुरेंद्र दिलेर (वाल्मीकि – एससी): अलीगढ़ की खैर सीट से विधायक, जो दलित राजनीति के बड़े स्तंभ माने जाते हैं।​आशीष सिंह आशु (कुर्मी – ओबीसी): हरदोई की मल्लवाँ सीट से विधायक, कुर्मी समाज के प्रतिनिधित्व के तौर पर शामिल किए जा सकते हैं।

चेहरों से दूरी

​इस संभावित विस्तार की एक चौकाने वाली बात यह है कि फिलहाल यादव समाज और अल्पसंख्यक वर्ग से किसी भी नए विधायक को मंत्रिमंडल में जगह मिलने के आसार कम नजर आ रहे हैं। जानकारों का मानना है कि भाजपा का पूरा ध्यान इस समय गैर-यादव ओबीसी और अनुसूचित जाति के उन वर्गों पर है, जहां 2024 के लोकसभा चुनाव में उसे कड़ी चुनौती मिली थी।

लक्ष्य: 2027 की ‘बड़ी जीत’

​भले ही 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की सीटों का आंकड़ा यूपी में कम हुआ हो, लेकिन संगठन अब उस कमी को दूर करने में जुट गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का लक्ष्य सरकार और संगठन के बीच बेहतर तालमेल बनाना है। चर्चा है कि कुल 69 मंत्री बनाए जा सकते हैं, जिसमें कुछ पुराने मंत्रियों के विभागों (पोर्टफोलियो) में भी फेरबदल की संभावना है।

यह कैबिनेट विस्तार केवल पदों का बंटवारा नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की सत्ता पर अपनी पकड़ को और मजबूत करने की भाजपा की एक सोची-समझी बिसात है। मंडल से लेकर जिला अध्यक्षों तक के समीकरणों को दुरुस्त कर, भाजपा 2027 के लिए एक अजय ‘जातीय किला’ तैयार करना चाहती है। अब देखना यह है कि कल राजभवन में किन-किन नामों पर आधिकारिक मुहर लगती है।

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