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पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खण्डूड़ी का निधन, उत्तराखंड  में शोक की लहर; कल हरिद्वार में राजकीय सम्मान के साथ होगी अंत्येष्टि

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पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खण्डूड़ी का निधन, उत्तराखंड  में शोक की लहर; कल हरिद्वार में राजकीय सम्मान के साथ होगी अंत्येष्टि

देहरादून ( साउथ एशिया 24×7 डेस्क): उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व केंद्रीय मंत्री और कड़े अनुशासन व शुचिता की राजनीति के प्रतीक मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चंद्र खण्डूड़ी का आज आकस्मिक निधन हो गया। वे 91 वर्ष के थे और पिछले कुछ समय से अस्वस्थ चल रहे थे। उनका इलाज एक निजी अस्पताल में चल रहा था। जनरल साहब के निधन की खबर आते ही समूचे देश और विशेषकर देवभूमि उत्तराखंड में शोक की लहर दौड़ गई है। सरकार ने राज्य में तीन दिवसीय राजकीय शोक की घोषणा की है।

​निधन के बाद उनके पार्थिव शरीर को देहरादून के बसंत विहार स्थित उनके निजी आवास पर लाया गया, जहां उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए राजनीतिक और सामाजिक जगत के दिग्गजों का तांता लग गया।

दिग्गजों ने दी श्रद्धांजलि, नम आंखों से किया याद

​खंडूरी जी के अंतिम दर्शन करने और उनके पार्थिव शरीर पर पुष्प चक्र अर्पित करने के लिए विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता उनके आवास पर पहुंचे। श्रद्धांजलि देने वालों में:​कैबिनेट मंत्री: गणेश जोशी, सौरभ बहुगुणा और समाज कल्याण मंत्री खाजान दास ने आवास पर पहुंचकर दिवंगत नेता को नमन किया। सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने खंडूरी जी को अपना राजनीतिक गुरु बताते हुए इसे एक युग का अंत कहा।​पूर्व मुख्यमंत्री: पूर्व सीएम रमेश पोखरियाल निशंक और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत ने भी उनके आवास पर पहुंचकर श्रद्धांजलि दी। विधानसभा अध्यक्ष रितु खण्डूड़ी ने भावुक होते हुए कहा कि उनके पिता द्वारा स्थापित ईमानदारी और पारदर्शिता के मानक हमेशा देश की राजनीति के लिए एक अमर मिसाल रहेंगे।

कल हरिद्वार के खड़खड़ी घाट पर होगा अंतिम संस्कार (मिनट-टू-मिनट कार्यक्रम)

​सरकारी और पार्टी स्तर से जारी आधिकारिक सूचना के अनुसार, जनरल खण्डूड़ी जी का अंतिम संस्कार कल 20 मई 2026 (बुधवार) को पूरे सैन्य और राजकीय सम्मान के साथ हरिद्वार में किया जाएगा। जनता और कार्यकर्ताओं के दर्शनार्थ पूरा कार्यक्रम इस प्रकार है:​प्रातः 10:00 बजे: पार्थिव शरीर उनके निजी आवास (250, फेज 2, बसंत विहार कॉलोनी, देहरादून) से प्रस्थान करेगा।​प्रातः 10:30 बजे: पार्थिव शरीर को आम जनता और कार्यकर्ताओं के अंतिम दर्शन के लिए भाजपा प्रदेश कार्यालय (देहरादून) लाया जाएगा।​प्रातः 11:00 बजे: भाजपा मुख्यालय से अंतिम यात्रा हरिद्वार खड़खड़ी घाट के लिए रवाना होगी।​दोपहर 12:00 बजे: हरिद्वार के खड़खड़ी घाट पर सैन्य और राजकीय सम्मान के साथ अंत्येष्टि प्रक्रिया संपन्न होगी।

सेना के रणक्षेत्र से देश के इंफ्रास्ट्रक्चर की क्रांति तक

​1 अक्टूबर 1934 को देहरादून में जन्मे भुवन चंद्र खण्डूड़ी का जीवन राष्ट्रभक्ति और ईमानदारी की अनूठी मिसाल था। उन्होंने 1954 में भारतीय सेना की ‘कॉर्प्स ऑफ इंजीनियर्स’ में कमीशन प्राप्त किया। अपने 36 वर्षों के गौरवशाली सैन्य करियर में उन्होंने 1962 (भारत-चीन), 1965 (भारत-पाक) और 1971 (भारत-पाक) के तीन ऐतिहासिक युद्धों में देश की रक्षा की। 1971 के युद्ध में जम्मू-कश्मीर के सांबा सेक्टर में उनके शानदार नेतृत्व के लिए उन्हें 1982 में ‘अति विशिष्ट सेवा मेडल’ (AVSM) से सम्मानित किया गया था। वे 1990-91 में मेजर जनरल के पद से सेवानिवृत्त हुए।

अटल जी के ‘सड़क पुरुष’ और उत्तराखंड के सबसे ‘कड़क’ मुख्यमंत्री

​सेना से सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने सार्वजनिक जीवन में कदम रखा और गढ़वाल लोकसभा सीट से 5 बार सांसद चुने गए। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री के रूप में उन्होंने देश के बुनियादी ढांचे की तस्वीर बदल दी। भारत के आर्थिक विकास का पहिया कही जाने वाली ‘स्वर्णिम चतुर्भुज योजना’ (Golden Quadrilateral) को धरातल पर उतारने का श्रेय जनरल खंडूरी को ही जाता है।

​उत्तराखंड के दो बार मुख्यमंत्री रहे जनरल खंडूरी का कार्यकाल राज्य में सुशासन और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासनिक व्यवस्था के लिए जाना जाता है। उन्होंने देश का सबसे मजबूत लोकायुक्त कानून पारित कराया और कड़क ट्रांसफर पॉलिसी लागू की। साल 2008 में इंडिया टुडे ने उन्हें देश के सर्वश्रेष्ठ मुख्यमंत्री के रूप में सम्मानित किया था, और 2013 में उन्हें प्रतिष्ठित ‘मदर टेरेसा इंटरनेशनल अवॉर्ड’ से भी नवाजा गया।

​उनका जाना उत्तराखंड की राजनीति में एक ऐसे शून्य को छोड़ गया है, जिसे कभी भरा नहीं जा सकेगा। देवभूमि के इस महान सपूत और कड़क प्रशासक को हमारी भावभीनी श्रद्धांजलि।

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