विश्व थायरॉयड दिवस: श्री महंत इंदिरेश अस्पताल में ‘बिना निशान’ वाली आधुनिक थायरॉयड सर्जरी की सुविधा
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विश्व थायरॉयड दिवस: श्री महंत इंदिरेश अस्पताल में ‘बिना निशान’ वाली आधुनिक थायरॉयड सर्जरी की सुविधा
देहरादून। हर साल 25 मई को ‘विश्व थायरॉयड दिवस’ मनाया जाता है, जिसका मुख्य उद्देश्य लोगों को थायरॉयड से जुड़ी बीमारियों, उनके लक्षणों और आधुनिक उपचारों के प्रति जागरूक करना है। वर्तमान समय में थायरॉयड संबंधी समस्याएं बेहद तेजी से बढ़ रही हैं। विशेष रूप से महिलाओं और युवाओं में यह समस्या एक गंभीर चुनौती बनकर उभरी है। कई बार मरीजों के गले में गांठ (नोड्यूल), आवाज में भारीपन या बदलाव, खाना निगलने में कठिनाई और यहाँ तक कि थायरॉयड कैंसर जैसी गंभीर स्थितियां पैदा हो जाती हैं, जिनके सटीक इलाज के लिए सर्जरी ही एकमात्र सुरक्षित विकल्प बचती है।
चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में हुए आधुनिक तकनीकी विकास के चलते अब मरीजों को पुरानी और दर्दनाक सर्जिकल पद्धतियों से मुक्ति मिल रही है। इसी कड़ी में देहरादून स्थित प्रतिष्ठित श्री महंत इंदिरेश अस्पताल ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। अस्पताल में अब अत्याधुनिक “स्कारलेस थायरॉयडेक्टॉमी” (Scarless Thyroidectomy) यानी बिना निशान वाली थायरॉयड सर्जरी की सुविधा नियमित रूप से उपलब्ध है।
क्या है स्कारलेस थायरॉयड सर्जरी?
श्री महंत इंदिरेश अस्पताल के कैंसर विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. पंकज गर्ग ने इस आधुनिक तकनीक पर प्रकाश डालते हुए बताया:”पारंपरिक थायरॉयड ऑपरेशन में मरीज की गर्दन के सामने वाले हिस्से पर एक बड़ा चीरा लगाया जाता था। सर्जरी के बाद यह निशान जीवनभर के लिए गर्दन पर रह जाता था, जिससे कई मरीज (विशेषकर युवा और महिलाएं) मानसिक और सामाजिक रूप से असहज महसूस करते थे। लेकिन अब ‘मिनिमली इनवेसिव थायरॉयड सर्जरी’ (MITS) और एंडोस्कोपिक विधियों की मदद से गर्दन पर बिना कोई चीरा लगाए थायरॉयड की गांठ को सुरक्षित बाहर निकाल लिया जाता है। इसे ही स्कारलेस थायरॉयडेक्टॉमी कहते हैं।”
इस तकनीक में एंडोस्कोप (एक बारीक कैमरा और उपकरण) को मुंह के अंदरूनी हिस्से या बगल (एक्सिला) के रास्ते से गले तक पहुंचाया जाता है। बाहर से कोई चीरा न लगने के कारण गर्दन पूरी तरह साफ और बेदाग रहती है।
सफल परिणाम और सुरक्षा
अस्पताल की हेड-नेक ऑन्को सर्जन डॉ. पल्लवी कौल ने जानकारी दी कि श्री महंत इंदिरेश अस्पताल में इस एडवांस्ड तकनीक से कई मरीजों की सफल सर्जरी की जा चुकी है। उन्होंने कहा:चयनित मरीजों में उत्कृष्ट परिणाम: यह तकनीक हर उस मरीज के लिए वरदान साबित हो रही है जो गर्दन पर दाग नहीं चाहते। डॉक्टरों की टीम जांच के बाद तय करती है कि मरीज इस सर्जरी के लिए उपयुक्त है या नहीं।शुरुआती कैंसर में भी कारगर: यह तकनीक न केवल सामान्य थायरॉयड ग्रंथि की गांठों, बल्कि शुरुआती चरण के थायरॉयड कैंसर और कुछ अन्य विशिष्ट थायरॉयड विकारों में भी अत्यंत सुरक्षित और प्रभावी विकल्प बनकर उभरी है।
बिना निशान वाली सर्जरी के प्रमुख लाभ
पारंपरिक सर्जरी की तुलना में इस आधुनिक एंडोस्कोपिक थायरॉयड सर्जरी के निम्नलिखित बहुआयामी लाभ हैं:कॉस्मेटिक लाभ (कोई निशान नहीं): गर्दन पर एक भी टांका या निशान नहीं आता, जिससे मरीज का आत्मविश्वास बना रहता है।अत्यंत कम दर्द और रक्तस्राव: पारंपरिक सर्जरी के मुकाबले इसमें मांसपेशियों को कम नुकसान पहुंचता है, जिससे दर्द और खून का बहाव ना के बराबर होता है।शीघ्र रिकवरी: मरीज के शरीर पर बड़ा घाव न होने के कारण रिकवरी बहुत तेजी से होती है।अस्पताल में कम समय बिताना: इस सर्जरी के बाद मरीज को अस्पताल में दिनों तक रुकने की आवश्यकता नहीं होती, उसे बहुत जल्द छुट्टी मिल जाती है।जल्दी सामान्य दिनचर्या में वापसी: कम समय में ठीक होने के कारण मरीज अपने काम और सामान्य जीवन में तेजी से लौट सकता है।
लक्षणों को न करें नजरअंदाज: विशेषज्ञों की सलाह
अस्पताल के विशेषज्ञों ने सचेत करते हुए कहा कि थायरॉयड की समस्याओं को कभी भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। यदि किसी व्यक्ति को निम्नलिखित लक्षण महसूस हों, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए:
- गले में किसी भी प्रकार की गांठ या सूजन का दिखना।
- आवाज में अचानक बदलाव आना या भारीपन होना।
- भोजन या पानी निगलने में कठिनाई महसूस होना।
- लंबे समय से चली आ रही थायरॉयड की समस्या या सांस लेने में तकलीफ।
समय पर सही जांच (जैसे अल्ट्रासाउंड या FNAC) और विशेषज्ञ की सलाह से थायरॉयड की अधिकांश बीमारियों और कैंसर का पूरी तरह सफल उपचार संभव है।
मरीजों के लिए प्रतिबद्धता
श्री महंत इंदिरेश अस्पताल के चेयरमैन श्रीमहंत देवेंद्र दास जी ने इस सुविधा की सफलता पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि अस्पताल का हमेशा से यह संकल्प रहा है कि उत्तराखंड और आसपास के राज्यों के मरीजों को देश-दुनिया की सबसे आधुनिक, सुरक्षित और उन्नत सर्जिकल सुविधाएं किफायती दरों पर उपलब्ध कराई जाएं। स्कारलेस थायरॉयड सर्जरी की नियमित शुरुआत इसी प्रतिबद्धता का एक हिस्सा है, जिससे मरीजों को अब बड़े महानगरों की ओर रुख नहीं करना पड़ेगा।
