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अकीदत, एहतराम और कुर्बानी के जज्बे के साथ बहादुरगंज में मनाई गई ईदुल अजहा, मुल्क में अमन-चैन की मांगी दुआ

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अकीदत, एहतराम और कुर्बानी के जज्बे के साथ बहादुरगंज में मनाई गई ईदुल अजहा, मुल्क में अमन-चैन की मांगी दुआ

बहादुरगंज/गाजीपुर।

इस्लाम धर्म का प्रमुख त्योहार ईदुल अजहा (बकरीद) पूरे बहादुरगंज और आसपास के क्षेत्रों में अकीदत, एहतराम, भाईचारे और कुर्बानी के जज्बे के साथ बेहद शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण माहौल में मनाया गया। पर्व को लेकर मुस्लिम समुदाय में सुबह से ही खासा उत्साह देखने को मिला। नए वस्त्र धारण कर बच्चे, युवा और बुजुर्ग सुबह से ही मस्जिदों और ईदगाहों की तरफ बढ़ने लगे, जिससे नमाज स्थलों पर नमाजियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। लोगों ने अल्लाह की बारगाह में सजदा किया और मुल्क में अमन, चैन, तरक्की व खुशहाली के लिए विशेष दुआएं मांगीं।

महान त्याग और समर्पण की याद

​बकरीद का यह मुकद्दस त्योहार हजरत इब्राहीम अलैहिस्सलाम की महान कुर्बानी की याद में मनाया जाता है। इस मौके पर मुस्लिम समाज के लोगों ने अल्लाह की राह में जानवरों की कुर्बानी देकर त्याग, समर्पण और इंसानियत का संदेश दिया। पर्व के मद्देनजर पिछले कई दिनों से बाजारों में विशेष रौनक देखी जा रही थी। कपड़ों, सेवइयों, मसालों और कुर्बानी के जानवरों की खरीदारी के लिए बाजारों में लोगों की भारी भीड़ उमड़ी रही, जिससे स्थानीय व्यापार में भी तेजी देखने को मिली।

प्रमुख मस्जिदों और ईदगाहों में अदा की गई नमाज

​क्षेत्र की प्रमुख मस्जिदों और ईदगाहों में ईदुल अजहा की नमाज निर्धारित समय पर पूरी अकीदत के साथ अदा की गई। नमाज संपन्न कराने में स्थानीय उलेमाओं की मुख्य भूमिका रही:

  • जामा मस्जिद मरकज: मौलाना एखलाक साहब
  • बेलाल मस्जिद ईदगाह: कारी अनवार साहब
  • शाही मस्जिद दक्खिन तरफ़: मौलवी अजीजुल हसन साहब
  • नूरी मस्जिद पठान टोली: मौलाना मोहम्मद शोऐब बरकाती
  • शाही मस्जिद डक़ीनगंज: मौलवी महफुजुर्रहमान
  • मस्जिद खालिद बिन वलीद पुरानीगंज: मौलवी एखलाक साहब
  • रसूलपुर ईदगाह: मौलवी जावेद साहब

​नमाज की संपूर्ति के बाद सभी उलेमाओं ने देश में आपसी भाईचारे और अखंडता को मजबूत करने के लिए सामूहिक दुआ कराई। नमाज खत्म होते ही लोग एक-दूसरे के गले मिले और ‘ईद मुबारक’ कहकर बधाइयों का आदान-प्रदान किया।

कुर्बानी का सिलसिला और सामाजिक संदेश

​नमाज के बाद घरों में कुर्बानी का सिलसिला शुरू हुआ जो देर शाम तक गरिमापूर्ण तरीके से चलता रहा। कस्बे के पेशे इमाम अलहाज मौलाना इनामुल हक कासमी ने इस अवसर पर संदेश देते हुए कहा:​”बकरीद सिर्फ एक रस्म या कुर्बानी का पर्व नहीं है, बल्कि यह इंसानियत, त्याग, भाईचारे और गरीबों की मदद का संदेश देने वाला त्योहार है। हमें त्योहार की खुशियों में गरीब, मजलूम और बेसहारा लोगों को शामिल करना चाहिए और उनकी हर संभव मदद करनी चाहिए।”

 

​उलेमाओं ने लोगों से साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने, सामाजिक सौहार्द बनाए रखने तथा प्रशासन द्वारा जारी गाइडलाइंस का पालन करने की पुरजोर अपील की। इसके तहत लोगों ने जरूरतमंदों और गरीबों में कुर्बानी का गोश्त और अन्य जरूरी सामान वितरित किया।

प्रशासनिक सतर्कता और सफाई व्यवस्था

​पर्व को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए स्थानीय प्रशासन और पुलिस बल पूरी तरह सतर्क नजर आया। संवेदनशील स्थानों पर पुलिस की विशेष निगरानी रही और अधिकारी लगातार गश्त करते रहे। हर प्रमुख नमाज स्थल पर सुरक्षाकर्मी तैनात रहे। प्रशासनिक अधिकारियों ने जनता से अफवाहों पर ध्यान न देने और आपसी भाईचारा बनाए रखने की अपील की।

​इसके साथ ही, नगर पंचायत द्वारा सफाई व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए गए थे। कुर्बानी के बाद निकलने वाले अवशेषों के त्वरित और उचित निस्तारण के लिए विशेष टीमें सक्रिय रहीं ताकि कहीं भी गंदगी न फैले। स्वास्थ्य विभाग की टीम भी किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए अलर्ट मोड पर रही। कुल मिलाकर, बहादुरगंज में ईदुल अजहा का पर्व उल्लास, उत्साह और कौमी एकता के अनूठे रंग में रंगा नजर आया।

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