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राष्ट्र निर्माण और विकसित भारत के संकल्प में हिंदी पत्रकारिता की ऐतिहासिक भूमिका: देहरादून में भव्य संगोष्ठी का आयोजन

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राष्ट्र निर्माण और विकसित भारत के संकल्प में हिंदी पत्रकारिता की ऐतिहासिक भूमिका: देहरादून में भव्य संगोष्ठी का आयोजन

देहरादून, 30 मई।

हिंदी पत्रकारिता दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर राजधानी देहरादून के डालनवाला स्थित ‘रचना संसार सभागार’ में एक भव्य विचारगोष्ठी का आयोजन किया गया। ‘लेखक’ एवं ‘स्पर्श हिमालय विश्वविद्यालय’ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस संगोष्ठी का मुख्य विषय “विकसित भारत के निर्माण में हिंदी पत्रकारिता के 200 वर्ष” रहा। कार्यक्रम में जुटे देश के प्रख्यात शिक्षाविदों, वरिष्ठ पत्रकारों, साहित्यकारों और बुद्धिजीवियों ने स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर आधुनिक भारत के निर्माण, राष्ट्रीय एकता, सामाजिक समरसता और जनजागरण में हिंदी पत्रकारिता के योगदान को अद्वितीय, ऐतिहासिक और अविस्मरणीय बताया।

​पत्रकार का धर्म जनता के विश्वास को बनाए रखना: डॉ. देवेंद्र भसीन

​कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि और राज्यमंत्री डॉ. देवेंद्र भसीन एवं अन्य विशिष्ट महानुभावों के स्वागत के साथ हुआ। संगोष्ठी को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि डॉ. देवेंद्र भसीन ने हिंदी पत्रकारिता की दो शताब्दियों की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और विकास यात्रा पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने समकालीन मीडिया परिदृश्य पर चर्चा करते हुए कहा कि एक पत्रकार का सबसे बड़ा और आदि धर्म जनता के अटूट विश्वास को बनाए रखना है।

​वर्तमान तकनीकी युग का जिक्र करते हुए डॉ. भसीन ने कहा:​”आज के दौर में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे तकनीकी परिवेश में पत्रकारिता के भीतर मौलिकता, सत्यनिष्ठता और मानवीय संवेदनाओं को सुरक्षित रखना सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। हमें तकनीक का लाभ उठाते हुए भी मानवीय मूल्यों को ओझल नहीं होने देना चाहिए।”

 

​राष्ट्रचेतना की संवाहक रही है हिंदी पत्रकारिता: डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’

​सुप्रसिद्ध साहित्यकार, ‘लेखक गांव’ के संरक्षक एवं पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने अपने प्रभावी संबोधन में कहा कि हिंदी पत्रकारिता ने अपनी दो शताब्दियों की गौरवशाली और संघर्षपूर्ण यात्रा में देश के भीतर राष्ट्रचेतना को जागृत करने का महती कार्य किया है। इसने लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ बनाने, सामाजिक सरोकारों को प्रखर स्वर देने तथा जनमानस को अधिकारों व कर्तव्यों के प्रति जागरूक करने में सदैव अग्रणी भूमिका निभाई है।

​डॉ. निशंक ने भविष्य की रूपरेखा रखते हुए कहा कि जब देश ‘विकसित भारत’ के निर्माण के महान संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है, तब पत्रकारिता और मीडिया जगत की जिम्मेदारी पहले की तुलना में कहीं अधिक बढ़ गई है। आज पत्रकारों को राष्ट्र निर्माण के इस यज्ञ में अपनी वैचारिक आहुति देनी होगी।

​हिंदी पत्रकारिता के बिना अधूरी थी राष्ट्र की अवधारणा: योगेश भट्ट

​विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित पूर्व सूचना आयुक्त तथा वरिष्ठ पत्रकार योगेश भट्ट ने हिंदी पत्रकारिता को राष्ट्र निर्माण की असली आधारशिला बताया। उन्होंने रेखांकित किया कि यदि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान और उसके बाद हिंदी पत्रकारिता ने जनजागरण न किया होता, तो राष्ट्र की सांस्कृतिक और भौगोलिक अवधारणा को इतना व्यापक जनसमर्थन और स्वरूप मिलना संभव नहीं था। हिंदी पत्रकारिता ने ही देश के कोने-कोने को एक सूत्र में पिरोने का काम किया।

​वैश्विक पटल पर हिंदी का बढ़ता प्रभाव: जय सिंह रावत

​कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ पत्रकार जय सिंह रावत ने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि आज हिंदी वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान मजबूत कर रही है और विश्व की प्रमुख भाषाओं में अपना विशिष्ट स्थान बना चुकी है। उन्होंने कहा कि समाचार पत्र और विभिन्न मीडिया माध्यम समाज की चेतना के सच्चे वाहक होते हैं। इनके बिना किसी भी आधुनिक, प्रगतिशील और लोकतांत्रिक सभ्यता की कल्पना अधूरी है।

​चुनौतियों और संभावनाओं पर मंथन

​इस वैचारिक गोष्ठी में पत्रकारिता के वर्तमान स्वरूप, साख के संकट और भविष्य की संभावनाओं पर भी गंभीर विमर्श हुआ। इंडिया न्यूज़ के स्टेट हेड संजय श्रीवास्तव, दूरदर्शन के कार्यकारी निदेशक अनिल भारती, वरिष्ठ पत्रकार विपिन कन्याल, जेपी पंवार और सुभाष कुशवाहा सहित कई वक्ताओं ने हिंदी पत्रकारिता के बदलते आयामों पर अपने विचार साझा किए।

​कार्यक्रम का कुशल संचालन आशना कंडियाल नेगी ने किया तथा भव्य संयोजन स्पर्श हिमालय विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग की अध्यक्ष डॉ. पूजा डबास द्वारा किया गया।

​इस गरिमामयी गोष्ठी में सुभाष भट्ट, आशीष नेगी, जगमोहन सिंह मौर्य, सचिन कुमार, भारती आनंद ‘अनंता’, डॉ. निधि उप्रेती, ज़ी न्यूज़ के राम अनुज सहित भारी संख्या में पत्रकार, शिक्षाविद, शोधार्थी, छात्र-छात्राएं और साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।

विश्वसनीयता और निष्पक्षता बनाए रखने का संकल्प:

कार्यक्रम के समापन पर उपस्थित सभी पत्रकारों और बुद्धिजीवियों ने हिंदी पत्रकारिता की समृद्ध और गौरवशाली परंपरा को अक्षुण्ण रखने का संकल्प लिया। वक्ताओं ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि बदलते तकनीकी युग और सोशल मीडिया के दौर में भी पत्रकारिता की मूल आत्मा—यानी उसकी विश्वसनीयता, निष्पक्षता, निर्भीकता और जनसरोकारों के प्रति प्रतिबद्धता—को हर हाल में जीवित रखा जाएगा।

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