लोकतांत्रिक मूल्यों की संवाहक है हिंदी पत्रकारिता: बहादुरगंज में गरिमामयी विचारगोष्ठी का आयोजन
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लोकतांत्रिक मूल्यों की संवाहक है हिंदी पत्रकारिता: बहादुरगंज में गरिमामयी विचारगोष्ठी का आयोजन
बहादुरगंज (गाज़ीपुर)।
हिंदी पत्रकारिता दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर ‘ऑल मीडिया प्रेस क्लब’ गाज़ीपुर के तत्वावधान में एक विशेष विचारगोष्ठी का आयोजन किया गया। बहादुरगंज कस्बे के मध्य स्थित ‘विजयलक्ष्मी आर्किटेक्ट’ परिसर में आयोजित इस संगोष्ठी में जनपद के नामचीन पत्रकारों, साहित्यकारों और प्रबुद्ध नागरिकों ने सहभागिता की। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने हिंदी पत्रकारिता के गौरवशाली इतिहास, समकालीन चुनौतियों, पत्रकारिता के गिरते स्तर और भारतीय लोकतंत्र में सजग प्रहरियों के रूप में पत्रकारों की वास्तविक भूमिका पर अत्यंत गंभीर और सारगर्भित चर्चा की।
इस महत्वपूर्ण गोष्ठी की अध्यक्षता ऑल मीडिया प्रेस क्लब के जिला अध्यक्ष अनिल सिंह ने की, जबकि कार्यक्रम का कुशल और प्रभावी संचालन वरिष्ठ पत्रकार जफर अकील द्वारा किया गया।
निष्पक्षता और सत्यनिष्ठा ही पत्रकारिता की आत्मा: अनिल सिंह
संगोष्ठी को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए जिला अध्यक्ष अनिल सिंह ने हिंदी पत्रकारिता के स्वर्णिम इतिहास को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि देश की आजादी से लेकर आधुनिक समाज के निर्माण तक, हिंदी पत्रकारिता ने हमेशा समाज को सही दिशा दिखाने और जन-जन को जागरूक करने का महान कार्य किया है।
उन्होंने पत्रकारों के सामाजिक दायित्वों पर जोर देते हुए कहा:”पत्रकारिता केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज की सेवा और व्यवस्था को आईना दिखाने का सशक्त माध्यम है। जनसमस्याओं को प्रखरता से उजागर करना और लोकतांत्रिक मूल्यों को अक्षुण्ण रखना ही हमारा मुख्य ध्येय होना चाहिए। आज के दौर में जब सूचनाओं की बाढ़ आई हुई है, तब पत्रकारों को निष्पक्षता, सत्यनिष्ठा और कड़े सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ अपनी लेखनी का संचालन करना होगा।”
आदि पुरुष पंडित जुगल किशोर शुक्ल का पावन स्मरण
गोष्ठी में उपस्थित वक्ताओं ने ३० मई १८२६ को कलकत्ता से प्रकाशित देश के पहले हिंदी साप्ताहिक समाचार पत्र ‘उदन्त मार्तण्ड’ और इसके दूरदर्शी संपादक पंडित जुगल किशोर शुक्ल को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके युगांतरकारी योगदान को याद किया। वक्ताओं ने कहा कि पंडित जुगल किशोर शुक्ल ने विषम परिस्थितियों और कड़े ब्रिटिश सेंसरशिप के दौर में भी हिंदी पत्रकारिता की जो मशाल जलाई थी, उसे आज के पत्रकारों को और अधिक प्रज्वलित करने की आवश्यकता है।
बदलते तकनीकी दौर में विश्वसनीयता की बड़ी चुनौती
बदलते दौर और डिजिटल मीडिया के बढ़ते प्रभाव पर चर्चा करते हुए वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान में सोशल मीडिया और इंटरनेट के कारण समाचारों की गति तो तेज हुई है, लेकिन इसके साथ ही फेक न्यूज और सनसनीखेज पत्रकारिता का खतरा भी बढ़ा है। ऐसे तकनीकी संक्रमण काल में पाठकों और दर्शकों के बीच अपनी साख और विश्वसनीयता बनाए रखना समकालीन पत्रकारों के सामने सबसे बड़ी और गंभीर चुनौती है। इसके लिए हमें पत्रकारिता के बुनियादी नैतिक मूल्यों और सिद्धांतों की रक्षा हर कीमत पर करनी होगी।
राष्ट्र और समाज के विकास की धुरी: संतोष गुप्ता
कार्यक्रम में अपने विचार व्यक्त करते हुए तहसील अध्यक्ष संतोष गुप्ता ने हिंदी पत्रकारिता दिवस की महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि किसी भी सभ्य समाज और मजबूत राष्ट्र के सर्वांगीण विकास में निर्भीक पत्रकारिता की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की आवाज को शासन-प्रशासन तक पहुंचाने के लिए पत्रकारिता को और अधिक जमीनी, धारदार तथा प्रभावी बनाने की महती आवश्यकता है।
वरिष्ठ पत्रकारों एवं गणमान्य जनों की उपस्थिति
इस गरिमामयी संगोष्ठी में क्षेत्र के तमाम प्रबुद्ध जीवियों और मीडियाकर्मियों ने शिरकत की। मुख्य रूप से अशोक राय, उमेश जायसवाल, विमलेश तिवारी, गोलू वर्मा और अर्जुन पाण्डेय सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों से आए पत्रकार, स्वतंत्र लेखक तथा स्थानीय गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी ने एक सुर में पत्रकारिता के गिरते स्तर को बचाने और खोई हुई साख को पुनर्जीवित करने का संकल्प लिया।
शुभकामनाओं के साथ आभार प्रदर्शन:
कार्यक्रम के अंतिम सत्र में उपस्थित सभी पत्रकारों को हिंदी पत्रकारिता दिवस की हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं दी गईं। प्रेस क्लब के पदाधिकारियों ने बहादुरगंज में इस सफल और वैचारिक रूप से समृद्ध आयोजन के लिए आए हुए सभी पत्रकार साथियों, अतिथियों और सम्मानित सदस्यों के प्रति सहृदय आभार एवं धन्यवाद व्यक्त किया
