गाँव-घर महोत्सव: उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति ने गोद लिए गाँव ‘मणिगूह’ में किया दो दिवसीय आयोजन का भव्य उद्घाटन
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गाँव-घर महोत्सव: उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के कुलपति ने गोद लिए गाँव ‘मणिगूह’ में किया दो दिवसीय आयोजन का भव्य उद्घाटन
विशेष रिपोर्ट: सोहन सिंह चमोली
चमोली/कर्णप्रयाग:
उत्तराखंड के दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों तक उच्च शिक्षा की अलख जगाने और ग्रामीण संस्कृति को सहेजने के उद्देश्य से एक अत्यंत महत्वपूर्ण और सराहनीय पहल सामने आई है। उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय (UOU) द्वारा गोद लिए गए आदर्श गाँव ‘मणिगूह’ में दो दिवसीय भव्य ‘गाँव घर महोत्सव’ का शुभारंभ हो गया है। आज, दिनांक 30 मई 2026 को उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति जी ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करते हुए इस अनूठे महोत्सव का विधिवत उद्घाटन किया। इस अवसर पर पूरा मणिगूह गाँव उत्सव के माहौल में सराबोर नजर आया और स्थानीय ग्रामीणों ने पारंपरिक वाद्य यंत्रों व मंगल गीतों के साथ कुलपति महोदय और विश्वविद्यालय के प्रतिनिधिमंडल का जोरदार स्वागत किया।
दूरस्थ क्षेत्रों में उच्च शिक्षा और नए अवसरों का उदय
उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए माननीय कुलपति जी ने उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के मूल उद्देश्यों और इसकी कार्यप्रणाली पर विस्तृत प्रकाश डाला। उन्होंने उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित करते हुए कहा कि उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियां अत्यंत चुनौतीपूर्ण हैं, लेकिन इन चुनौतियों के बीच भी हर युवा और नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुँचाना विश्वविद्यालय का मुख्य ध्येय है।
कुलपति जी ने गर्व के साथ साझा किया कि:”उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय आज राज्य के सबसे दुर्गम और दूरस्थ गाँवों में रहने वाले उन शिक्षार्थियों के लिए उच्च शिक्षा के नए द्वार खोल रहा है, जो किन्हीं कारणों से मुख्यधारा के कॉलेजों तक नहीं पहुँच पाते। विशेषकर पहाड़ों की बेटियों, महिलाओं और कामकाजी युवाओं को घर बैठे ही अपनी पढ़ाई पूरी करने का बेहतरीन अवसर मिल रहा है।”
उन्होंने जोर देकर कहा कि विश्वविद्यालय केवल किताबी ज्ञान देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दूरदराज के क्षेत्रों में सामाजिक-आर्थिक विकास और चेतना का माध्यम भी बन रहा है।
’पुस्तकालय ग्राम’ थीम की विशेष सराहना और प्रेरणा
महोत्सव के दौरान कुलपति जी ने मणिगूह गाँव की अनूठी और अभिनव पहल ‘पुस्तकालय ग्राम थीम’ का बारीकी से निरीक्षण किया। ग्रामीण स्तर पर ज्ञान के प्रसार और अध्ययन की संस्कृति को बढ़ावा देने वाली इस थीम की उन्होंने मुक्तकंठ से सराहना की। कुलपति महोदय ने इस प्रयास को एक पथप्रदर्शक कदम बताते हुए कहा कि हर गाँव में इस तरह की लाइब्रेरी संस्कृति विकसित होनी चाहिए ताकि युवा पीढ़ी सोशल मीडिया के दौर में भी किताबों से जुड़ी रहे। उन्होंने ग्रामीणों और आयोजकों को प्रेरित करते हुए कहा कि इस रचनात्मक पहल को और आगे बढ़ाया जाए तथा इसे और अधिक समृद्ध करने के लिए विश्वविद्यालय स्तर से भी हर संभव सहयोग प्रदान करने का प्रयास किया जाएगा।

रोजगारपरक शिक्षा और युवाओं को प्रोत्साहन
इस सुअवसर पर उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों और अधिकारियों द्वारा ग्रामीणों, विशेषकर युवाओं के साथ पठन-पाठन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की गईं। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय की ओर से चलाए जा रहे विभिन्न व्यावसायिक (Vocational), तकनीकी और रोजगारपरक पाठ्यक्रमों के बारे में विस्तार से बताया गया। युवाओं को प्रेरित किया गया कि वे इन शॉर्ट-टर्म और डिप्लोमा पाठ्यक्रमों का लाभ उठाकर न केवल आत्मनिर्भर बनें, बल्कि स्थानीय स्तर पर ही स्वरोजगार के नए अवसर पैदा कर पहाड़ों से होने वाले पलायन को रोकने में अपनी भूमिका निभाएं। गाँव के युवाओं ने भी विश्वविद्यालय के इन रोजगारोन्मुखी अवसरों को लेकर गहरा उत्साह दिखाया।
विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय केंद्रों की सक्रिय सहभागिता
इस दो दिवसीय महोत्सव को सफल बनाने में उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के क्षेत्रीय कार्यालयों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय प्रशासन का प्रतिनिधित्व करते हुए कर्णप्रयाग क्षेत्रीय केंद्र की सहायक निदेशक श्रीमती प्रियंका लोहनी और पौड़ी क्षेत्रीय केंद्र के सहायक निदेशक श्री पंकज कुमार ने सक्रिय रूप से प्रतिभाग किया। दोनों ही अधिकारियों ने ग्रामीणों के साथ सीधा संवाद स्थापित किया और विश्वविद्यालय की विभिन्न छात्र-हितैषी योजनाओं, प्रवेश प्रक्रिया और डिजिटल शिक्षण सामग्री (E-Learning Resources) के बारे में बहुमूल्य तकनीकी जानकारियां प्रदान कीं।
कुलपति महोदय का सम्मान और आभार प्रदर्शन
मणिगूह को ‘पुस्तकालय ग्राम’ के रूप में स्थापित करने और इस पूरे महोत्सव के मुख्य सूत्रधार एवं आयोजक श्री सुमन मिश्रा तथा श्रीमती बीना मिश्रा रहे, जिनके प्रयासों की सभी ने सराहना की। इस ऐतिहासिक और गौरवमयी क्षण पर कार्यक्रम के आयोजक द्वय श्री सुमन मिश्रा व श्रीमती बीना मिश्रा, स्थानीय ग्राम प्रधान श्री माणिक लाल तथा प्रबुद्ध नागरिक श्री गजेन्द्र रौतेला जी द्वारा माननीय कुलपति महोदय को पारंपरिक शॉल, स्मृति चिह्न और पहाड़ी उत्पाद भेंट कर भावभीना सम्मान किया गया।
ग्राम प्रधान और आयोजकों ने कुलपति जी का विशेष धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा उनके गाँव को गोद लेना और स्वयं कुलपति महोदय का यहाँ पहुँचकर ग्रामीणों का उत्साहवर्धन करना पूरे चमोली जनपद के लिए गर्व की बात है। उन्होंने उम्मीद जताई कि विश्वविद्यालय के मार्गदर्शन में मणिगूह गाँव शिक्षा, साक्षरता और स्वरोजगार के क्षेत्र में पूरे उत्तराखंड के लिए एक ‘मॉडल विलेज’ बनकर उभरेगा। प्रथम दिन के समापन पर स्थानीय लोक कलाकारों द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दी गईं, जिसने समां बांध दिया।
