लखवाड़ बहुउद्देशीय परियोजना क्षेत्र में निषेधाज्ञा लागू: 500 मीटर के दायरे में 5 से अधिक लोगों के जुटने पर रोक, 6 महीने तक रहेगा आदेश प्रभावी
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लखवाड़ बहुउद्देशीय परियोजना क्षेत्र में निषेधाज्ञा लागू: 500 मीटर के दायरे में 5 से अधिक लोगों के जुटने पर रोक, 6 महीने तक रहेगा आदेश प्रभावी
देहरादून (सूचना विभाग): उत्तराखंड की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और महत्वाकांक्षी विकास योजना, ‘लखवाड़ बहुउद्देशीय परियोजना’ क्षेत्र में कानून, शांति एवं सुरक्षा व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन ने एक बड़ा और सख्त कदम उठाया है। कालसी के उप जिला मजिस्ट्रेट (एसडीएम) प्रेम लाल ने परियोजना क्षेत्र और इसके आस-पास के संवेदनशील दायरों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस), 2023 की धारा-163 (जो पूर्व में धारा-144 के रूप में जानी जाती थी) के अंतर्गत तत्काल प्रभाव से निषेधाज्ञा लागू करने के आदेश जारी किए हैं। प्रशासन द्वारा जारी किया गया यह प्रतिबंधात्मक आदेश आज से ही प्रभावी माना जाएगा और आगामी 6 महीने की लंबी अवधि तक पूरी तरह लागू रहेगा।
इस संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए उप जिला मजिस्ट्रेट कालसी ने बताया कि 300 मेगावाट की इस बेहद संवेदनशील और बड़ी जलविद्युत परियोजना के निर्माण कार्यों को बिना किसी बाधा के सुरक्षित माहौल में पूरा करना राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए यह कानूनी सुरक्षा कवच लागू किया गया है।
सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस की खुफिया रिपोर्ट के बाद लिया गया फैसला
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, यह सख्त कदम अचानक नहीं बल्कि सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय पुलिस से प्राप्त गंभीर इनपुट्स और खुफिया रिपोर्टों के आधार पर उठाया गया है। उपमहाप्रबंधक (जनपद-प्रथम) लखवाड़ परियोजना डाकपत्थर तथा प्रभारी निरीक्षक कोतवाली कालसी द्वारा हाल ही में जिला प्रशासन को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपी गई थी।
इस रिपोर्ट में यह स्पष्ट रूप से रेखांकित किया गया था कि कुछ विशिष्ट व्यक्तियों, असामाजिक तत्वों तथा कतिपय संगठनों द्वारा परियोजना क्षेत्र में माहौल बिगाड़ने की कोशिश की जा सकती है। रिपोर्ट में आशंका जताई गई थी कि इन समूहों द्वारा कार्यस्थल पर अनधिकृत रूप से प्रवेश करने, जबरन धरना-प्रदर्शन करने, उग्र जुलूस निकालने, नारेबाजी करने तथा आवागमन के मुख्य मार्गों को अवरुद्ध करने जैसी गतिविधियों को अंजाम दिया जा सकता है। पुलिस और परियोजना अधिकारियों ने अपनी रिपोर्ट में अंदेशा जताया था कि यदि समय रहते कड़े कदम नहीं उठाए गए, तो लोक शांति पूरी तरह भंग हो सकती है, सरकारी काम प्रभावित हो सकता है और यहां तक कि किसी बड़ी जनहानि या हिंसक टकराव की स्थिति भी पैदा हो सकती है। परिस्थितियों की इसी गंभीरता और तात्कालिकता को देखते हुए एसडीएम कालसी ने तुरंत निषेधाज्ञा की घोषणा कर दी।
निषेधाज्ञा के तहत लागू किए गए कड़े प्रतिबंध: क्या खुला रहेगा और क्या बंद?
जिला प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, लखवाड़ बहुउद्देशीय परियोजना के सुचारू संचालन और सुरक्षा के मद्देनजर निम्नलिखित गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है:
500 मीटर की परिधि में जमावड़ा निषेध: लखवाड़ परियोजना के जितने भी सक्रिय कार्यस्थल, निर्माण क्षेत्र या संवेदनशील केंद्र हैं, उनके चारों तरफ 500 मीटर की परिधि (रेडियस) के भीतर पांच या पांच से अधिक व्यक्तियों का एक साथ जमा होना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। विशेषकर तब, जब उनका उद्देश्य किसी भी तरह से कानून व्यवस्था को प्रभावित करना या व्यवधान डालना हो।अनधिकृत प्रवेश पर पूर्ण रोक: परियोजना के मुख्य निर्माण स्थल, प्रशासनिक कार्यालयों, आवासीय परिसरों, टनल क्षेत्रों तथा डंपिंग साइट्स पर बाहरी या अनधिकृत व्यक्तियों का प्रवेश पूरी तरह वर्जित रहेगा। बिना सक्षम अधिकारी की लिखित अनुमति के कोई भी व्यक्ति या समूह इस सीमा में दाखिल नहीं हो सकेगा।धरना-प्रदर्शन और नारेबाजी पर पाबंदी: परियोजना क्षेत्र या उसके आस-पास किसी भी व्यक्ति, संघ या संगठन को बिना पूर्व प्रशासनिक अनुमति के धरना देने, भूख हड़ताल करने, जुलूस निकालने, पुतला फूंकने या लाउडस्पीकर के माध्यम से भड़काऊ नारेबाजी करने की कोई इजाजत नहीं होगी।हथियारों और ज्वलनशील पदार्थों पर रोक: प्रतिबंधित क्षेत्र के भीतर किसी भी प्रकार के घातक हथियार, लाठी, डंडा, तेज धारदार चाकू, भाला या किसी भी प्रकार के ज्वलनशील व विस्फोटक पदार्थ (जैसे पेट्रोल, तेजाब या पटाखे) को साथ लेकर चलना या उनका प्रदर्शन करना दंडनीय अपराध की श्रेणी में आएगा।सरकारी संपत्ति की सुरक्षा: निर्माण कार्य में लगी भारी मशीनरी, डंपर, वाहनों, कंप्यूटर उपकरणों तथा अन्य सभी प्रकार की सरकारी व गैर-सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने या उनके संचालन को रोकने का कोई भी प्रयास करने पर तत्काल गिरफ्तारी की जा सकती है।सोशल मीडिया पर विशेष निगरानी: जिला प्रशासन ने डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर भी शिकंजा कसा है। इंटरनेट, व्हाट्सएप, फेसबुक या अन्य किसी भी सोशल मीडिया माध्यम से परियोजना के संबंध में कोई भी भड़काऊ, आपत्तिजनक, सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील या अफवाह फैलाने वाली सामग्री पोस्ट या शेयर करने पर पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा।स्थानीय ग्रामीणों और किसानों को विशेष रियायतजिला प्रशासन ने इस आदेश में स्थानीय निवासियों की दैनिक जरूरतों का भी पूरा ख्याल रखा है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि परियोजना क्षेत्र के आस-पास रहने वाले मूल ग्रामीणों को अपने घरों तक आने-जाने (आवागमन) तथा अपने खेतों में कृषि संबंधी कार्यों को करने के लिए इस प्रतिबंधित क्षेत्र से शांतिपूर्ण तरीके से गुजरने की पूरी अनुमति रहेगी। हालांकि, इसके लिए शर्त यह होगी कि वे इस दौरान किसी भी प्रकार की भीड़ का हिस्सा नहीं बनेंगे और आदेश की सभी सुरक्षा शर्तों का ईमानदारी से पालन करेंगे। इसके अलावा क्षेत्र में तैनात सुरक्षा बलों, पुलिस कर्मियों और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा समय-समय पर दिए जाने वाले सुरक्षा निर्देशों का पालन करना सभी के लिए अनिवार्य होगा।
अफवाह फैलाने वालों पर होगी सख्त कानूनी कार्रवाई: एसडीएम कालसी
उप जिला मजिस्ट्रेट कालसी प्रेम लाल ने क्षेत्र की आम जनता, स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों और युवाओं से विशेष अपील की है कि वे राष्ट्रहित, जनहित और क्षेत्र के विकास की इस बेहद महत्वपूर्ण परियोजना के सुचारू संचालन में प्रशासन का पूरा सहयोग करें। उन्होंने लोगों से आग्रह किया है कि वे किसी भी असामाजिक तत्व के बहकावे में न आएं और सोशल मीडिया पर चलने वाली किसी भी प्रकार की भ्रामक खबरों या अफवाहों पर आंख मूंदकर विश्वास न करें।
एसडीएम ने कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए स्पष्ट किया है कि यदि किसी भी व्यक्ति या संगठन द्वारा इस निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने का प्रयास किया गया, तो प्रशासन बेहद सख्ती से निपटेगा। आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएसएस), आपदा प्रबंधन अधिनियम तथा अन्य सुसंगत कानूनी व विधिक प्रावधानों के अंतर्गत तत्काल मुकदमा दर्ज कर कठोर दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
राज्य के विकास का मुख्य आधार है लखवाड़ परियोजना
प्रेस नोट के अंत में इस बात पर जोर दिया गया है कि लखवाड़ बहुउद्देशीय परियोजना न केवल देहरादून जनपद बल्कि पूरे उत्तराखंड राज्य के आर्थिक और ढांचागत विकास की दृष्टि से एक अत्यंत दूरगामी और महत्वपूर्ण परियोजना है। इससे राज्य को बड़े पैमाने पर बिजली और पानी की आपूर्ति सुनिश्चित होगी। ऐसे में इस राष्ट्रीय महत्व के निर्माण कार्य को एक सुरक्षित, निर्बाध, भयमुक्त और शांतिपूर्ण वातावरण में समयबद्ध तरीके से संचालित करना जिला प्रशासन की पहली जिम्मेदारी है, और इसी उद्देश्य की संपूर्ति के लिए यह 6 महीने की निषेधाज्ञा लागू की गई है।
