गुरु पूर्णिमा पर श्री दरबार साहिब में उमड़ा आस्था का जनसैलाब, गुरु महिमा के संदेश से भावविभोर हुई संगतें
1 min read



गुरु पूर्णिमा पर श्री दरबार साहिब में उमड़ा आस्था का जनसैलाब, गुरु महिमा के संदेश से भावविभोर हुई संगतें
देहरादून। ऐतिहासिक एवं आध्यात्मिक केंद्र दरबार श्री गुरु राम राय जी महाराज में बुधवार को गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व अपार श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ अत्यंत धूमधाम से मनाया गया। इस पावन अवसर पर सुबह से ही देश-विदेश और भारत के विभिन्न राज्यों से आए श्रद्धालुओं व संगतों का श्री दरबार साहिब परिसर में तांता लगा रहा। पूरे परिसर में भक्ति, सिमरन और दिव्य ऊर्जा का अनुपम वातावरण बना रहा। संगतों ने श्री गुरु राम राय जी महाराज के पावन चरणों में शीश नवाकर अपनी अटूट आस्था अर्पित की और सुख-समृद्धि की कामना की।
श्रीमहंत देवेन्द्र दास जी महाराज ने दिए पावन दर्शन और आशीर्वाद
गुरु पूर्णिमा के इस विशिष्ट अवसर पर दरबार श्री गुरु राम राय जी महाराज के सज्जादे गद्दीनशीन श्रीमहंत देवेन्द्र दास जी महाराज ने विधि-विधान से विशेष पूजा-अर्चना एवं अरदास संपन्न की। महाराज जी ने श्री गुरु राम राय जी महाराज का भावपूर्ण स्मरण करते हुए संगतों को अपने पावन दर्शन दिए और सभी के कल्याण एवं मंगल की कामना की।
दूर-दराज से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने श्री दरबार साहिब में मत्था टेका और पवित्र श्री झंडे जी के समक्ष नतमस्तक होकर आशीर्वाद प्राप्त किया। परिसर में दिनभर चले भजन-कीर्तन, अरदास और गुरु-स्मरण ने वातावरण को पूर्णतः आध्यात्मिक रस में सराबोर कर दिया।
गुरु का सानिध्य ही जीवन को सत्य और सेवा के मार्ग पर ले जाता है: श्रीमहंत देवेन्द्र दास जी
संगतों को संबोधित करते हुए श्रीमहंत देवेन्द्र दास जी महाराज ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में श्री गुरु राम राय जी महाराज और ब्रह्मलीन गुरु श्रीमहंत इन्दिरेश चरण दास जी महाराज का श्रद्धापूर्वक स्मरण किया। उन्होंने गुरु की असीम महिमा पर प्रकाश डालते हुए कहा”गुरु केवल ज्ञान देने वाले शिक्षक नहीं हैं, बल्कि वे आत्मा को सत्य, सेवा, करुणा और धर्म के पथ पर अग्रसर करने वाले दिव्य प्रकाश हैं। गुरु का सानिध्य मनुष्य के जीवन को संस्कार, सदाचार और आत्मविश्वास से आलोकित करता है।”
उन्होंने आगे जोर देकर कहा कि गुरु पूर्णिमा केवल पूजन या कर्मकांड का पर्व नहीं है, बल्कि यह गुरु के आदर्शों को अपने व्यावहारिक जीवन में उतारने, विनम्रता अपनाने और मानवता के मूल्यों को आत्मसात करने का संकल्प लेने का अवसर है। जब कोई शिष्य गुरु के बताए मार्ग पर श्रद्धा, समर्पण और निष्ठा के साथ चलता है, तभी उसका जीवन सही अर्थों में सफल और सार्थक बनता है।
समाज और राष्ट्र कल्याण के लिए गुरु वचनों का पालन आवश्यक
वर्तमान वैश्विक और सामाजिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए श्री महाराज जी ने कहा कि आज के समय में समाज को प्रेम, आपसी सद्भाव, संयम और आध्यात्मिक चेतना की सर्वाधिक आवश्यकता है। गुरु की शिक्षाएं मनुष्य को न केवल स्वयं को बेहतर बनाने का मार्ग दिखाती हैं, बल्कि समाज और राष्ट्र के कल्याण के लिए एक समर्पित जीवन जीने की प्रेरणा भी देती हैं।
उन्होंने उपस्थित सभी श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे गुरु के पावन वचनों को केवल सुनें नहीं, बल्कि उन्हें अपने आचरण में उतारें। उन्होंने सभी से सेवा, परोपकार और मानवीय मूल्यों के संवर्धन के लिए निरंतर कार्य करने का संकल्प लेने का आग्रह किया।
भव्य लंगर प्रसाद में हज़ारों ने ग्रहण किया प्रसाद
धार्मिक अनुष्ठानों और अरदास के उपरांत श्री दरबार साहिब प्रबंधन की ओर से विशेष विशाल लंगर प्रसाद की व्यवस्था की गई। इस पावन लंगर में ऊंच-नीच और जाति-पात का भेद मिटाकर हजारों श्रद्धालुओं ने एक साथ बैठकर श्रद्धापूर्वक प्रसाद ग्रहण किया और गुरु कृपा का पुण्य लाभ अर्जित किया। आयोजन के समापन तक श्री दरबार साहिब का पूरा वातावरण “सतनाम श्री वाहेगुरु” और गुरु महिमा के जयकारों से गुंजायमान रहा।
