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सनातन परंपरा का संगम: गोमुख से पशुपतिनाथ तक की पावन यात्रा, देहरादून में हुआ गंगाजल कलश का भव्य स्वागत

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सनातन परंपरा का संगम: गोमुख से पशुपतिनाथ तक की पावन यात्रा, देहरादून में हुआ गंगाजल कलश का भव्य स्वागत

देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और 10 पीढ़ियों से चली आ रही अटूट आस्था का एक अनुपम दृश्य आज राजधानी देहरादून में देखने को मिला। गोमुख से लाया गया माँ गंगा का पवित्र जल, जो आगामी महाशिवरात्रि पर नेपाल स्थित भगवान पशुपतिनाथ के जलाभिषेक के लिए समर्पित होना है, आज देहरादून पहुँचा।

सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण

​महाराज जी का स्वागत करते हुए प्रताप सिंह पवार ने कहा कि गोमुख से गंगाजल लेकर पशुपतिनाथ तक जाने की यह परंपरा अद्भुत और वंदनीय है। उन्होंने जोर देते हुए कहा, “यह परंपरा हमारी समृद्ध भारतीय संस्कृति का जीवंत प्रमाण है। भारतीय संस्कृति और हमारी सनातन परंपराएं ही पूरे विश्व में भारत को एक विशिष्ट और नई पहचान देती हैं।”

​इस दिव्य परंपरा के वाहक “जय दुर्गे पशुपति गुरुजी महाराज श्री महेंद्र प्रसाद जी” स्वयं गोमुख से गंगाजल का कलश लेकर देहरादून स्थित [यहाँ नाम जोड़ें, उदा. एक स्थानीय भक्त/विशिष्ट व्यक्ति] के निवास पर पधारे। इस दौरान पूरा वातावरण ‘हर-हर महादेव’ और ‘जय माँ गंगे’ के जयघोष से गुंजायमान हो उठा।

10 पीढ़ियों से जारी है यह दिव्य अनुष्ठान

​यह कोई सामान्य यात्रा नहीं, बल्कि एक सदियों पुरानी आध्यात्मिक कड़ी है। बीते 10 दशकों से भी अधिक समय से यह परंपरा निर्बाध रूप से चली आ रही है। प्रतिवर्ष गोमुख की दुर्गम ऊंचाइयों से शुद्ध गंगाजल भरकर लाया जाता है, जिसे पैदल और विभिन्न पड़ावों से होते हुए नेपाल के काठमांडू स्थित विश्व प्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर ले जाया जाता है। महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर इसी पवित्र जल से भगवान शिव का जलाभिषेक संपन्न होता है।

सांस्कृतिक एकता और सनातन धर्म का प्रतीक

​गुरुजी महाराज श्री महेंद्र प्रसाद जी का स्वागत करते हुए परिजनों ने इसे जीवन का सबसे सौभाग्यपूर्ण क्षण बताया। उन्होंने कहा, “महाराज जी का हमारे घर पधारना और माँ गंगा के इस पावन कलश के दर्शन प्राप्त होना हमारे लिए केवल व्यक्तिगत हर्ष का विषय नहीं है, बल्कि यह हमारी सनातन परंपराओं के प्रति अटूट विश्वास का प्रतीक है। यह यात्रा भारत और नेपाल के बीच सांस्कृतिक सेतु का कार्य भी करती है।”

पशुपतिनाथ के लिए प्रस्थान और जनकल्याण की कामना

​देहरादून में भक्तों को आशीर्वाद देने के पश्चात महाराज जी अपने अगले गंतव्य पशुपतिनाथ मंदिर, काठमांडू के लिए प्रस्थान कर गए। वहां महाशिवरात्रि के दिन विशेष पूजा-अर्चना और जलाभिषेक किया जाएगा। गुरुजी महाराज ने इस अवसर पर विश्व शांति और प्रदेश की खुशहाली की कामना की।

​वहीं, मेजबान परिवार ने भगवान पशुपतिनाथ और माँ गंगा से प्रार्थना करते हुए कहा कि उत्तराखंड प्रदेश निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर रहे और सभी प्रदेशवासियों को सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और खुशहाली प्राप्त हो। यह आयोजन समाज में धर्म, संस्कृति और दायित्व बोध को सुदृढ़ करने वाला सिद्ध हुआ।

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