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संस्कृत से IAS तक का सफर और मंत्र चिकित्सा पर शोध: सचिव दीपक कुमार ने ऋषिकुलम गुरुकुल में जांची प्राचीन विधाओं की शक्ति

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संस्कृत से IAS तक का सफर और मंत्र चिकित्सा पर शोध: सचिव दीपक कुमार ने ऋषिकुलम गुरुकुल में जांची प्राचीन विधाओं की शक्ति

गुरुग्राम/देहरादून, 08 फरवरी 2026। उत्तराखण्ड सरकार के सचिव (संस्कृत शिक्षा, जनगणना एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन) श्री दीपक कुमार ने आज गुरुग्राम स्थित ऋषिकुलम गुरुकुल विद्यापीठ का भ्रमण कर भारतीय ज्ञान परंपरा के आधुनिक स्वरूप का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने न केवल छात्रों की अद्भुत प्रतिभा को सराहा, बल्कि संस्कृत भाषा को ‘रोजगार और गवर्नेंस’ की मुख्यधारा से जोड़ने का रोडमैप भी प्रस्तुत किया।

प्राचीन विधाओं का जीवंत प्रदर्शन

​गुरुकुल पहुंचने पर छात्रों ने अपनी विधाओं का प्रभावशाली प्रदर्शन कर सचिव को अचंभित कर दिया। छात्रों द्वारा प्रस्तुत ‘प्रज्ञा चक्षु’ (बंद आंखों से पढ़ने की कला), मलखंब, शुद्ध मंत्रोच्चारण और स्पर्श चिकित्सा की पवित्र परंपराओं ने यह सिद्ध किया कि प्राचीन विद्याएं आज भी उतनी ही वैज्ञानिक और प्रासंगिक हैं। सचिव ने इन दुर्लभ विधाओं के संरक्षण और इन्हें पूरे भारतवर्ष में एक अभियान के रूप में बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।

IAS बनने का मंत्र और वैश्विक रोजगार की राह

​सचिव दीपक कुमार ने छात्रों के साथ एक विशेष सत्र आयोजित किया, जिसमें उन्होंने छात्रों की शंकाओं का समाधान करते हुए बताया कि संस्कृत विषय के साथ IAS अधिकारी कैसे बना जा सकता है। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए छात्रों को प्रेरित किया कि वे संस्कृत को केवल पूजा-पाठ की भाषा न समझें, बल्कि इसे सिविल सेवा और उच्च प्रशासन का माध्यम बनाएं।

​उन्होंने छात्रों को अपनी विधाओं को इस स्तर तक निखारने के लिए प्रेरित किया कि वे केवल भारत ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी योग, आयुर्वेद और मंत्र विज्ञान के माध्यम से सम्मानजनक रोजगार प्राप्त कर सकें।

मंत्र चिकित्सा और MOU की पहल

​सचिव ने गुरुकुल के आचार्यों को ‘मंत्र चिकित्सा’ जैसे गूढ़ विषयों पर वैज्ञानिक शोध (Research) करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि जब तक हम अपने शास्त्रों के ज्ञान को शोध के माध्यम से सिद्ध नहीं करेंगे, तब तक विश्व इसे स्वीकार नहीं करेगा।

इस दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए श्री दीपक कुमार ने उत्तराखण्ड संस्कृत विश्वविद्यालय एवं संस्कृत संस्थानम के साथ ऋषिकुलम गुरुकुल के MOU (समझौता ज्ञापन) पर चर्चा की, ताकि इन विधाओं का आदान-प्रदान और अकादमिक विस्तार हो सके।

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