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सहारा इंडिया को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका: ‘सहारा शहर’ की लीज रद्द करने के यूपी सरकार के फैसले पर मुहर, याचिका खारिज

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सहारा इंडिया को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका: ‘सहारा शहर’ की लीज रद्द करने के यूपी सरकार के फैसले पर मुहर, याचिका खारिज

नई दिल्ली/लखनऊ: सहारा इंडिया समूह को देश की सर्वोच्च अदालत से एक और करारा झटका लगा है। माननीय सुप्रीम कोर्ट ने लखनऊ स्थित ‘सहारा शहर’ की लीज रद्द करने के उत्तर प्रदेश सरकार के फैसले के खिलाफ दायर सहारा समूह की याचिका को खारिज कर दिया है। इस फैसले के साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सहारा शहर को अपने कब्जे में लेने की प्रक्रिया पर कानूनी तौर पर मुहर लग गई है।

​न्यायालय के इस कड़े रुख के बाद अब लखनऊ के गोमती नगर स्थित करोड़ों की बेशकीमती जमीन और उस पर बने आलीशान परिसर पर राज्य सरकार का पूर्ण स्वामित्व स्थापित हो गया है।

क्या है पूरा मामला?

​लखनऊ के पॉश इलाके गोमती नगर में स्थित ‘सहारा शहर’ पिछले कई दशकों से सहारा समूह का मुख्यालय और विलासिता का प्रतीक रहा है। हाल ही में उत्तर प्रदेश सरकार ने लीज की शर्तों के उल्लंघन, भूमि उपयोग के नियमों की अनदेखी और बकाया भुगतान से जुड़ी विसंगतियों को आधार बनाकर सहारा शहर की लीज को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया था।

​सरकार के इस आदेश के बाद जिला प्रशासन और लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पूरे परिसर को अपने कब्जे में ले लिया था। सहारा समूह ने राज्य सरकार की इस कार्रवाई को ‘असंवैधानिक’ और ‘एकतरफा’ बताते हुए इसके खिलाफ माननीय सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका में क्या पाया?

​याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सहारा समूह की दलीलों को अपर्याप्त माना। अदालत ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक संपत्तियों के प्रबंधन और लीज नियमों के उल्लंघन के मामलों में राज्य सरकार को दंडात्मक कार्रवाई करने का पूरा अधिकार है।

  • दस्तावेजों का अभाव: सूत्रों के अनुसार, सहारा समूह लीज की शर्तों के पालन से जुड़े ठोस सबूत पेश करने में विफल रहा।
  • सरकार का पक्ष: उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश वकीलों ने तर्क दिया कि सहारा शहर की जमीन का आवंटन जिस उद्देश्य के लिए किया गया था, उसका उल्लंघन हुआ है और बार-बार नोटिस दिए जाने के बावजूद समूह ने सुधार नहीं किया।

‘सहारा शहर’ की वर्तमान स्थिति और भविष्य

​सुप्रीम कोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद अब सहारा शहर के द्वार पर लगा सरकारी ताला और भी मजबूत हो गया है।

  1. प्रशासनिक कब्जा: लखनऊ प्रशासन ने पहले ही परिसर के सभी प्रवेश द्वारों को सील कर दिया है और वहां पीएसी (PAC) के जवानों की तैनाती कर दी गई है।
  2. सरकारी योजना: अब चर्चा है कि उत्तर प्रदेश सरकार इस विशाल भूखंड का उपयोग किसी बड़े सार्वजनिक प्रोजेक्ट, पार्क या महत्वपूर्ण सरकारी कार्यालय के विस्तार के लिए कर सकती है।
  3. संपत्तियों की नीलामी: कयास यह भी लगाए जा रहे हैं कि सहारा के निवेशकों का पैसा लौटाने की प्रक्रिया के तहत सरकार इन संपत्तियों का मूल्यांकन कर भविष्य की रणनीति तैयार कर सकती है।

सहारा समूह की लगातार बढ़ती मुश्किलें

​संस्थापक सुब्रत राय के निधन के बाद से सहारा इंडिया समूह चौतरफा संकट से घिरा हुआ है। सेबी (SEBI) के साथ चल रही अरबों रुपये की कानूनी जंग और अब प्रमुख संपत्तियों का हाथ से निकलना समूह के अस्तित्व के लिए बड़ा खतरा बन गया है। सुप्रीम कोर्ट का यह ताजा फैसला निवेशकों के बीच भी चिंता का विषय है, जो लंबे समय से अपने पैसे वापस मिलने का इंतजार कर रहे हैं।

 एक युग का अंत

​किसी समय लखनऊ की राजनीति और ग्लैमर का केंद्र रहा ‘सहारा शहर’ अब सरकारी फाइलों का हिस्सा बन चुका है। सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि कानून और अनुबंध की शर्तों से ऊपर कोई भी कॉर्पोरेट घराना नहीं है।

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