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लखनऊ की ‘सारा’ ने पेश की मिसाल, न सुन सकती है न बोल सकती है, फिर भी ISC में गाड़े झंडे

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लखनऊ की ‘सारा’ ने पेश की मिसाल, न सुन सकती है न बोल सकती है, फिर भी ISC में गाड़े झंडे

लखनऊ। “मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं, जिनके सपनों में जान होती है, पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है।” इन पंक्तियों को अक्षरशः सच कर दिखाया है लखनऊ की होनहार छात्रा सारा ने। आईएससी (ISC) बोर्ड के परीक्षा परिणामों में सारा ने 98.70 प्रतिशत अंक हासिल कर न केवल अपने माता-पिता का सिर गर्व से ऊंचा किया है, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए एक मिसाल पेश की है।

शारीरिक बाधाओं को बनाया ताकत

​सारा की यह सफलता इसलिए असाधारण है क्योंकि वह सुन और बोल नहीं सकती हैं। कुदरत की इस चुनौती को सारा ने कभी अपनी पढ़ाई के आड़े नहीं आने दिया। लखनऊ के क्राइस्ट चर्च कॉलेज की 12वीं की छात्रा सारा ने अपनी मेहनत और लगन से यह साबित कर दिया कि अगर मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो दुनिया की कोई भी बाधा आपको रोक नहीं सकती।

लक्ष्य: देश की सेवा और IAS बनने का सपना

​इस शानदार उपलब्धि के बाद सारा और उनका परिवार बेहद खुश है। सारा का लक्ष्य अब बहुत स्पष्ट है—वह IAS अधिकारी बनना चाहती हैं। वह समाज में उन लोगों के लिए काम करना चाहती हैं, जो किसी न किसी रूप में चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। सारा की माँ और उनके अध्यापकों का कहना है कि सारा ने कभी भी अपनी अक्षमता को खुद पर हावी नहीं होने दिया और हमेशा एक सामान्य छात्र से कहीं अधिक मेहनत की।

सफलता के मूल मंत्र: अनुशासन और फोकस

​सारा की इस उपलब्धि के पीछे उनके द्वारा अपनाए गए कुछ कड़े नियम और अनुशासन हैं, जो आज के युवाओं के लिए सबक हैं:​नियमित पढ़ाई: लक्ष्य को निर्धारित कर नियमबद्ध तरीके से अध्ययन करना।​अनुशासन: समय प्रबंधन और एकाग्रता के साथ अपनी तैयारी को अंजाम देना।​गुरुओं और अभिभावकों का मार्गदर्शन: शिक्षकों की राय और माता-पिता के सहयोग को अपनी सफलता का आधार बनाना।​अडिग फोकस: अपनी शारीरिक कमियों के बजाय केवल अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करना।

शिक्षकों और परिवार में खुशी की लहर

​क्राइस्ट चर्च कॉलेज के शिक्षकों के लिए भी यह भावुक क्षण है। उनका कहना है कि सारा की खामोशी में भी एक जबरदस्त संकल्प छिपा था। आज सारा की माँ की आंखों में खुशी के आंसू हैं, जो उनकी बेटी के संघर्ष और आज की जीत की कहानी बयां कर रहे हैं।

सारा की यह कहानी हमें सिखाती है कि बाधाएं हमारे रास्ते में नहीं, बल्कि हमारे दिमाग में होती हैं। अगर इंसान में अटूट लगन हो, तो वह इतिहास लिख सकता है। सारा को उनकी इस शानदार सफलता और भविष्य के उज्ज्वल सपनों के लिए ढेरों शुभकामनाएं।

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