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आरडीएसएस परियोजनाओं में शिथिलता कतई स्वीकार्य नहीं, नवंबर तक पूरे करें लॉस रिडक्शन के कार्य: पी.सी. ध्यानी

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आरडीएसएस परियोजनाओं में शिथिलता कतई स्वीकार्य नहीं, नवंबर तक पूरे करें लॉस रिडक्शन के कार्य: पी.सी. ध्यानी

देहरादून। उत्तराखण्ड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) के प्रबंध निदेशक श्री पी.सी. ध्यानी ने भारत सरकार की महत्वाकांक्षी रिवैम्प्ड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (RDSS) के तहत चल रहे कार्यों को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। सोमवार को यूपीसीएल मुख्यालय में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में उन्होंने स्पष्ट किया कि आरडीएसएस परियोजनाओं की प्रगति में किसी भी प्रकार की लापरवाही या शिथिलता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बैठक में परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति, समय-सीमा, कार्य की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों की बारीकी से समीक्षा की गई।

​स्मार्ट मीटरिंग और लॉस रिडक्शन कार्यों पर कड़े निर्देश

​प्रबंध निदेशक ने प्रदेश में चल रही स्मार्ट मीटरिंग परियोजना की प्रगति की गहन समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने परियोजना क्रियान्वयन एजेंसियों, मैसर्स अडानी और मैसर्स जीनस के कार्यों का मूल्यांकन किया।  ध्यानी ने दोनों एजेंसियों को फटकार लगाते हुए निर्देश दिए कि कार्यों की गति को तत्काल बढ़ाया जाए और सभी कार्यों को तय समय-सीमा के भीतर पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि स्मार्ट मीटरिंग राज्य के विद्युत वितरण तंत्र के आधुनिकीकरण और उपभोक्ता सेवाओं को उत्कृष्ट बनाने के लिए बेहद जरूरी है, इसलिए इसमें अनावश्यक देरी बिल्कुल नहीं होनी चाहिए।

​इसके साथ ही, राज्य के सभी 13 जिलों में आरडीएसएस के तहत चल रहे लॉस रिडक्शन (विद्युत हानि कम करने) के कार्यों की भी जिलेवार समीक्षा की गई। प्रबंध निदेशक ने क्षेत्रीय और परियोजना अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि वे जमीनी स्तर पर कार्यों की नियमित निगरानी करें। उन्होंने सभी स्वीकृत कार्यों को नवंबर 2026 तक हर हाल में पूरा करने की समय-सीमा तय की, ताकि राज्य में विद्युत हानियों को कम करने के लक्ष्य को समय पर हासिल किया जा सके।

​सीमांत क्षेत्रों और ऋषिकेश अंडरग्राउंडिंग प्रोजेक्ट पर फोकस

​बैठक में बॉर्डर आउट पोस्ट (BOP) और वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम (VVP) के तहत सीमावर्ती क्षेत्रों में चल रहे बुनियादी ढांचा कार्यों की भी समीक्षा की गई। श्री ध्यानी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि देश के सीमांत और सुदूरवर्ती क्षेत्रों में चल रही इन परियोजनाओं का क्रियान्वयन बेहद प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण होना चाहिए। इससे सीमावर्ती गांवों में रहने वाले नागरिकों को विश्वसनीय, निर्बाध और सुदृढ़ बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी।

​वहीं, दूसरी ओर ऋषिकेश अंडरग्राउंडिंग परियोजना की समीक्षा करते हुए प्रबंध निदेशक ने संबंधित अधिकारियों और कार्यदायी संस्था को इस प्रोजेक्ट को दिसंबर 2026 तक अनिवार्य रूप से पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऋषिकेश में बिजली की लाइनों को भूमिगत करने से न केवल तकनीकी दिक्कतों और ट्रिपिंग में कमी आएगी, बल्कि पर्यटन नगरी की शहरी विद्युत अवसंरचना अत्यधिक मजबूत और सुरक्षित बनेगी।

​गुणवत्ता और सुरक्षा से नहीं होगा कोई समझौता

​प्रबंध निदेशक  पी.सी. ध्यानी ने दो टूक शब्दों में कहा:​”परियोजनाओं के कार्यों की गुणवत्ता से किसी भी स्तर पर समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। निर्माण कार्यों में सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।”

 

​उन्होंने सभी कार्यदायी संस्थाओं को चेताया कि प्रत्येक कार्य निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप और पूरी सुरक्षा सावधानियों का पालन करते हुए ही किया जाए। उन्होंने याद दिलाया कि आरडीएसएस केंद्र सरकार की एक बेहद महत्वपूर्ण योजना है, जो उत्तराखण्ड के बिजली नेटवर्क को भविष्य की ऊर्जा आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार कर रही है। उन्होंने सभी अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ काम करने को कहा।

​बैठक में यह रहे उपस्थित

​इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में यूपीसीएल के निदेशक (वित्त), अधिशासी निदेशक (तकनीकी), मुख्य अभियन्ता (परियोजना), अधीक्षण अभियन्ता कारपोरेट (अनुबन्ध एवं क्रय-प्रथम), अधिशासी अभियन्ता (सम्बद्ध) प्रबंध निदेशक सहित कई उच्चाधिकारी व्यक्तिगत रूप से मौजूद रहे। इसके अलावा राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में तैनात क्षेत्रीय इकाइयों के अधिकारियों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के माध्यम से बैठक में प्रतिभाग किया और अपने क्षेत्रों की प्रगति रिपोर्ट साझा की

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