AI वार: पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भाजपा के खिलाफ खोला मोर्चा, फर्जी वीडियो मामले में दर्ज होगी FIR
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AI वार: पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भाजपा के खिलाफ खोला मोर्चा, फर्जी वीडियो मामले में दर्ज होगी FIR
उत्तराखंड की राजनीति में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दुरुपयोग को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के दिग्गज नेता हरीश रावत ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर उनकी छवि धूमिल करने के लिए ‘एआई जनरेटेड’ फर्जी वीडियो का इस्तेमाल करने का गंभीर आरोप लगाया है। रावत ने स्पष्ट किया है कि वे इस मामले में चुप नहीं बैठेंगे और जल्द ही संबंधित थाने में मुकदमा दर्ज कराएंगे।
क्या है पूरा मामला?
मामले की शुरुआत तब हुई जब भाजपा ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से एक वीडियो पोस्ट किया। हरीश रावत का दावा है कि यह वीडियो पूरी तरह से AI द्वारा निर्मित (Deepfake) है, जिसमें उनके चेहरे और आवाज का गलत तरीके से इस्तेमाल कर उन्हें नकारात्मक रूप में दिखाया गया है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक का ऐसा अनैतिक उपयोग लोकतंत्र के लिए खतरा है और यह सीधे तौर पर उनकी दशकों की राजनीतिक शुचिता पर हमला है।
“विरोध करना क्या देशद्रोह है?”
मीडिया से बात करते हुए हरीश रावत भाजपा पर जमकर बरसे। उन्होंने सत्तापक्ष पर तीखा हमला करते हुए कहा, “आज के दौर में भाजपा का विरोध करना देशद्रोह के समान घोषित कर दिया गया है। जो भी उनकी गलत नीतियों के खिलाफ आवाज उठाता है, उसे देशद्रोही करार दे दिया जाता है।” उन्होंने सवाल उठाया कि क्या एक लोकतांत्रिक देश में विपक्ष को सरकार की आलोचना करने का अधिकार नहीं है?
रावत ने आरोप लगाया कि भाजपा मुद्दों पर आधारित राजनीति करने के बजाय अब तकनीकी धोखाधड़ी का सहारा लेकर विपक्षी नेताओं के चरित्र हनन पर उतर आई है।
सड़कों पर उतरेगी कांग्रेस: न्याय यात्रा का ऐलान
इस तकनीकी हमले का जवाब देने के लिए हरीश रावत ने एक व्यापक रणनीति तैयार की है:
- भाजपा दफ्तर का घेराव: रावत ने घोषणा की है कि वे इस मुद्दे को लेकर व्यक्तिगत रूप से भाजपा मुख्यालय जाएंगे और वहां अपना कड़ा विरोध दर्ज कराएंगे।
- न्याय यात्रा: जनता के बीच अपनी बात ले जाने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री ने 26 जनवरी 2026 के बाद एक विशाल ‘न्याय यात्रा’ निकालने का ऐलान किया है। इस यात्रा के जरिए वे प्रदेश भर में घूमकर भाजपा की ‘प्रोपेगेंडा मशीनरी’ का पर्दाफाश करने का प्रयास करेंगे।
विशेषज्ञों की राय और कानूनी पहलू
साइबर विशेषज्ञों का मानना है कि चुनाव और राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के दौरान AI का ऐसा उपयोग ‘सूचना युद्ध’ (Information Warfare) का हिस्सा है। आईटी एक्ट के तहत किसी की पहचान चोरी करना या फर्जी डिजिटल कंटेंट के जरिए मानहानि करना दंडनीय अपराध है। यदि पुलिस जांच में वीडियो के फेक होने की पुष्टि होती है, तो संबंधित सोशल मीडिया संचालकों पर कड़ी कार्रवाई हो सकती है।
फिलहाल, इस विवाद ने उत्तराखंड की सियासत में उबाल ला दिया है। देखना होगा कि भाजपा इस तकनीकी आरोप पर क्या सफाई पेश करती है और पुलिस प्रशासन इस हाई-प्रोफाइल मामले में क्या कदम उठाता है।
