रानी पेंशन बहाली को लेकर प्राथमिक शिक्षकों ने भरी हुंकार, विधायक खजान दास को सौंपा ज्ञापन
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रानी पेंशन बहाली को लेकर प्राथमिक शिक्षकों ने भरी हुंकार, विधायक खजान दास को सौंपा ज्ञापन
देहरादून: 07 जनवरी, 2026
उत्तराखंड के प्राथमिक शिक्षकों ने अपनी लंबे समय से लंबित पुरानी पेंशन योजना (OPS) की मांग को लेकर एक बार फिर मोर्चा खोल दिया है। बुधवार को शिक्षकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने राजपुर (देहरादून) क्षेत्र के विधायक श्री खजान दास से मुलाकात की और उन्हें एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन के माध्यम से शिक्षकों ने मांग की है कि उत्तराखंड सरकार भी केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार की तर्ज पर शिक्षकों के हितों का ध्यान रखते हुए उन्हें पुरानी पेंशन का लाभ प्रदान करे।
क्या है मुख्य विवाद और मांग?
शिक्षकों के अनुसार, उत्तराखंड में नई पेंशन योजना (NPS) की अधिसूचना 25 अक्टूबर, 2005 को जारी की गई थी। वर्तमान में सरकार केवल उन्हीं कर्मचारियों को पुरानी पेंशन का लाभ दे रही है जिनकी नियुक्ति इस तिथि से पूर्व हुई थी।
शिक्षकों की मुख्य मांग यह है कि पेंशन का निर्धारण ‘नियुक्ति तिथि’ के बजाय ‘विज्ञप्ति तिथि’ (Date of Advertisement) के आधार पर होना चाहिए। उनका तर्क है कि जिन पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया या विज्ञप्ति 25 अक्टूबर, 2005 से पहले शुरू हो गई थी, उन पर नियुक्त होने वाले समस्त शिक्षकों को पुरानी पेंशन योजना में सम्मिलित किया जाना चाहिए।
केंद्र और अन्य राज्यों के नियमों का दिया हवाला
ज्ञापन में शिक्षकों ने केंद्र सरकार द्वारा 3 मार्च, 2023 को जारी किए गए ऐतिहासिक आदेश का प्रमुखता से उल्लेख किया है। इस आदेश में केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया था कि यदि किसी पद की विज्ञप्ति NPS अधिसूचना से पहले की है, तो उस पर नियुक्त कर्मचारी पुरानी पेंशन का विकल्प चुन सकता है।
शिक्षकों ने यह भी बताया कि:
- उत्तर प्रदेश सरकार ने भी केंद्र के इसी फॉर्मूले को अपनाते हुए अपने कर्मचारियों को राहत प्रदान की है।
- उत्तराखंड शासन ने 7 नवंबर, 2023 को एक शासनादेश जारी कर केंद्र के नियमों को अपनाने की बात कही थी, लेकिन धरातल पर अब भी कई शिक्षक इस लाभ से वंचित हैं।
- वर्तमान में वित्त विभाग द्वारा केवल 1 अक्टूबर, 2005 से पूर्व नियुक्त कर्मियों को ही लाभ दिया जा रहा है, जिससे उन शिक्षकों में भारी रोष है जिनकी भर्ती प्रक्रिया पहले शुरू हुई थी लेकिन नियुक्ति में तकनीकी कारणों से देरी हुई।
विधायक खजान दास ने शिक्षकों की मांगों को ध्यानपूर्वक सुना और आश्वासन दिया कि वह इस गंभीर विषय को मुख्यमंत्री और संबंधित विभाग के समक्ष प्रभावी ढंग से रखेंगे। शिक्षकों का कहना है कि यदि उनकी जायज मांगें नहीं मानी गईं, तो वे अपने भविष्य की सुरक्षा के लिए आंदोलन को और तेज करने के लिए विवश होंगे।
