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UP LPG Raid: एलपीजी कालाबाजारी पर योगी सरकार का हंटर, 17 हजार से ज्यादा छापेमारी और 222 FIR; जानें क्या है सरकार का ‘एक्शन प्लान’

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UP LPG Raid: एलपीजी कालाबाजारी पर योगी सरकार का हंटर, 17 हजार से ज्यादा छापेमारी और 222 FIR; जानें क्या है सरकार का ‘एक्शन प्लान’

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में घरेलू और वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडरों की कालाबाजारी रोकने के लिए योगी सरकार ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रही है। शासन से मिली जानकारी के मुताबिक, अब तक प्रदेश भर में 17,581 निरीक्षण और छापे मारे जा चुके हैं। इस व्यापक अभियान के तहत 222 एफआईआर दर्ज की गई हैं और कालाबाजारी में संलिप्त 17 भू-माफियाओं और बिचौलियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है।

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सप्लाई चेन पर पैनी नजर: 4,108 वितरकों की निगरानी

​उत्तर प्रदेश सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश में गैस की कोई कमी नहीं है, लेकिन कुछ शरारती तत्व कृत्रिम अभाव पैदा कर रहे हैं। वर्तमान में उत्तर प्रदेश में लगभग 4,108 अधिकृत एलपीजी वितरक सक्रिय हैं। इन सभी एजेंसियों की डिलीवरी चेन की प्रशासन द्वारा डिजिटल और भौतिक रूप से निगरानी की जा रही है।​24 घंटे कंट्रोल रूम: खाद्य आयुक्त कार्यालय में एक राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है जो 24 घंटे सक्रिय है। यहाँ उपभोक्ता गैस रिफिलिंग में देरी या कालाबाजारी की शिकायत दर्ज करा सकते हैं।​जिलों में टास्क फोर्स: प्रत्येक जिले में जिलाधिकारी के नेतृत्व में विशेष टास्क फोर्स का गठन किया गया है, जो गैस एजेंसियों के स्टॉक रजिस्टर और वास्तविक डिलीवरी का मिलान कर रही है।

यूपी में गैस की मांग और आपूर्ति का गणित

​उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा एलपीजी उपभोक्ता राज्य है। आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में प्रतिदिन औसतन 4.5 लाख से 5 लाख सिलेंडरों की मांग रहती है, जिसे प्रमुख तेल कंपनियां (IOCL, BPCL, HPCL) सुचारू रूप से पूरा कर रही हैं। सरकार ने सुनिश्चित किया है कि मांग के मुकाबले 105% आपूर्ति बनी रहे ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके। वाणिज्यिक (Commercial) सिलेंडरों के 20% अनिवार्य आवंटन नियम को भी सख्ती से लागू किया गया है ताकि होटलों और ढाबों में घरेलू सिलेंडरों का अवैध उपयोग रोका जा सके।

अवैध रिफिलिंग और कालाबाजारी रोकने के नियम

​उत्तर प्रदेश सरकार ने ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम’ (Essential Commodities Act) के तहत सख्त नियम लागू किए हैं:​रैंडम चेकिंग: गोदामों और डिलीवरी वैन की औचक जांच।घरेलू बनाम कमर्शियल: घरेलू सिलेंडर का व्यावसायिक उपयोग पाए जाने पर सीधे दुकान सील करने और भारी जुर्माना लगाने का प्रावधान।​अभियोजन कार्रवाई: अब तक 224 लोगों के खिलाफ विभागीय अभियोजन की कार्यवाही शुरू कर दी गई है।

खाद्य आपूर्ति विभाग की सक्रियता: डिफॉल्ट की कोई जगह नहीं

​सोशल मीडिया पर चल रही गैस संकट की अफवाहों को खारिज करते हुए खाद्य आपूर्ति विभाग ने स्पष्ट किया है कि विभाग पूरी तरह सक्रिय है और कहीं भी ‘डिफॉल्ट’ की स्थिति नहीं है। विभाग अब उन वितरकों को चिन्हित कर रहा है जो जानबूझकर बुकिंग के बाद डिलीवरी में 48 घंटे से अधिक की देरी कर रहे हैं। ऐसे वितरकों के लाइसेंस निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

आम जनता से योगी सरकार की अपील

​उत्तर प्रदेश सरकार ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे:​गैस सिलेंडर लेते समय वजन (Weight) और सील की जांच अवश्य करें।​निर्धारित मूल्य से एक भी रुपया अतिरिक्त न दें।​यदि कोई एजेंसी कालाबाजारी करती है या अवैध वसूली करती है, तो तत्काल जिला आपूर्ति अधिकारी (DSO) या टोल फ्री नंबर पर शिकायत करें।​गैस संकट की अफवाहों पर ध्यान न दें और पैनिक बुकिंग (जरूरत से ज्यादा बुकिंग) से बचें।

​मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का यह प्रहार न केवल कालाबाजारी रोकने के लिए है, बल्कि आम आदमी की जेब पर पड़ने वाले अतिरिक्त बोझ को कम करने के लिए भी है। सरकार के इस सख्त रुख से अवैध रिफिलिंग करने वाले सिंडिकेट में खलबली मची हुई है।

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