देहरादून आधी रात को बार-रेस्टोरेंट्स पर ताबड़तोड़ छापेमारी; लेकिन क्या ‘पुराना पैटर्न’ रोक पाएगा क्राइम?
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देहरादून आधी रात को बार-रेस्टोरेंट्स पर ताबड़तोड़ छापेमारी; लेकिन क्या ‘पुराना पैटर्न’ रोक पाएगा क्राइम?
देहरादून (उत्तराखंड): राजधानी देहरादून के राजपुर क्षेत्र में हुई खूनी रोडरेज की घटना ने शहर की सुरक्षा व्यवस्था की कलई खोलकर रख दी है। एक निर्दोष बुजुर्ग की जान जाने के बाद अब देहरादून पुलिस की नींद टूटी है। एसएसपी परमेंद्र डोबाल के कड़े निर्देशों पर सोमवार देर रात देहरादून के चप्पे-चप्पे पर भारी पुलिस बल उतारा गया। एसपी सिटी, एसपी ट्रैफिक और एसपी देहात के नेतृत्व में पुलिस की अलग-अलग टीमों ने उन बार और रेस्टोरेंटों पर धावा बोला, जो निर्धारित समय सीमा के बाद भी धड़ल्ले से खुले हुए थे।
आधी रात को सड़कों पर उतरी पुलिस, संचालकों में हड़कंप
राजपुर की हिंसक घटना के बाद पुलिस प्रशासन अब पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है। अभियान के दौरान क्षेत्राधिकारियों (COs) ने बड़े स्तर पर कार्रवाई करते हुए कई संस्थानों के खिलाफ चालान और सीलिंग की प्रक्रिया शुरू की। पुलिस का स्पष्ट संदेश है कि शहर की शांति व्यवस्था और सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी संस्थान को बख्शा नहीं जाएगा। देर रात तक चली इस कार्रवाई में कई बार संचालकों को चेतावनी दी गई कि यदि दोबारा नियमों का उल्लंघन हुआ, तो सीधे लाइसेंस निरस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी।
क्या केवल चेकिंग से थमेगा अपराध? उठ रहे हैं गंभीर सवाल
मगर इस पुलिसिया कार्रवाई के बीच एक बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या केवल बार और रेस्टोरेंट की चेकिंग से आपराधिक घटनाओं पर अंकुश लग जाएगा?पुराना पैटर्न बनाम नए अपराधी: पुलिस के जानकारों का कहना है कि देहरादून पुलिस अभी भी अपने पुराने पैटर्न पर काम कर रही है। जब कोई बड़ी वारदात होती है, तब पुलिस कुछ दिनों के लिए सड़कों पर सक्रिय दिखती है, लेकिन बाद में स्थिति जस की तस हो जाती है।प्रिवेंटिव इंटेलिजेंस की कमी: जानकारों के मुताबिक, केवल होटलों और बार की तलाशी लेना काफी नहीं है। असली चुनौती उन अपराधियों और अवैध हथियारों पर लगाम कसने की है, जो शहर की सड़कों पर सरेआम घूम रहे हैं।सड़कों पर विजिबिलिटी काफी नहीं: सवाल यह भी है कि अगर पुलिस सिर्फ सड़कों पर ही नजर आएगी और खुफिया तंत्र (LIU) को मजबूत नहीं करेगी, तो अंदरूनी इलाकों और छिपकर रची जाने वाली साजिशों को कैसे रोका जाएगा?
एसएसपी परमेंद्र डोबाल का पक्ष: “कार्रवाई जारी रहेगी”
देहरादून के एसएसपी परमेंद्र डोबाल का कहना है कि जिस तरह से हालिया घटनाएं हुई हैं, उन्हें रोकने के लिए पुलिस हर संभव कदम उठा रही है। उन्होंने कहा:”बार संचालकों के लाइसेंस चेक किए जा रहे हैं और समय सीमा का सख्ती से पालन कराया जा रहा है। हम आम लोगों से भी अपील कर रहे हैं कि वे नियमों का पालन करें और संदिग्ध गतिविधियों की सूचना पुलिस को दें। पुलिस का अभियान केवल एक दिन के लिए नहीं है, बल्कि यह निरंतर जारी रहेगा।”
कानून-व्यवस्था को लेकर जनता की चिंता
देहरादून जैसे शांत शहर में जिस तरह से ‘गैंगवार’ जैसी स्थितियां बन रही हैं, उससे स्थानीय निवासियों में असुरक्षा का भाव है। लोगों का मानना है कि पुलिस को रिएक्टिव (घटना के बाद जागना) होने के बजाय प्रोएक्टिव (घटना से पहले रोकना) होना पड़ेगा। केवल बार बंद करा देने से उन लोगों की मानसिकता नहीं बदलेगी जो हथियारों के बल पर कानून को चुनौती दे रहे हैं।
समाधान की दिशा में ठोस कदम की जरूरत
देहरादून पुलिस के लिए यह साख बचाने की लड़ाई है। राजपुर रोडरेज कांड ने यह साबित कर दिया है कि अपराधी बेखौफ हैं। अब देखना यह होगा कि एसएसपी का यह ‘हंटर’ केवल कुछ संस्थानों को सील करने तक सीमित रहता है या फिर देहरादून पुलिस अपराधियों के मन में ऐसा खौफ पैदा कर पाती है कि भविष्य में किसी निर्दोष को अपनी जान न गंवानी पड़े।
