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Yamuna ghat उत्तराखंड मिलने जा रहा अपना यमुना घाट: कालसी के हरिपुर में आकार ले रहा  राज्य का पहला भव्य जमुना घाट

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Yamuna ghat उत्तराखंड मिलने जा रहा अपना यमुना घाट: कालसी के हरिपुर में आकार ले रहा  राज्य का पहला भव्य जमुना घाट

देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड, जो अपनी पौराणिक नदियों और आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए विश्वविख्यात है, अब एक और ऐतिहासिक अध्याय लिखने जा रहा है। देहरादून जिले के हरिपुर (कालसी) में यमुना नदी के तट पर राज्य का पहला और विशाल ‘जमुना घाट’ तीव्र गति से निर्मित हो रहा है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के इस ड्रीम प्रोजेक्ट ने न केवल जौनसार-बावर क्षेत्र, बल्कि देश भर के कृष्ण भक्तों और श्रद्धालुओं में नई उम्मीद जगा दी है।

पुनर्जीवित हो रहा है खोया हुआ वैभव

​ऐतिहासिक साक्ष्यों और पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, हरिपुर कभी एक अत्यंत महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल हुआ करता था। मान्यता है कि यह स्थान प्राचीन काल में आध्यात्मिक चेतना का केंद्र था, लेकिन समय के साथ प्रलयकारी बाढ़ और भौगोलिक परिवर्तनों के कारण यह वैभव इतिहास के पन्नों में दब गया। मुख्यमंत्री धामी ने इस लुप्त तीर्थ को पुनः स्थापित करने का संकल्प लिया और अब यहाँ लगभग एक किलोमीटर लंबा भव्य घाट आकार ले रहा है।

धामी सरकार का मास्टरप्लान: बजट में भी विशेष प्रावधान

​मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिपुर को एक नए ‘धाम’ के रूप में विकसित करने की घोषणा की थी। इस महत्वाकांक्षी परियोजना की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सरकार ने आगामी बजट में भी इसके लिए विशेष धन आवंटन किया है। मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA) इस प्रोजेक्ट की कार्यदायी संस्था है, जो अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप घाट का निर्माण कर रही है।

सीएम पुष्कर सिंह धामी का कथन:हमारी सरकार हरिपुर जमुना घाट को एक वैश्विक आध्यात्मिक केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए वचनबद्ध है। यह केवल एक घाट नहीं, बल्कि जौनसार-बावर और कृष्ण-यमुना संस्कृति की अस्मिता का प्रतीक बनेगा। हमने इसके लिए पर्याप्त बजट सुरक्षित किया है ताकि निर्माण कार्य में कोई बाधा न आए।”

 

इतिहास और आध्यात्म का अद्भुत संगम

​हरिपुर और कालसी का क्षेत्र केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि ऐतिहासिक दृष्टि से भी अद्वितीय है। यहाँ की मिट्टी में कई कालखंडों की कहानियां दफन हैं:​कृष्ण कालखंड: भगवान कृष्ण और यमुना का अटूट संबंध इस भूमि से जुड़ा है।​सम्राट अशोक: यहाँ स्थित अशोक के शिलालेख मौर्यकालीन गौरव की याद दिलाते हैं।​गुरु गोबिंद सिंह: सिखों के दसवें गुरु, गोविंद सिंह जी के बाल्यकाल और उनके युद्ध प्रशिक्षण की स्मृतियां भी इस क्षेत्र से जुड़ी हैं।​अश्वमेघ यज्ञ: भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की देखरेख में यहाँ सदियों पुराने अश्वमेघ यज्ञ स्थल मौजूद हैं, जो इसके चक्रवर्ती साम्राज्य का केंद्र होने की पुष्टि करते हैं।

विशेष आकर्षण: 25 फुट ऊंची यमुना जी की प्रतिमा

​इस घाट को भव्यता देने के लिए ‘लोक पंचायत जमुना तीर्थ समिति’ एक अनोखी योजना पर काम कर रही है। नदी के बीचों-बीच स्थित पुराने पुल के पिलर पर 25 फुट ऊंची जमुना जी की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। इसके लिए गुजरात के विशेषज्ञ मूर्तिकारों को बुलाया गया है। जल प्रवाह के मध्य स्थित यह प्रतिमा श्रद्धालुओं के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र होगी। इसके अतिरिक्त, समिति को प्राप्त दान की भूमि पर एक विशाल मंदिर निर्माण की योजना भी प्रस्तावित है।

पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बूस्ट

​हरिपुर में जमुना घाट बनने से न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि देहरादून और जौनसार-बावर क्षेत्र के युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खुलेंगे। यमुनोत्री से निकलने वाली यमुना जी को उत्तराखंड में अब तक कोई ऐसा समर्पित घाट नहीं मिला था जहाँ श्रद्धालु व्यवस्थित रूप से स्नान और आरती कर सकें। यह घाट हरिद्वार के ‘हर की पैड़ी’ और ऋषिकेश के ‘त्रिवेणी घाट’ की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है।

हरिपुर जमुना घाट का निर्माण उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। जब यह प्रोजेक्ट पूर्ण होगा, तो यह न केवल यमुना के पावन जल में डुबकी लगाने का स्थान होगा, बल्कि भारत की प्राचीन सभ्यता और आधुनिक विकास के मिलन का साक्षी बनेगा।

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