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कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज का कड़ा निर्देश: “फिजूलखर्ची पर लगाएं लगाम, आर्थिक चुनौतियों के बीच अपनाएं मितव्ययिता”

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कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज का कड़ा निर्देश: “फिजूलखर्ची पर लगाएं लगाम, आर्थिक चुनौतियों के बीच अपनाएं मितव्ययिता”

देहरादून, 06 अप्रैल 2026

​उत्तराखंड सरकार के कद्दावर कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज (पर्यटन, लोक निर्माण, सिंचाई एवं संस्कृति मंत्री) ने प्रदेश की आर्थिक स्थिरता को लेकर एक महत्वपूर्ण और दूरदर्शी कदम उठाया है। वैश्विक परिस्थितियों और मध्यपूर्व में जारी युद्ध के आर्थिक दुष्प्रभावों को देखते हुए, महाराज ने अपने सभी अधीनस्थ विभागों को ‘मितव्ययिता’ (Austerity) का पालन करने के सख्त निर्देश जारी किए हैं।

​मंत्री महाराज ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान समय में संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग न केवल सरकारी विभागों के लिए, बल्कि व्यक्तिगत और पारिवारिक स्तर पर भी अनिवार्य हो गया है।

क्यों उठाया यह कदम? (वैश्विक संकट का असर)

​सतपाल महाराज ने इस निर्णय के पीछे वैश्विक आर्थिक अस्थिरता को मुख्य कारण बताया है। उनके अनुसार:​मध्यपूर्व में युद्ध: वर्तमान में मध्यपूर्व (Middle East) में चल रहे संघर्ष का सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।​सप्लाई चेन और महंगाई: युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) बाधित हुई है, जिससे कच्चे माल और ईंधन की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव आ रहा है।​मुद्रास्फीति का दबाव: वैश्विक स्तर पर बढ़ती मुद्रास्फीति (Inflation) भारत सहित उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था पर भी दबाव बना रही है।

​मंत्री ने कहा कि जब दुनिया एक चुनौतीपूर्ण आर्थिक दौर से गुजर रही हो, तब संसाधनों की बर्बादी देश और प्रदेश की आर्थिक कमर तोड़ सकती है। इसीलिए सामूहिक रूप से ‘सादगी और समझदारी’ अपनाने की आवश्यकता है।

क्या है ‘मितव्ययिता’ का प्लान?

​कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने अपने मीडिया सलाहकार निशीथ सकलानी के माध्यम से जारी प्रेस-विज्ञप्ति में एक स्पष्ट रोडमैप पेश किया है:​प्राथमिकता तय करना: विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वे केवल उन्हीं कार्यों और परियोजनाओं पर बजट खर्च करें जो जनहित में ‘अत्यंत आवश्यक’ हैं। गैर-जरूरी योजनाओं को फिलहाल ठंडे बस्ते में डाला जा सकता है।​संस्थागत अनुशासन: सरकारी कार्यालयों, बैठकों और आयोजनों में होने वाले भव्य खर्चों में कटौती कर उन्हें सादगीपूर्ण तरीके से संपन्न करने का लक्ष्य रखा गया है।​जन-जागरूकता: यह केवल सरकारी आदेश नहीं बल्कि एक सामाजिक आह्वान भी है। मंत्री ने जनता से भी अपील की है कि वे व्यक्तिगत और पारिवारिक स्तर पर भी सोच-समझकर खर्च करें।

कैसे रुकेगा विभागों का खर्चा? (सख्त निर्देश)

​खर्चों पर अंकुश लगाने के लिए महाराज ने लोक निर्माण (PWD), सिंचाई, पर्यटन और संस्कृति विभाग के अधिकारियों को निम्नलिखित दिशा-निर्देश दिए हैं:​फिजूलखर्ची पर तुरंत रोक: विभागों में होने वाली वैसी गतिविधियां जिनका आउटपुट कम है और खर्च ज्यादा, उन्हें तुरंत बंद करने को कहा गया है।​विवेकपूर्ण उपयोग: बिजली, पानी, स्टेशनरी और सरकारी वाहनों जैसे संसाधनों के उपयोग में अत्यधिक सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं।ऑडिट और निगरानी: अधिकारी अब किसी भी नए खर्च को मंजूरी देने से पहले उसकी ‘अनिवार्यता’ की जांच करेंगे। विलासिता से जुड़ी वस्तुओं की खरीद पर पूर्ण प्रतिबंध की संभावना है।​आर्थिक स्थिरता का लक्ष्य: महाराज का मानना है कि यदि हर विभाग छोटे-छोटे खर्चों को बचाएगा, तो सामूहिक रूप से यह बचत राज्य की आर्थिक नींव को मजबूत करेगी और आपातकालीन स्थितियों में काम आएगी।

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