Big breaking उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं पर संकट: नर्सों ने खोला मोर्चा, कल से प्रदेशव्यापी कार्य बहिष्कार का ऐलान; जानें क्या है पूरा विवाद?
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Headline: उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं पर संकट: नर्सों ने खोला मोर्चा, कल से प्रदेशव्यापी कार्य बहिष्कार का ऐलान; जानें क्या है पूरा विवाद?
Dehradun/Tehri Garhwal News: उत्तराखंड के सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा सकती हैं। उत्तराखंड नर्सेज सर्विसेज एसोसिएशन (UNSA) ने टिहरी के जिला चिकित्सालय बौराड़ी में एक वरिष्ठ नर्सिंग अधिकारी के निलंबन के विरोध में आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है। एसोसिएशन ने साफ कर दिया है कि यदि 24 घंटे के भीतर निलंबन वापस नहीं लिया गया, तो 7 अप्रैल 2026 से पूरे प्रदेश में नर्सें कार्य बहिष्कार पर चली जाएंगी।
विवाद की मुख्य वजह: सफाई व्यवस्था और निलंबन
मामले की शुरुआत स्वास्थ्य मंत्री के एक औचक निरीक्षण या मीडिया रिपोर्टों के बाद हुई, जिसमें अस्पताल की सफाई व्यवस्था पर चिंता जताई गई थी। इसके बाद जिला चिकित्सालय बौराड़ी (टिहरी गढ़वाल) की एक वरिष्ठ नर्सिंग अधिकारी को निलंबित कर दिया गया।
उत्तराखंड नर्सेज सर्विसेज एसोसिएशन (UNSA) की अध्यक्ष श्रीमती भारती जुयाल ने इस कार्रवाई को पूरी तरह से अनुचित और एकतरफा बताया है। एसोसिएशन का कहना है कि अस्पतालों में सफाई का जिम्मा आउटसोर्सिंग यानी ठेकेदारों के पास होता है, जिसके लिए ठेकेदार, सुपरवाइजर और अस्पताल प्रबंधन जिम्मेदार होते हैं। सफाई के मुद्दे पर नर्सिंग स्टाफ को बलि का बकरा बनाना न्यायसंगत नहीं है।
एसोसिएशन का अल्टीमेटम और विरोध प्रदर्शन
पत्र के माध्यम से एसोसिएशन ने अपनी मांगों को पुरजोर तरीके से रखा है:काला फीता बांधकर विरोध: आज, 6 अप्रैल 2026 को पूरे प्रदेश के नर्सिंग संवर्ग ने काला फीता बांधकर अपना विरोध दर्ज कराया।24 घंटे की चेतावनी: एसोसिएशन ने सरकार को 24 घंटे का समय दिया है। यदि इस अवधि में वरिष्ठ नर्सिंग अधिकारी का निलंबन रद्द नहीं होता है, तो आंदोलन उग्र होगा।पूर्ण कार्य बहिष्कार: 7 अप्रैल 2026 से उत्तराखंड के सभी सरकारी अस्पतालों में नर्सिंग स्टाफ पूर्ण रूप से कार्य का बहिष्कार करेगा।
नर्सिंग स्टाफ का तर्क: ‘हम सफाई के लिए जिम्मेदार नहीं’
एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि नर्सिंग संवर्ग अस्पताल में सबसे कठिन और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाता है। पत्र में कहा गया, “स्वास्थ्य मंत्री जी को यह ज्ञात होना चाहिए कि सफाई व्यवस्था ठेकेदार के अंतर्गत आती है। सफाई कर्मचारी और उनके सुपरवाइजर इसके लिए जवाबदेह हैं, न कि नर्सिंग अधिकारी।”
आम जनता पर क्या होगा असर?
अगर कल से कार्य बहिष्कार शुरू होता है, तो उत्तराखंड के दूरदराज के इलाकों से लेकर राजधानी देहरादून के बड़े अस्पतालों में मरीजों की देखभाल प्रभावित हो सकती है। इमरजेंसी सेवाओं और वार्डों में नर्सों की अनुपस्थिति से स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह ठप होने का खतरा मंडरा रहा है
