Rishikesh plane landing in dam ऋषिकेश में सी-प्लेन की सफल ट्रायल लैंडिंग: New Era of Tourism & Connectiviy
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Rishikesh plane landing in dam ऋषिकेश में सी-प्लेन की सफल ट्रायल लैंडिंग: New Era of Tourism & Connectiviy
ऋषिकेश/देहरादून: उत्तराखंड के पर्यटन और नागरिक उड्डयन इतिहास में आज एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया। ऋषिकेश स्थित गंगा बैराज (पशुलोक बैराज) के शांत जल पर जब सी-प्लेन ने अपने पंख पसारे, तो वहां मौजूद जनसैलाब तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। एक निजी कंपनी द्वारा आयोजित यह सफल ट्रायल लैंडिंग केवल एक तकनीकी परीक्षण नहीं, बल्कि राज्य की कनेक्टिविटी और ‘साहसिक पर्यटन’ को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का एक सशक्त शंखनाद है।
ऐतिहासिक क्षण: जब गंगा की लहरों पर उतरा विमान
पशुलोक बैराज पर आज उस समय ऐतिहासिक क्षण देखने को मिला जब आसमान से उतरकर एक विमान सीधे गंगा के जलस्तर पर तैरने लगा। विशेषज्ञों के अनुसार, यह ट्रायल दो चरणों में पूरा किया गया।प्रथम चरण: पायलट ने पहले काफी ऊंचाई से क्षेत्र की विस्तृत रेकी (Reconnaissance) की। जलस्तर और हवा की गति का आकलन करने के बाद, बड़ी ही सूझबूझ के साथ विमान को बैराज की झील में सुरक्षित लैंड कराया।द्वितीय चरण: पहली सफल लैंडिंग के बाद विमान ने पुनः उड़ान भरी और कुछ देर हवा में रहने के बाद दूसरी बार सफलतापूर्वक जल-लैंडिंग की। इसके उपरांत विमान ने सुरक्षित टेक-ऑफ कर परीक्षण को पूर्ण घोषित किया।
विमान के रुकते ही पायलट ने कॉकपिट से बाहर निकलकर दोनों हाथ हवा में उठाकर जनता का अभिवादन किया। इस दौरान बैराज के अधिशासी अभियंता अतुल कुमार शर्मा समेत विभाग के कई आला अधिकारी मौजूद रहे, जिन्होंने इस सफलता पर एक-दूसरे को बधाई दी।
सीएम धामी की दूरदर्शी सोच का परिणाम
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार लगातार ‘होमस्टे’ से लेकर ‘हवाई सेवाओं’ तक में नवाचार कर रही है। यह ट्रायल सीएम धामी के उस विजन का हिस्सा है, जिसके तहत उत्तराखंड को देश का प्रमुख सी-प्लेन डेस्टिनेशन बनाने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार की योजना है कि आने वाले समय में:टिहरी झील, नैनीताल और अन्य बड़े जलाशयों को इस सेवा से जोड़ा जाए।चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं के लिए समय की बचत और सुगम यात्रा सुनिश्चित की जाए।वीकेंड ट्रैवलर्स के लिए दिल्ली जैसे शहरों से सीधी पहुंच बनाई जाए।यह उत्तराखंड के इतिहास के लिए एक बड़ा दिन है। जिस तरह से प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है, यह ट्रायल उस दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।” — स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी
स्थानीय अर्थव्यवस्था और उत्साह का माहौल
इस ट्रायल को देखने के लिए बैराज के पास भारी संख्या में स्थानीय लोग और इवनिंग वॉक पर निकले नागरिक जमा हो गए। अचानक जहाज को पानी पर उतरता देख लोग हैरत में पड़ गए। स्थानीय महिलाओं ने हमारे संवाददाता से बात करते हुए इस दृश्य को ‘जादुई’ और ‘रोचक’ बताया।
सी-प्लेन सेवा के संभावित लाभ:रोजगार | स्थानीय युवाओं के लिए लॉजिस्टिक्स और टूरिज्म गाइड के नए अवसर। |कनेक्टिविटी | कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में भी दुर्गम इलाकों तक त्वरित पहुंच। |अर्थव्यवस्था | उच्च श्रेणी के पर्यटकों (High-end Tourists) के आने से राजस्व में वृद्धि। |
भविष्य की राह: चुनौतियों के बीच संभावनाएं
तकनीकी रूप से सफल रहा यह ट्रायल संकेत दे गया है कि उत्तराखंड अब पारंपरिक पर्यटन से आगे बढ़कर अत्याधुनिक ‘एयरो-टूरिज्म’ के लिए तैयार है। हालांकि, नियमित सेवाओं के लिए पर्यावरण मानकों और सुरक्षा प्रोटोकॉल पर विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जा रही है।
ऋषिकेश में हुई यह लैंडिंग बताती है कि आने वाले दिनों में ऋषिकेश केवल योग और अध्यात्म की राजधानी ही नहीं, बल्कि Advanced Air Mobility का भी केंद्र बनेगा। आज की यह ‘रोचक स्टोरी’ कल के उत्तराखंड की हकीकत बनने जा रही है।
