उत्तराखंड: चमोली की योगिता रावत ने रचा इतिहास, पहली बार किसी महिला को मिली प्रदेश ग्राम प्रधान संगठन की कमान
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उत्तराखंड: चमोली की योगिता रावत ने रचा इतिहास, पहली बार किसी महिला को मिली प्रदेश ग्राम प्रधान संगठन की कमान
चमोली/देहरादून | उत्तराखंड के पंचायती राज इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है। चमोली जनपद की सक्रिय महिला जन प्रतिनिधि योगिता रावत को निर्विरोध रूप से प्रदेश ग्राम प्रधान संगठन का अध्यक्ष चुना गया है। यह पहला अवसर है जब प्रदेश स्तर पर ग्राम प्रधानों के इस सबसे बड़े संगठन की कमान किसी महिला के हाथों में सौंपी गई है।
निर्विरोध चयन से बढ़ा जनपद का मान
राजधानी देहरादून में आयोजित प्रदेश ग्राम प्रधान संगठन के चुनाव में सर्वसम्मति से योगिता रावत के नाम पर मुहर लगाई गई। उनके निर्वाचन की घोषणा होते ही चमोली सहित पूरे प्रदेश के ग्रामीण जन प्रतिनिधियों में खुशी की लहर दौड़ गई है। निर्विरोध चयन इस बात का प्रमाण है कि योगिता रावत की कार्यशैली और नेतृत्व क्षमता पर प्रदेश भर के प्रधानों ने अटूट विश्वास जताया है।
संगठन में महिलाओं का दबदबा: सुभागा देवी बनीं उपाध्यक्ष
महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक और कदम बढ़ाते हुए, चमोली की ही लासी ग्राम प्रधान सुभागा देवी कुंवर को प्रदेश संगठन में उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है। एक साथ दो महत्वपूर्ण पदों पर चमोली की महिलाओं की ताजपोशी से सीमांत जनपद के विकास की उम्मीदें और प्रबल हो गई हैं।
ऐतिहासिक क्षण और नई उम्मीदें
पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष नयन सिंह कुंवर ने इस चुनाव परिणाम को ‘ऐतिहासिक’ करार दिया है। उन्होंने कहा:“प्रदेश के इतिहास में पहली बार एक महिला को इस महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी दी गई है। योगिता रावत एक जुझारू और विजनरी नेत्री हैं। हमें पूर्ण विश्वास है कि उनके नेतृत्व में न केवल चमोली, बल्कि पूरे उत्तराखंड के सीमांत और ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को एक नई दिशा और गति मिलेगी।”
जनप्रतिनिधियों ने व्यक्त की खुशी
योगिता रावत और सुभागा देवी के चयन पर चमोली जनपद के तमाम जनप्रतिनिधियों ने हर्ष व्यक्त किया है। बधाई देने वालों में मुख्य रूप से ग्राम प्रधान सुनीता देवी, मंदोधरी देवी, दीपा देवी, मंजू देवी और भगत सिंह सहित कई अन्य प्रधान और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं। सभी ने एक स्वर में कहा कि यह जीत हर उस महिला की है जो धरातल पर रहकर ग्रामीण विकास के लिए संघर्ष कर रही है।
चुनौतियां और लक्ष्य
प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद योगिता रावत के सामने ग्राम प्रधानों के अधिकारों की रक्षा, मानदेय की विसंगतियों को दूर करने और पंचायतों को और अधिक सशक्त बनाने की महत्वपूर्ण चुनौतियां होंगी। खासकर पर्वतीय क्षेत्रों में पलायन रोकना और मनरेगा जैसी योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करना उनकी प्राथमिकता में शामिल रह सकता है।
ग्रामीण विकास को मिलेगी नई ऊर्जा
क्षेत्र के जानकारों का मानना है कि नई कार्यकारिणी के गठन से शासन और प्रशासन के बीच ग्राम प्रधानों का समन्वय और बेहतर होगा। महिलाओं के नेतृत्व में संगठन अब और अधिक संवेदनशीलता के साथ बुनियादी मुद्दों जैसे पेयजल, शिक्षा, और स्वास्थ्य के क्षेत्र में अपनी आवाज बुलंद कर सकेगा।
रिपोर्ट: सोहन सिंह, चमोली
