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राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय द्वाराहाट में बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) पर कार्यशाला का आयोजन

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राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय द्वाराहाट में बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) पर कार्यशाला का आयोजन

​ललित बिष्ट द्वाराहाट (अल्मोड़ा): अल्मोड़ा जिले के द्वाराहाट स्थित मदन मोहन उपाध्याय राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में ‘बौद्धिक संपदा अधिकार’ (Intellectual Property Rights – IPR) विषय पर एक दिवसीय महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य छात्र-छात्राओं को नवाचार, पेटेंट और कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक करना था।

​कार्यक्रम का भव्य शुभारंभ

​कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन मुख्य अतिथि, विपिन त्रिपाठी कुमाऊँ इंजीनियरिंग कॉलेज के निदेशक संतोष कुमार और विशिष्ट अतिथि, द्वाराहाट सिविल न्यायालय के सिविल जज राजेंद्र कुमार कोहली द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया।

​मुख्य अतिथियों के विचार ​निदेशक संतोष कुमार (मुख्य अतिथि): उन्होंने छात्र-छात्राओं को वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि न्यूटन और एडिसन जैसे महान वैज्ञानिकों के संघर्ष और खोज के प्रयासों का गंभीरता से अध्ययन करना चाहिए। भारत में हर साल बढ़ रही पेटेंट की संख्या पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने नवीन तकनीकी जानकारी हासिल करने पर जोर दिया।​जज राजेंद्र कुमार (विशिष्ट अतिथि): सिविल जज राजेंद्र कुमार ने कानूनी पक्ष रखते हुए कॉपीराइट, बौद्धिक संपदा कानून और सृजनात्मक कार्यों की मौलिकता के महत्व को समझाया। उन्होंने बताया कि कैसे कानून किसी व्यक्ति के मौलिक विचारों की रक्षा करता है।

​विशेषज्ञों का संबोधन और तकनीकी सत्र

​कार्यशाला के दौरान विभिन्न विशेषज्ञों ने पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन और व्याख्यान के माध्यम से अपनी बात रखी:

डॉ. डी.सी. पंत (प्राचार्य)

आईपीआर सेल के माध्यम से छात्रों को निरंतर पेटेंट और अधिकारों की जानकारी दी जा रही है।

डॉ. विपिन सुयाल (संयोजक)

वर्तमान युग में बौद्धिक संपदा की चोरी को रोकने के लिए जागरूक होना अनिवार्य है।

डॉ. स्वाति जोशी

ब्रांड अवेयरनेस और मार्केट में उत्पादों की नकल (Spelling बदलकर बेचना) के प्रति सतर्कता।

डॉ. भूपेंद्र कुमार

कॉपीराइट के माध्यम से मौलिक कार्य को सुरक्षित करने पर उसकी चोरी की संभावना शून्य हो जाती है।

बौद्धिक संपदा अधिकार की उपयोगिता

​कार्यक्रम का संचालन करते हुए आईपीआर सेल के सदस्य डॉ. प्रकाश चंद्र ने कहा कि किसी भी व्यक्ति या वैज्ञानिक की निजी मौलिक खोज को सुरक्षित करने के लिए ऐसी कार्यशालाएं मील का पत्थर साबित होती हैं। वरिष्ठ प्राध्यापक प्रोफेसर नाजिश खान ने विद्यार्थियों को परामर्श दिया कि उन्हें वर्तमान समय के बदलते कानूनों के प्रति हमेशा अपडेट रहना चाहिए।जब हम कॉपीराइट के तहत अपना मौलिक कार्य संरक्षित कर लेते हैं, तब उसके चोरी होने या गायब होने की संभावना समाप्त हो जाती है।” — डॉ. भूपेंद्र कुमार

​उपस्थित गणमान्य व्यक्ति

​इस शैक्षणिक आयोजन में महाविद्यालय के कई वरिष्ठ प्राध्यापक और शिक्षाविद शामिल रहे, जिनमें प्रमुख रूप से:​डॉ. उपासना शर्मा, डॉ. प्रणवीर प्रताप, डॉ. भावना पंत​डॉ. हेमचंद्र दुबे, डॉ. अंजुम अली, डॉ. पूनम पंत​डॉ. निर्दोषिता बिष्ट, डॉ. राजेश प्रसाद, डॉ. शैलेंद्र कुमार​डॉ. शर्मिष्ठा, डॉ. रेनू, डॉ. प्रेमलता त्रिपाठी और डॉ. देवजनी अधिकारी।

​कार्यशाला में सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया और अपनी शंकाओं का समाधान किया।

द्वाराहाट महाविद्यालय की यह पहल न केवल छात्रों के शैक्षणिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भविष्य के उद्यमियों और शोधकर्ताओं को अपने नवाचारों (Innovations) को कानूनी रूप से सुरक्षित करने की प्रेरणा भी देती है।

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