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रानीखेत: बसेरा में तीन दिवसीय आपदा प्रबंधन कार्यशाला संपन्न, 40 युवाओं को मिली ‘फर्स्ट रेस्पॉन्डर’ की ट्रेनिंग

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रानीखेत: बसेरा में तीन दिवसीय आपदा प्रबंधन कार्यशाला संपन्न, 40 युवाओं को मिली ‘फर्स्ट रेस्पॉन्डर’ की ट्रेनिंग

ललित बिष्ट, रानीखेत

अल्मोड़ा/रानीखेत। उत्तराखंड जैसे हिमालयी राज्य में भौगोलिक विषमताओं के कारण आने वाली प्राकृतिक आपदाओं के प्रभाव को कम करने की दिशा में स्थानीय समुदायों की भागीदारी अनिवार्य है। इसी उद्देश्य के साथ, लोक चेतना मंच, रानीखेत के तत्वावधान में ग्राम सभा बसेरा में आयोजित तीन दिवसीय विशेष आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण कार्यशाला का भव्य समापन हुआ।

​इस कार्यशाला का प्राथमिक लक्ष्य क्षेत्र के युवाओं को सशक्त बनाकर ‘सामुदायिक नेतृत्व आधारित आपदा प्रतिक्रिया टीमों’ (Community-Led Disaster Response Teams) का गठन करना था, जो किसी भी आपात स्थिति में सरकारी तंत्र के पहुँचने से पहले प्राथमिक स्तर पर राहत और बचाव कार्य संचालित कर सकें।

युवाओं में दिखा भारी उत्साह

​कार्यशाला के दौरान बसेरा और आसपास के क्षेत्रों के लगभग 40 युवक-युवतियों ने सक्रिय रूप से प्रतिभाग किया। प्रशिक्षण के प्रति स्थानीय युवाओं में जबरदस्त उत्साह देखा गया। प्रतिभागियों का मानना था कि पहाड़ की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में इस प्रकार का व्यावहारिक ज्ञान न केवल जीवन रक्षक साबित होता है, बल्कि सामुदायिक एकजुटता को भी बढ़ावा देता है।

मास्टर ट्रेनर ने सिखाए बचाव के गुर

​तीन दिनों तक चले इस गहन प्रशिक्षण शिविर में मुख्य प्रशिक्षक (Master Trainer) श्री भुवन चंद्र चौबे ने अपनी विशेषज्ञता के माध्यम से प्रतिभागियों को आपदा प्रबंधन की जटिल बारीकियों को सरल भाषा में समझाया। प्रशिक्षण के मुख्य बिंदु निम्नलिखित रहे:​क्षमता विकास और त्वरित प्रतिक्रिया: आपदा के शुरुआती ‘गोल्डन ऑवर’ में कैसे शांत रहकर निर्णय लिए जाएं और उपलब्ध संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग कैसे हो।​मॉक ड्रिल (Mock Drill): भूकंप, भूस्खलन या आगजनी जैसी स्थितियों में घायलों को निकालने और उन्हें प्राथमिक उपचार (First Aid) देने का व्यावहारिक अभ्यास कराया गया।​प्रभावी कार्ययोजना: ग्राम स्तर पर आपदा मानचित्रण और आपसी समन्वय के माध्यम से एक प्रभावी रिस्पॉन्स प्लान तैयार करने की विधि सिखाई गई।​सामुदायिक नेतृत्व: आपदा के समय अफरा-तफरी को नियंत्रित करने के लिए नेतृत्व कौशल के महत्व पर जोर दिया गया।

प्रथम उत्तरदाता के रूप में उभरेंगे युवा

​प्रशिक्षण के समापन पर प्रशिक्षक श्री चौबे ने कहा कि “आपदा प्रबंधन केवल तकनीक नहीं, बल्कि त्वरित सूझबूझ का खेल है।” इस अवसर पर कैलाश चंद्र बिष्ट और हंसी भंडारी ने भी प्रशिक्षण की उपयोगिता पर प्रकाश डाला।

​लोक चेतना मंच के पदाधिकारियों ने समापन सत्र को संबोधित करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि ये प्रशिक्षित 40 युवा अब केवल स्वयंसेवक नहीं, बल्कि अपने क्षेत्र के ‘प्रथम उत्तरदाता’ (First Responders) हैं। किसी भी प्राकृतिक आपदा जैसे बादल फटने, जंगल की आग या भूस्खलन के दौरान ये युवा प्रशासन और ग्रामीणों के बीच एक मजबूत सेतु का काम करेंगे।

​कार्यशाला के समापन पर सभी प्रतिभागियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहने का संकल्प दिलाया गया। उपस्थित वक्ताओं ने जोर दिया कि पहाड़ों में दूरी और दुर्गम रास्तों के कारण अक्सर बाहरी मदद पहुँचने में देरी हो जाती है, ऐसे में बसेरा के इन युवाओं का यह प्रशिक्षण पूरे क्षेत्र के लिए सुरक्षा कवच का कार्य करेगा।

​इस अवसर पर ग्राम प्रधान समेत क्षेत्र के कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे, जिन्होंने लोक चेतना मंच के इस प्रयास की सराहना की और इसे अन्य विकासखंडों में भी संचालित करने की आवश्यकता बताई।

मुख्य बिंदु एक नज़र में:स्थान: ग्राम सभा बसेरा, रानीखेत​आयोजक: लोक चेतना मंच।​प्रतिभागी: 40 स्थानीय युवा।मुख्य प्रशिक्षक: श्री भुवन चंद्र चौबे।​उद्देश्य: सामुदायिक आपदा प्रतिक्रिया टीमों का गठन।

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