इको-फ्रेंडली बद्रीनाथ: QR कोड और रिफंड सिस्टम से प्लास्टिक मुक्त होगा हिमालयी धाम, चमोली जिला प्रशासन की बड़ी पहल
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इको-फ्रेंडली बद्रीनाथ: QR कोड और रिफंड सिस्टम से प्लास्टिक मुक्त होगा हिमालयी धाम, चमोली जिला प्रशासन की बड़ी पहल
सोहन सिंह चमोली/बद्रीनाथ (उत्तराखंड): विश्व प्रसिद्ध भगवान बद्री विशाल के धाम और हिमालय की संवेदनशील पारिस्थितिकी (Ecology) को प्लास्टिक प्रदूषण से बचाने के लिए उत्तराखंड सरकार ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। 09 अप्रैल 2026 को जिला मुख्यालय में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी गौरव कुमार ने बद्रीनाथ धाम को ‘प्लास्टिक मुक्त क्षेत्र’ घोषित करने की रणनीति पर मुहर लगा दी है।
अब बद्रीनाथ आने वाले तीर्थयात्रियों को प्लास्टिक कचरे के बदले नकद पैसे (Refund) मिलेंगे, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रचलित ‘सर्कुलर इकोनॉमी’ मॉडल का हिस्सा है।
क्यूआर कोड और डिपॉजिट रिफंड: कैसे काम करेगी यह हाई-टेक व्यवस्था?
बद्रीनाथ धाम और यात्रा मार्ग पर बिकने वाली हर प्लास्टिक बोतल पर अब एक विशेष QR Code चस्पा होगा। इस डिजिटल पहल का मुख्य उद्देश्य कचरे की ट्रैकिंग और उसका शत-प्रतिशत निस्तारण सुनिश्चित करना है।QR कोड वितरण: रिसाइकल कंपनी द्वारा गोविंदघाट, बद्रीनाथ और भारत के प्रथम गांव ‘माणा’ के थोक विक्रेताओं, होटलों और रेस्टोरेंट संचालकों को ₹10 मूल्य के QR कोड उपलब्ध कराए जाएंगे।डिपॉजिट रिफंड सिस्टम (DRS): यात्री जब पानी या कोल्ड ड्रिंक की बोतल खरीदेंगे, तो वे ₹10 अतिरिक्त जमा करेंगे।कैशबैक सेंटर: यात्रा मार्ग और धाम में स्थापित ‘डिपॉजिट रिफंड काउंटर्स’ पर जब यात्री अपनी खाली बोतल वापस करेंगे, तो उन्हें वह धनराशि तत्काल वापस (Refund) मिल जाएगी।
जनआंदोलन बनेगा प्लास्टिक मुक्त अभियान
जिलाधिकारी गौरव कुमार ने बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए कि इस अभियान को केवल सरकारी फाइल तक सीमित न रखकर एक ‘जनआंदोलन’ बनाया जाए। उन्होंने कहा कि:रिसाइकल कंपनी के 60 प्रशिक्षित कार्मिक ग्राउंड जीरो पर तैनात रहेंगे।सिर्फ बोतल ही नहीं, बल्कि चिप्स और मैगी के पैकेट्स को भी इस क्यूआर कोड प्रणाली के दायरे में लाने का प्रस्ताव है।धाम क्षेत्र में रीसाइक्लिंग सेंटरों की संख्या को बढ़ाया जाएगा ताकि कचरा एकत्रीकरण में कोई बाधा न आए।
पर्यावरण संरक्षण और अंतरराष्ट्रीय मानक
हिमालयी क्षेत्र में बढ़ता प्लास्टिक कचरा न केवल ग्लेशियरों के लिए खतरा है, बल्कि यह अलकनंदा और गंगा जैसी पवित्र नदियों के उद्गम स्थल को भी प्रदूषित कर रहा है। बद्रीनाथ धाम में लागू किया जा रहा यह मॉडल स्विट्जरलैंड और जर्मनी जैसे देशों के ‘ग्रीन टूरिज्म’ मानकों के अनुरूप है।
मुख्य विकास अधिकारी डॉ. अभिषेक त्रिपाठी और उपजिलाधिकारी ज्योतिर्मठ चन्द्रशेखर वशिष्ठ ने बताया कि जिला प्रशासन और रिसाइकल कंपनी के बीच एक औपचारिक अनुबंध (MOU) किया गया है, जो इस प्रोजेक्ट की निरंतरता सुनिश्चित करेगा।
यात्रियों के लिए विशेष दिशा-निर्देश
जिला प्रशासन ने देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे:प्लास्टिक का उपयोग न्यूनतम करें।खरीदी गई बोतलों को खुले में न फेंककर निर्धारित रिफंड काउंटरों पर ही जमा करें।पवित्र धाम की स्वच्छता बनाए रखने में ‘जिम्मेदार पर्यटक’ (Responsible Tourist) की भूमिका निभाएं।“हमारा लक्ष्य बद्रीनाथ धाम को केवल एक धार्मिक गंतव्य ही नहीं, बल्कि स्वच्छता के मामले में एक वैश्विक उदाहरण बनाना है। सभी के सामूहिक प्रयासों से ही हम स्वच्छ और हरित धाम का लक्ष्य प्राप्त कर सकते हैं।” — गौरव कुमार, जिलाधिकारी चमोली
