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स्वच्छ और पर्यावरण हितैषी बद्रीनाथ धाम: जिला प्रशासन की नई पहल

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स्वच्छ और पर्यावरण हितैषी बद्रीनाथ धाम: जिला प्रशासन की नई पहल

चमोली, 09 अप्रैल 2026: चारधाम यात्रा के सुप्रसिद्ध पड़ाव, श्री बद्रीनाथ धाम को स्वच्छ, सुंदर और प्लास्टिक मुक्त बनाने के संकल्प के साथ जिला प्रशासन ने अपनी कमर कस ली है। गुरुवार को जिलाधिकारी गौरव कुमार की अध्यक्षता में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में यात्रा मार्ग और धाम क्षेत्र को प्लास्टिक कचरे से मुक्त रखने के लिए क्यूआर कोड (QR Code) और रिफंड व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू करने का निर्णय लिया गया।

1. क्यूआर कोड और डिपॉजिट रिफंड प्रणाली (DRS)

​इस वर्ष की यात्रा में सबसे प्रमुख आकर्षण और समाधान ‘डिपॉजिट रिफंड स्कीम’ है। रिसाइकल कंपनी के प्रतिनिधि रोहित जोशी ने बताया कि धाम में बिकने वाली प्लास्टिक की बोतलों पर विशेष क्यूआर कोड लगाए जाएंगे।​प्रक्रिया: थोक विक्रेताओं और दुकानदारों को न्यूनतम 10 रुपये मूल्य वाले क्यूआर कोड उपलब्ध कराए जाएंगे।​रिफंड: जब कोई तीर्थयात्री खाली बोतल को निर्धारित ‘डिपॉजिट रिफंड काउंटर’ पर वापस करेगा, तो उसे क्यूआर कोड स्कैनिंग के आधार पर निर्धारित धनराशि वापस मिल जाएगी।​विस्तार: प्रशासन का लक्ष्य केवल बोतलों तक सीमित नहीं है; आने वाले समय में चिप्स, मैगी और अन्य खाद्य पदार्थों के प्लास्टिक पैकेट्स पर भी क्यूआर कोड लगाने का प्रस्ताव है।

2. अभियान का बुनियादी ढांचा और जनशक्ति

​अभियान को धरातल पर उतारने के लिए प्रशासन ने व्यापक तैयारी की है:​रीसाइक्लिंग सेंटर: पिछले वर्ष धाम क्षेत्र में 8 रीसाइक्लिंग सेंटर कार्यरत थे। इस वर्ष यात्रियों की संख्या और आवश्यकता को देखते हुए इनकी संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।​कार्यबल: रिसाइकल कंपनी द्वारा लगभग 60 कार्मिकों को इस विशेष अभियान के लिए तैनात किया जाएगा, जो कचरा संग्रहण और जन-जागरूकता का कार्य करेंगे।​क्षेत्र: यह व्यवस्था मुख्य रूप से गोविंदघाट, बद्रीनाथ धाम और माणा क्षेत्र के होटल, रेस्टोरेंट और दुकानों में लागू की जाएगी।

3. जनआंदोलन बनाने का आह्वान

​जिलाधिकारी गौरव कुमार ने बैठक में स्पष्ट किया कि कोई भी अभियान केवल सरकारी प्रयासों से सफल नहीं हो सकता। उन्होंने इसे एक ‘जनआंदोलन’ का स्वरूप देने पर बल दिया।​”प्लास्टिक मुक्त बद्रीनाथ धाम का संकल्प तभी सिद्ध होगा जब तीर्थयात्री और स्थानीय व्यापारी इसमें सक्रिय भागीदारी निभाएंगे। हमारा उद्देश्य केवल कचरा साफ करना नहीं, बल्कि प्लास्टिक के उपयोग को न्यूनतम करना है।” – जिलाधिकारी, चमोली

 

4. समन्वय और दिशा-निर्देश

​बैठक में मुख्य विकास अधिकारी डॉ. अभिषेक त्रिपाठी, एसडीएम ज्योतिर्मठ चन्द्रशेखर वशिष्ठ और नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी भी उपस्थित रहे। जिलाधिकारी ने रिसाइकल कंपनी को निर्देशित किया कि वे:​स्थानीय व्यापारियों, होटल संचालकों और थोक विक्रेताओं के साथ बेहतर समन्वय स्थापित करें।व्यापक स्तर पर प्रचार-प्रसार सुनिश्चित करें ताकि यात्रियों को रिफंड केंद्रों की जानकारी हो।​नियमित अंतराल पर प्रगति की समीक्षा रिपोर्ट प्रस्तुत करें।

​हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए, श्री बद्रीनाथ धाम में प्लास्टिक प्रबंधन की यह तकनीक आधारित पहल एक मील का पत्थर साबित हो सकती है। क्यूआर कोड आधारित रिफंड व्यवस्था न केवल कचरे को नियंत्रित करेगी, बल्कि तीर्थयात्रियों को जिम्मेदार पर्यटन (Responsible Tourism) के प्रति प्रोत्साहित भी करेगी।

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