US-Iran Peace Talks Fail, ईरान और अमेरिका के बीच में सीजफायर को लेकर वार्ता रही बेनतीजाP J.D. Vance खाली हाथ वापस लौटे अमेरिका
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US-Iran Peace Talks Fail, ईरान और अमेरिका के बीच में सीजफायर को लेकर वार्ता रही बेनतीजाP J.D. Vance खाली हाथ वापस लौटे अमेरिका
इस्लामाबाद (ब्यूरो): दुनिया की निगाहें जिस शांति वार्ता (Peace Talks) पर टिकी थीं, वह आखिरकार बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हो गई है। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में America और Iran के बीच चली 21 घंटे की मैराथन बैठक पूरी तरह विफल रही। गतिरोध (Deadlock) इस कदर बढ़ा कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति J.D. Vance बिना किसी संयुक्त घोषणा (Joint Declaration) के ही वाशिंगटन के लिए रवाना हो गए।
High-Stakes Diplomacy: 21 घंटों का घटनाक्रम
इस्लामाबाद में चली इस उच्च-स्तरीय वार्ता में दोनों देशों के डेलिगेशन (Delegations) ने अलग-अलग स्तरों पर चर्चा की। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वांस ने स्पष्ट किया कि उन्होंने Maximum Flexibility (अधिकतम लचीलापन) दिखाने की कोशिश की, ताकि क्षेत्र में Ceasefire (युद्धविराम) सुनिश्चित हो सके। हालांकि, ईरान के अड़ियल रुख के कारण वार्ता किसी भी नतीजे (Result) पर नहीं पहुँच सकी।
ईरान की शर्तें और ‘लेबनान’ का पेच
ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने वार्ता के दौरान स्पष्ट रूप से लेबनान में इजरायल (Israel) द्वारा किए जा रहे हमलों को रोकने की मांग की। ईरान का तर्क था कि जब तक इजरायली हमले बंद नहीं होते, शांति की बात बेमानी है। चूंकि इस वार्ता की मेज पर Israel शामिल नहीं था, इसलिए अमेरिका के लिए इन शर्तों को मानना असंभव था।
इसके अलावा, ईरान ने निम्नलिखित मांगें प्रमुखता से रखीं:
- Compensation: युद्ध के दौरान ईरान को हुए आर्थिक नुकसान की भरपाई।
- Released Assets: अमेरिका द्वारा फ्रीज किए गए ईरानी फंड्स को तत्काल रिलीज करना।
- Zero Interference: ईरान के आंतरिक मामलों में किसी भी विदेशी दखलंदाजी पर पूर्ण रोक।
Nuclear Power और Strait of Hormuz का मुद्दा
अमेरिका का मुख्य एजेंडा ईरान को Nuclear Power बनने से रोकना और Nuclear Reactors के विस्तार पर पाबंदी लगाना था। साथ ही, अमेरिका चाहता था कि Strait of Hormuz (हॉर्मुज जलडमरूमध्य) से अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही बिना किसी ‘टोल टैक्स’ या बाधा के सुनिश्चित की जाए। लेकिन ईरान इन दोनों ही मुद्दों पर टस से मस नहीं हुआ।
इस्लामाबाद: अभेद्य सुरक्षा और कूटनीतिक प्रयास
इस Peace Summit के लिए इस्लामाबाद को पूरी तरह छावनी में तब्दील कर दिया गया था। सुरक्षा के मद्देनजर:
- शहर के सभी स्कूल-कॉलेज दो दिनों के लिए बंद रहे।
- 10,000 से अधिक पुलिस और सेना के जवानों की तैनाती की गई थी।
- पाकिस्तान इस वार्ता के जरिए अपनी कूटनीतिक साख (Diplomatic Credibility) मजबूत करना चाहता था, लेकिन नतीजा ‘शून्य’ रहा।
कल से क्या? (The Road Ahead)
उपराष्ट्रपति जेडी वांस के रवाना होने के बाद भी अमेरिका के कुछ उच्चाधिकारी अभी इस्लामाबाद में रुके हुए हैं, जो Back-channel Diplomacy (पर्दे के पीछे की कूटनीति) के जरिए रास्ते तलाश रहे हैं। हालांकि, राष्ट्रपति ट्रंप (या वर्तमान राष्ट्रपति) की वह चेतावनी अभी भी हवा में तैर रही है जिसमें उन्होंने कहा था कि यदि ईरान ने सकारात्मक कदम नहीं उठाए, तो Military Action (सैन्य हमले) और बड़े हो सकते हैं।
फिलहाल, सोमवार से शुरू हो रहा नया सप्ताह दोनों देशों के रिश्तों के लिए और भी चुनौतीपूर्ण होने वाला है। क्या कूटनीतिक स्तर पर फिर कोई पहल होगी या खाड़ी क्षेत्र में युद्ध के बादल और गहरे होंगे, यह आने वाला वक्त ही बताएगा।
