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सत्यनिष्ठा और वैचारिक एकजुटता ही पत्रकारिता की असली ताकत: गाजीपुर में ‘उपजा’ की भव्य गोष्ठी संपन्न

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सत्यनिष्ठा और वैचारिक एकजुटता ही पत्रकारिता की असली ताकत: गाजीपुर में ‘उपजा’ की भव्य गोष्ठी संपन्न

गाजीपुर।

हिंदी पत्रकारिता दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर उत्तर प्रदेश जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन (उपजा) के तत्वावधान में कचहरी स्थित टैगोर मार्केट के ‘पत्रकार पॉइंट’ कार्यालय पर एक गरिमामयी विचारगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस विशेष संगोष्ठी में जनपद के वरिष्ठ पत्रकारों, साहित्यकारों, विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों और प्रबुद्धजीवियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने वर्तमान दौर की पत्रकारिता की चुनौतियों तथा आज से दो शताब्दी पूर्व (200 वर्ष पहले) की हिंदी पत्रकारिता के गौरवशाली सफर को संदर्भित करते हुए अपने-अपने सारगर्भित विचार व्यक्त किए।

​गोष्ठी की अध्यक्षता उपजा के जिला अध्यक्ष उधम सिंह ने की, जबकि कार्यक्रम का सफल और जीवंत संचालन वरिष्ठ पत्रकार राजेश सिंह द्वारा किया गया।

​पौराणिक काल से आधुनिक युग तक पत्रकारिता का सफर: डॉ. विजेंद्र प्रताप सिंह

​कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रख्यात शिक्षाविद एवं बुद्धिजीवी डॉ. विजेंद्र प्रताप सिंह ने दीप प्रज्वलित कर गोष्ठी का शुभारंभ किया। अपने संबोधन में उन्होंने पत्रकारिता के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक आयामों को बेहद व्यापक रूप में प्रस्तुत किया।

​मुख्य अतिथि डॉ. सिंह ने कहा: ​”पत्रकारिता का अस्तित्व केवल आधुनिक समाज तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके सूत्र हमारे इतिहास और संस्कृति में बहुत गहरे जुड़े हैं। रामायण काल में देवर्षि नारद और महाभारत काल में संजय द्वारा धृतराष्ट्र को युद्ध का आंखों देखा हाल सुनाना, सूचनाओं के सटीक और निष्पक्ष प्रेषण यानी पत्रकारिता का ही आदि स्वरूप था। समय के साथ माध्यम बदले हैं, लेकिन सूचना की प्रामाणिकता का सिद्धांत आज भी वही है।”

 

​उन्होंने समकालीन परिदृश्य पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज के चुनौतीपूर्ण समय में पत्रकारों को अपनी कलम की धार बनाए रखने के लिए आपसी मतभेदों को भुलाकर वैचारिक एकता और एकजुटता पर विशेष बल देना होगा।

​महान पत्रकार स्व. राजरूप शुक्ला के पुत्र ‘सोनू’ का भावपूर्ण सम्मान

​इस वर्ष ‘उपजा’ द्वारा हिंदी पत्रकारिता दिवस को और भी यादगार बनाते हुए जनपद की पत्रकारिता के स्तंभ रहे महान और कर्मठ पत्रकार स्वर्गीय राजरूप शुक्ला के अविस्मरणीय योगदान को नमन किया गया। संस्था की ओर से उनके सुपुत्र ‘सोनू’ को अंगवस्त्र, स्मृति चिह्न और पुष्पगुच्छ भेंट कर भावपूर्ण रूप से सम्मानित किया गया। उपस्थित सभी पत्रकारों ने स्व. राजरूप शुक्ला की निर्भीक लेखनी और उनके आदर्शों को याद करते हुए उनके दिखाए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

​वर्तमान चुनौतियां और पत्रकारिता के बदलते आयाम

​गोष्ठी में विभिन्न क्षेत्रों से आए प्रमुख वक्ताओं ने बेबाकी से अपने विचार रखे। वक्ताओं ने रेखांकित किया कि 30 मई 1826 को ‘उदन्त मार्तण्ड’ के प्रकाशन के साथ शुरू हुई हिंदी पत्रकारिता ने राष्ट्र को गुलामी की जंजीरों से मुक्त कराने में मुख्य भूमिका निभाई थी। आज तकनीक के इस दौर में पत्रकारिता के सामने अपनी साख, विश्वसनीयता और निष्पक्षता को बचाए रखने की एक बड़ी चुनौती है।

​विचार व्यक्त करने वाले प्रमुख प्रबुद्ध जनों और वक्ताओं में अनिल उपाध्याय, अभिषेक सिंह, डॉ. अजय प्रताप, सुमन सिंह सकरवार शामिल रहे। वहीं राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्र से समाजवादी पार्टी के पूर्व जिला अध्यक्ष रामधारी सिंह यादव, छात्र नेता सदानन्द यादव और भारतीय जनता पार्टी के मीडिया प्रभारी शशिकान्त शर्मा ने भी लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की मजबूती और पत्रकारों की सुरक्षा व सम्मान पर अपनी बात रखी।

​प्रबुद्ध वर्ग और पत्रकारों की गरिमामयी उपस्थिति

​इस अवसर पर पत्रकारिता और साहित्य जगत से जुड़े तमाम दिग्गजों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से प्रमोद कुमार राय, आशुतोष त्रिपाठी, दुर्ग विजय सिंह, प्रख्यात कवि दिनेश चन्द्र शर्मा, रुद्र नारायण शर्मा, अमरजीत राय, तनवीर खाँ, देवव्रत शर्मा, विनोद गुप्ता, आलोक त्रिपाठी, सूर्यवीर सिंह, अंकित सिंह और अनिलाभ सहित भारी संख्या में ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों के पत्रकार एवं प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे।

अध्यक्षीय उद्बोधन एवं आभार:

कार्यक्रम के अंत में अध्यक्षीय भाषण देते हुए जिला अध्यक्ष उधम सिंह ने सभी आगंतुक अतिथियों, राजनेताओं और पत्रकार साथियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ‘उपजा’ हमेशा पत्रकारों के हितों, उनके अधिकारों और उनकी गरिमा की रक्षा के लिए संकल्पबद्ध है। सभी उपस्थित सदस्यों ने एक स्वर में पत्रकारिता के गिरते मूल्यों को बचाने और जनसरोकारों से जुड़ी खबरों को प्राथमिकता देने का सामूहिक संकल्प लिया।

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