Today Kedarnath helli ticket booking 2026:आज शाम से केदारनाथ हेली सेवा की बुकिंग शुरू; जानें रूट से लेकर सुविधाओं तक सब कुछ
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Today Kedar helli ticket booking 2026:आज शाम से केदारनाथ हेली सेवा की बुकिंग शुरू; जानें रूट से लेकर सुविधाओं तक सब कुछ
विशेष डेस्क, देहरादून | 15 अप्रैल, 2026
हिमालय की गोद में बसे उत्तराखंड के पावन चारधामों के कपाट खुलने की घड़ी नजदीक आ गई है। आगामी 19 अप्रैल से शुरू हो रही इस पावन यात्रा को लेकर देश-दुनिया के श्रद्धालुओं में भारी उत्साह है। राज्य सरकार और प्रशासन ने इस बार यात्रा को ‘सुगम, सरल और सुरक्षित’ बनाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। इसी कड़ी में आज शाम का समय उन यात्रियों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, जो हेलीकॉप्टर के जरिए बाबा केदार के दर्शन करना चाहते हैं।
आज शाम 6 बजे से खुलेगा बुकिंग का द्वार
केदारनाथ धाम की दुर्गम चढ़ाई को आसान बनाने वाली हेलीकॉप्टर सेवा के लिए टिकटों की मारामारी हर साल रहती है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आज यानी 15 अप्रैल को शाम 6:00 बजे से IRCTC की आधिकारिक वेबसाइट पर बुकिंग विंडो खोल दी जाएगी।
पहले चरण में केवल 15 दिनों के लिए टिकट बुक किए जा सकेंगे। यह निर्णय इसलिए लिया गया है ताकि मौसम की अनिश्चितता और तकनीकी व्यवस्थाओं का सही आकलन किया जा सके। पूर्व में यह बुकिंग 10 और 11 अप्रैल को प्रस्तावित थी, लेकिन अब अंतिम तैयारियों के बाद आज शाम से श्रद्धालु अपने टिकट सुरक्षित कर सकेंगे। इसमें फाटा, गुप्तकाशी और सिरसी जैसे प्रमुख हेलीपैड से सेवाएं संचालित होंगी।
मुख्यमंत्री धामी खुद संभाल रहे हैं कमान
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इस बार यात्रा की तैयारियों पर सीधे नजर रख रहे हैं। लाखों की संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी तरह की असुविधा न हो, इसके लिए वे लगातार अधिकारियों के साथ मैराथन बैठकें कर रहे हैं।
इसी क्रम में 17 अप्रैल को मुख्यमंत्री स्वयं रुद्रप्रयाग और गौरीकुंड के पास के इलाकों का स्थलीय निरीक्षण करेंगे। वे पैदल मार्ग की स्थिति, पेयजल आपूर्ति और स्वास्थ्य सेवाओं का जायजा लेंगे। मुख्यमंत्री का स्पष्ट निर्देश है कि केदारनाथ की 18 किलोमीटर की पैदल यात्रा के दौरान यात्रियों को हर मोड़ पर सुरक्षा और सुविधा का अहसास होना चाहिए।
बर्फबारी की चुनौती और ग्लेशियरों को काटकर बनाया रास्ता
इस साल मार्च और अप्रैल की शुरुआत में हुई भारी बर्फबारी ने लोक निर्माण विभाग और सीमा सड़क संगठन (BRO) की चिंता बढ़ा दी थी। बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम जाने वाले कई रास्तों पर भारी बर्फ जमी थी, जिससे मरम्मत कार्यों में बाधा आई।
विशेष रूप से हनुमान चट्टी, लिनचोली और छानी शिविर जैसे इलाकों में विशाल ग्लेशियरों को काटकर रास्ता तैयार किया गया है। वर्तमान में सड़कों की मरम्मत और सुधारीकरण का काम अंतिम चरण में है। प्रशासन ने संवेदनशील स्थानों को चिन्हित कर वहां अतिरिक्त सुरक्षा बल और स्वास्थ्य शिविर तैनात किए हैं।
आधुनिकता की ओर कदम: रोपवे और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर
सरकार भविष्य की यात्रा को और भी आधुनिक बनाने की दिशा में काम कर रही है। केदारनाथ धाम के लिए रोपवे परियोजना की डीपीआर तैयार हो चुकी है, जिससे आने वाले वर्षों में घंटों की यात्रा मिनटों में सिमट जाएगी। इसके अलावा, ‘भारतमाला’ और ‘मंदिर माला’ (मानसखंड मंदिर माला मिशन) योजनाओं के तहत उत्तराखंड के तीर्थ स्थलों को जोड़ने के लिए मास्टर प्लान पर काम चल रहा है, जिससे न केवल चारधाम बल्कि राज्य के अन्य पौराणिक मंदिरों में भी पर्यटन और रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।
बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री में भी हलचल तेज
केवल केदारनाथ ही नहीं, बल्कि बद्रीनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री और हेमकुंड साहिब की यात्रा को लेकर भी तैयारियां युद्धस्तर पर हैं। ऋषिकेश और हरिद्वार के ट्रांजिट कैंपों में पंजीकरण के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटने लगी है। प्रशासन ने अपील की है कि सभी यात्री अपना पंजीकरण (Registration) अनिवार्य रूप से कराएं और स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी गाइडलाइंस का पालन करें।
उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था और पहचान की रीढ़ मानी जाने वाली ‘चारधाम यात्रा’ इस बार नए कलेवर में नजर आएगी। सरकार की कोशिश है कि हिमालय की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद हर श्रद्धालु एक सुखद और आध्यात्मिक अनुभव लेकर लौटे। 19 अप्रैल से शुरू हो रही यह यात्रा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह ‘अतिथि देवो भव:’ की भावना के साथ उत्तराखंड के विकास का नया अध्याय लिखने को भी तैयार है।
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